अर्नब गोस्वामी की चाटूकारिता जो दर्शकों को लगती है फाड़ूकारिता..

Desk

टीवी दर्शकों को चाटूकारिता भी पसंद है और फाड़ूकारिता भी.. इसलिए ‘रिपब्लिक भारत’ और ‘भारत समाचार’ चर्चा में..

-नवेद शिकोह।।

मीडिया की मंडी में विष और अमृत दोनों की क़द्र है। आज की पत्रकारिता विष भी है और अमृत भी। शिद्दत और जूनून वाली ख़बरें नशे की तरह अपनी तरफ खीचती हैं। कुछ ख़बरें आंखें खोलती हैं तो कुछ आंखे बंद कर देती हैं।

लोकप्रिय सरकार का एजेंडा चलाने और पत्रकारिता को धूमिल करने की शिद्दत वाली पत्रकारिता आजकल रेस में आगे है।
आगे निकलने का दूसरा इसके विपरीत रास्ता भी है। जनसरोकार वाली पत्रकारिता। आम इंसान की तकलीफों को बयां करने वाला जर्नलिज्म। निष्पक्ष, निर्भीक और विपक्षी तेवरों में सवाल उठाकर पत्रकारिता का धर्म निभाने का साहस।

टीवी दर्शक के पास कई ऑप्शन हैं। उसकी चाहत के भी कई कलर मौजूद हैं। जो उसकी अथाह प्रेम या नफरत की ख्वाहिशें शिद्दत और जुनून के साथ पूरी करे उसे वो नंबर वन बना देता है।

मोदी सरकार से अथाह प्यार और भाजपा विरोधियों से नफरत की पराकाष्ठा अर्नब की पत्रकारिता में दिखी। डिबेट में चीखना-चिल्लाना और ताल ठोक कर शिवसेना को चुनौती देना, ड्रामेबाजी और इन ऊल जुलूल हरकतों की अति ने सारी हदें पार कर दीं। दुनिया में भारतीय पत्रकारिता की छवि धूमिल की। किंतु यही सब भारतीय टीवी दर्शकों ने बेहद पसंद किया। रिपब्लिक भारत नंबर वन न्यूज़ चैनल बन गया। क्योंकि नून रोटी खाकर भी सरकार बनाने का संकल्प लेने वाली भारत की अधिकांश जनता सरकार के पैरोकारी की पराकाष्ठा करने वाले चैनल को पसंद करती है।
अर्नब गोस्वामी ने देश के मिजाज़ की नफ्ज़ पकड़ी। सरकार समर्थकों का जन सैलाब सरकार के समर्थन वाले न्यूज कंटेंट को स्वीकार करता हैं। व्यवसायिक मीडिया की तो यही सोच है कि पत्रकारिता का मिशन, गरिमा या सिद्धांत भाड़ मे जायें, जहां टीआरपी और आर्थिक लाभ होगा उस रास्ते ही चलना है। अर्नब ने ये रास्ता चुना और चार दिन के रिपब्लिक भारत ने दशकों से नंबर वन की शहनशाहत पर क़ाबिज़ आजतक को पछाड़ दिया।

मर्जी है आपकी, आप अपने मीडिया के पेशे को जिम्मेदार पेशा मानें या स्वार्थ वश गैर जिम्मेदार बनके पत्रकारिता की गरिमा का बलात्कार कर दें। दवा बेचिये या दारू। जुनून के साथ कुछ भी बेचेंगे तो नंबर वन बन जायेंगे। हां ये ज़रूर है कि इतिहास याद रखेगा कि फलां ने दवा देकर बीमार लोगों की जान बचायी थी और अमुक ने दारू परोस कर लोगों को नशेड़ी बना दिया था।

हम बात कर रहे थे नंबर वन टीआरपी हासिल करने में कामयाब हुए रिपब्लिक भारत की। अब बात करेंगे उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बने चैनल भारत समाचार की।
उत्तर प्रदेश का न्यूज चैनल भारत समाचार’ इन दिनों चर्चा मे है। वजह ये है कि ये क्षेत्रीय चैनल जन सरोकारों वाली पत्रकारिता का दामन थाम कर परेशान प्रदेशवासियों की आवाज़ बना है। जातिवाद और भ्रष्टाचार के खिलाफ, गरीबों, किसानों, मजदूरों और बेरोजगारों के हक़ में ये चैनल दहाड़ रहा है। कोरोना के संकट पर फिक्रमंद है और बचाव व जागरूकता के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।
चीखने-चिल्लाने, जोकरी करने, नफरत फैलाने जैसी डिबेट के दौर में भारत समाचार के मालिक और लोकप्रिय पत्रकार बृजेश मिश्रा की डिबेट किसी पार्टी विशेष का एजेंडा नहीं बल्कि आवाम की नुमांदगी कर रही है।
शायद इस ताकत ने एक मामूली क्षेत्रीय चैनल को लोकप्रिय ब्रॉड बना दिया है।
सच्ची और निर्भीक पत्रकारिता अभी बची है.. जैसे कैप्शन के साथ बृजेश मिश्रा की डिबेट के वीडियो सोशल मीडिया पर हर रोज़ वायरल हो रहे हैं। भारत समाचार के स्टेट हैड वीरेन्द्र सिंह की बेबाक टिप्पणी रेत में पानी की तरह आजकल की कमजोर टीवी पत्रकारिता को ताकत दे रही है। ठाकुर-पंडित की सियासी तकरार वाले यूपी में इन दिनों बृजेश मिश्र और वीरेंद्र सिंह जोड़ी की निर्भीक पत्रकारिता बड़े-बड़ों के छक्के छुड़ाये है।
भारत समाचार को ख़ास पहचान दिलवाने में चैनल के पब्लिक ओपीनियन शो ” कटिंग चाय ” को भी श्रेय जाता है।

लब्बोलुआब ये है कि रिपब्लिक भारत और भारत समाचार का यश इस बात का सुबूत है कि भारत के दर्शक चाटूकारिता भी पसंद करते हैं और फाड़ूकारिता भी।

Facebook Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

किसी भी किस्म की भीड़ की नौबत तुरंत टाले सरकार…

-सुनील कुमार केन्द्र सरकार के निर्देश पर देश भर में जगह-जगह विश्वविद्यालय अपने इम्तिहान की तैयारी कर रहे हैं। उसका एक नमूना कल छत्तीसगढ़ में देखने मिला जब यहां कॉलेजों में छात्र-छात्राओं को उत्तरपुस्तिकाएं लेने के लिए बुलाया गया, और वहां पर उनकी ऐसी भीड़ टूट पड़ी, उनकी ऐसी भयानक […]
Facebook
%d bloggers like this: