कथा शास्त्र का ज्ञान बांचने वाली बीजेपी काम शास्त्र में ज़्यादा लिप्त है

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-हिना ताज।।

राजस्थान बीजेपी के दिन बेहद ही खराब चल रहे हैं तभी तो आए दिन पार्टी के किसी ना किसी नेता या कार्यकर्ता के काले कारनामों और खींचतान के चलते प्रदेश बीजेपी सुर्खियों में बनी रहती है। एक तरफ तो पार्टी में अपनी अंदरूनी खाईयों को पाटने की कोशिशें भी विफल साबित हो रही हैं तो दूसरी तरफ बीजेपी के नेताओं की बढ़ती दबंगई पर अंकुश लगाने में भी पार्टी असफल साबित हुई है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के बल पर पार्टी के कई नेता कार्यकर्ता अपने रसूख को भुनाते हुए ऐसे अपराध करने से भी नहीं डर रहे जिनके लिये की मोदी जी ने बड़ा सख़्त ऐलान कर रखा है। मोदी जी जितना अपनी पार्टी को बेदाग रखने की वकालत करते हैं उतना ही उनकी पार्टी के नेता और मंत्री बेलगाम अपराधों में लिप्त पाय जाते हैं। अब राजस्थान की बीजेपी में भी इसी तरह एक केस से सनसनी फैल गई है। जो कांग्रेस को कटघरे में खड़ा कर सवाल जवाब करते हैं आज खुद कटघरे में खड़े हैं । महिला अपराधों पर राज्य सरकार पर हमलावर हो रही बीजेपी की महिला विंग से ही अब ऐसा मामला सामने आया है जो इस पार्टी की दोगली मानसिकता पर सवाल उठाता है। बीजेपी के महिला मोर्चा की एक जिलाध्यक्ष सुनीता वर्मा उर्फ संपत्ति बाई ने ऐसा कारनामा किया है जिससे प्रदेश बीजेपी के मुंह पर कालिख पुत गई है । दरअसल मामला सवाईमाधोपुर से उठा है जहां बीजेपी की महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष सुनीता वर्मा सहित दो अन्य लोगों पर नाबालिग से दुष्कर्म कराने का आरोप लगाया गया है।

क्या है पूरा मामला

बीजेपी महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष सुनीता वर्मा पर आरोप है कि उसने अपनी साथी पूजा के साथ मिलकर एक नाबालिग को बहला-फुसलाकर और पैसों का लालच देकर दुष्कर्म जैसे संगीन जुर्म में धकेलने का काम किया है। बीजेपी महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष ने नाबालिग को लालच दिया कि वो उसकी जिंदगी बना देगी और इसी तरह के लालच देकर नाबालिग को कई लोगों के पास भेजा गया, जहां नाबालिग के साथ दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध को अंजाम दिया गया । इतना ही नहीं नाबालिग ने जब विरोध किया तो उसके अश्लील फ़ोटो सोशल मीडिया पर डालकर बदनाम करने और उसकी जिंदगी खराब करने की धमकी दी गई। पीड़िता के परिजनों का तो यहां तक आरोप है कि बीजेपी महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष ने बच्ची पर दबाव बनाकर उसके घर से पैसे भी चोरी करवाए। अब महिला मोर्चा की यह जिलाध्यक्ष फिलहाल गिरफ्तार कर ली गई है लेकिन सवाल यह उठता है कि स्वयं को वर्क फ्रंट पर सुपर एक्टिव बताने वाली बीजेपी अपने इतने महत्वपूर्ण पदों पर ऐसी धुमिल छवि और आपराधिक प्रवर्ती के लोगों को कैसे नियुक्ती दे देती है ? विपक्ष और कई बड़ी सर्वे कंपनियों में जिस ग्रेड पर नरेंद्र मोदी सरकार के माइक्रो मैनेजमेंट को आंका जाता है उसे देखकर तो यही लगता है कि इस तरह के लोगों को पार्टी के गरिमापूर्ण पदों पर नियुक्त करने के पीछे रिश्वतखोरी या प्रदेश बीजेपी के आलानेतृत्व पर काबिज़ नेताओं का निजी स्वार्थ काम कर रहा है। क्योंकी प्रदेश बीजेपी में यह पहला मामला नहीं है जब महिला अपराधों को लेकर पार्टी पर सवाल खड़े किये गये हैं।

बीजेपी में हैं बड़े बड़े कामाचारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही अपनी सरकार का यह कहते हुए बचाव करते हों कि उनकी सरकार में दागदार छवि के लोगों का स्थान नहीं है पर उनकी सरकार से ही ऐसे कई नामवर व्यभिचारी निकले हैं जिन्होंने अपनी लंपटता के चलते न सिर्फ महिलाओं से अभद्रता की बल्कि उनके परिवारों तक को धरती पर नर्क भुगतने को मजबूर कर दिया । उत्तर प्रदेश के बांगरमऊ से बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर हो या पूर्व केंद्रीय मंत्री चिन्मयानंद और निहालचंद मेघवाल जैसे हाई प्रोफाइल केस, यह बीजेपी द्वारा देश पर लगाया गया कलंक साबित हुए हैं। बीजेपी के ऐसे बदनुमा दोगों की फेहरिस्त बहुत लंबी है। सवाईमाधोपुर की महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष के अलावा भी बीजेपी के कई स्थानीय नेता ऐसे हैं जिन्होंने महिला अत्याचार की सभी सीमाएं तोड़ी हैं। अप्रेल 2019 में हनुमानगढ़ के बीजेपी के युवा मोर्चा के पूर्व मंडल अध्यक्ष विकास नागपाल पर शादी का झांसा देकर एक महिला के ना सिर्फ देह शोषण का दोष सिद्ध हुआ था बल्कि पीड़िता की बेटी से भी छेड़खानी का आरोप लगाया गया था । वहीं सितंबर 2018 में भी जालोर के आहोर में भाजपा विधि प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष संतोष भारती पर माधोपुरा निवासी एक महिला से बलात्कार का मामला दर्ज हुआ था ।

बेहद खराब है बीजेपी का ट्रेक रिकॉर्ड

आपराधिक मानसिकता और पृष्ठभूमि वाले लोगों को संरक्षण देने के मामले में भी भारतीय जनता पार्टी का रिकॉर्ड खासा खराब रहा है। जनता को आंकड़ों से जागरूक करने वाली एजेंसी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स यानी एडीआर तथा नेशनल इलेक्शन वॉच के एक सर्वे के अनुसार पिछले पांच वर्षों में बीजेपी द्वारा 66 उम्मीदवारों को विधानसभा में टिकिट दिये गये जो महिला अत्याचार से संबंधित मामलों में लिप्त थे । एडीआर के वर्ष 2019 के सर्वे के अनुसार बीजेपी के 21 सांसदों और विधायकों पर महिलाओं के प्रति अत्याचार के मामले दर्ज हैं। इनमें 10 मामले महिला अत्याचारों से जुड़े है जबकि 11 मामले सीधे दुष्कर्म के हैं। अगर सिर्फ अपराधिक रिकॉर्ड वाले बीजेपी के राज्यसभा सांसदों पर नज़र डालें तो इनमें 8 सांसदों के ऊपर क्रिमिनल केस हैं जिनमें 5 मामले गंभीर अपराधों से जुड़े हैं। इन सांसदों में राजस्थान के किरोणी लाल मीणा का भी नाम है जिन पर आईपीसी की 5 धाराओं में कुल 7 केस दर्ज हैं। तो लोकसभा में भी बीजेपी के 18 सांसदों का आपराधिक रिकॉर्ड है जबकि इनमें 1 मामला गंभीर प्रवर्ति के अपराध से जुड़ा है।

नेशनल इलेक्शन वॉच और ऐडीआर की इस रिपोर्ट पर देशभर में उस समय खूब हो हल्ला मचा था । इससे पहले भी बीजेपी के कई नेताओं के नाम रेपकांड में सामने आ चुके हैं। इन नेताओं में हरियाणा से बीजेपी विधायक उमेश अग्रवाल, उत्तराखंड के बीजेपी नेता हरक सिंह रावत, उत्तर प्रदेश के बीजेपी विधायक कुशाग्र सागर, महाराष्ट्र बीजेपी नेता रवींद्र बावंथाडे और मधु चव्हाण, गुजरात बीजेपी उपाध्यक्ष रहे जयंती भानुशाली जैसे नाम शामिल हैं। वहीं #MeToo कैंपेन में धरे गये बीजेपी के पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर पर तो देश की 20 महिला पत्रकारों ने यौन शोषण का आरोप लगाया था, तब अकबर ने निजी तौर पर आरोपों के खिलाफ लड़ने की बात कह कर पद से इस्तीफा दिया था लेकिन फिलहाल वह किसी केस को लड़ते नज़र नहीं आ रहे हैं। कुल मिलाकर बीजेपी एक ऐसा दल है जिसने सत्ता में बने रहने के लिये देश की कमान दबंगों और दुष्कर्मियों को देने में ज़रा भी कोताही नहीं की। इसलिये बीजेपी के नेता काम से ज़्यादा कामासूत्र में लिप्त नज़र आए और देश को अपने ही द्वारा दिये विकास तथा शुचिता के नारों को ही बदल कर रख दिया । बीजेपी की अनदेखी की वजह से मेक इन इंडिया – रेप इन इंडिया बन गया । बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ की जगह लोग बेटी छिपाओ, बलात्कारियों से बचाओ के नारे लगाने लगे। अब सवाईमाधोपुर की घटना ने बीजेपी के ‘अबकी बार’ स्लोगन को अब की बार- नारी ने ही नारी की इज़्ज़त की तार तार में बदल दिया है। सोचनीय विषय यह है कि क्या बीजेपी के हाथों में देश सुरक्षित है ?

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