यूपी में जब सैयां भये कोतवाल..

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-सुरेंद्र कुमार।।

निर्भया के हत्यारों को फांसी होने के बाद भी दुष्कर्म जैसे घृणित अपराधों को सरंजाम देने वाले अपराधियों में कोई डर नहीं समय। उल्टे तब से ही उत्तर प्रदेश में बलात्कार और बलात्कार तथा हत्या के अपराध लगभग रोज़ हो रहे है और इसका एक मात्र कारण हमारी कानून तथा न्याय-व्यवस्था है। बलात्कारियों के खिलाफ FIR भी काफी हील हुज्जत के बाद ही दर्ज हो पाती है। थाने में रिपोर्ट लेने में ही बहुत से बहाने लगा देते है। गुमशुदगी की रिपोर्ट पर भी यह सुनने को और पढ़ने को मिला है कि लड़कीं किसी लड़के के साथ भाग गई होगी। इंतज़ार करो अपने आप आ जायेगी। थाने में लड़कीं के घरवालों को यही कह के ज़लील किया जाता है। ऐसा भी देखा गया है कि रिपोर्ट के लिए पीड़ित पक्ष को घण्टों तक बिठाके रखा जाता है। फिर मुकदमा अदालत में पहुंचने तक भ्रष्टाचार भी खूब होता है। इसके बाद फैसले में बरसों लग जाते है। वहाँ भी खूब ही भ्रष्टाचार होता है। इसके अतिरिक्त अदालतों में जजों की कमी के कारण भी बहत देर होती है।

प्रदेश के लगभग सभी जिलों में भ्रष्टाचार का अभूतपूर्व बोलबाला है। बताया जाता है कि फैसले के लिए भी जज इंतज़ार करते हैं। फिर हाई कोर्ट। इस तरह लगभग दस पंद्रह साल लग जाते हैं। निर्भया के ही केस में ही आठ साल लग गए जबकि सारी दुनिया की नज़र उस केस पर थी। इस तरह बलात्कारियों और कातिलों को भरोसा हो जाता है कि उनका कुछ नहीं बिगड़ने वाला। भृष्टाचार भी उनकी रक्षा करते है। फैसले तक वे और भी कुकृत्यों को अंजाम दे देते है।

अगर उनके राजनीतिक सम्बन्ध होते हैं तो फिर तो उन्हें कौन छूने वाला है। सारा देश दिल्ली ही नहीं होता जहां एक केस में फांसी हो सकी। राजनीतिक सम्बन्ध वाले तो भगवान के भाई होते है। यूपी में ऐसे कई केस सुनने और पढ़ने को मिले है। ये योगी जी के ही राज की बात हैं। जहां अपराध की शिकार लड़कियों को अपने घर वाले भी खोने पड़े और उन्हें खुद जेल भी जाना पड़ा। यह उत्तर प्रदेश की न्याय व्यवस्था योगी जी के राज में ही है। जिस तरह से निर्भया की ह्त्या की गई थी उतने ही वीभत्स तरीके से इस बच्ची की हत्या हुई है। यूपी की पोलिस ने ‘उचित’ एक्शन लेने में 11 दिन लग गए। आज लड़कीं जान से चली गयीं। अब रही मुकदमे की बात लड़कीं के घर वाले भटकते रहेंगे अदालतों में। कानून का पालन जैसे होता आया है वैसे ही चलता रहेगा। इस देश मे अब कानून का राज है ही नही। जब प्रदेश का मुख्यमंत्री सरेआम मंच से ठोकने जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं। वैसे भी यूपी में कानून के राज की कल्पना करना भूतों से पूत मांगने वाली बात है। बहुत बहाने है। वहाँ न्याय की बात एक भद्दा मजाक है।

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