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नहीं रहे स्वामी अग्निवेश..

नहीं रहे स्वामी अग्निवेश..

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-पंकज चतुर्वेदी।।

सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश का निधन हो गया है। वह 81 वर्ष के थे और पिछले कई दिनों से गंभीर रूप से बीमार चल रहे थे। लिवर सिरोसिस से पीड़ित अग्निवेश के कई प्रमुख अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। वह दिल्ली के वसंत कुंज स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बायिलरी सांइसेज (Institute of Liver and Biliary Sciences) में इलाज करवा रहे थे।

स्वामी अग्निवेश को आज शुक्रवार को शाम 6 बजे दिल का दौरा पड़ा । उन्हें बचाने की भरपूर कोशिश की गई, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका। उन्होंने शाम 6.30 बजे अंतिम सांस ली।
उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए नई दिल्ली के 7 जंतर-मंतर रोड कार्यालय पर शनिवार सुबह 11 से 2 बजे तक रखा जाएगा। उनका अंतिम संस्कार वैदिक रीति से अग्निलोक आश्रम, बहलपा जिला गुरुग्राम में शाम चार बजे किया जाएगा।
स्वामी अग्निवेश हमेशा चर्चा में रहने वाले और समाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखने वालों में से थे। अग्निवेश ने 1970 में आर्य सभा नाम की एक राजनीति पार्टी बनाई थी। 1977 में वह हरियाणा विधासनभा में विधायक चुने गए और हरियाणा सरकार में शिक्षा मंत्री भी रहे थे। 1981 में उन्होंने बंधुआ मुक्ति मोर्चा नाम के संगठन की स्थापनी की थी।

वहीं, स्वामी अग्निवेश ने 2011 में अन्ना हजारे की अगुवाई वाले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में भी हिस्सा लिया था। स्वामी अग्निवेश ने रियलिटी शो बिग बॉस में भी हिस्सा लिया था। वह 8 से 11 नवंबर के दौरान तीन दिन के लिए बिग बॉस के घर में भी रहे थे।
पिछले साल झारखंड में नारंगी आतंकियों ने उन पर जानलेवा हमला किया था जिसमें लहूलुहान हो गए थे ऐसा कहा जाता है कि उसकी मारपीट के बाद उनके लीवर में दर्द शुरू हुआ था जो आज उनकी मौत का कारण बना।
समाजसेवा कट्टरपंथ और राजनीतिक सुधार कि एक बेजोड़ बेमिसाल और उन्मुख आवाज अवसान देश के लिए बहुत बड़ी हानि है।

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admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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