रिया को गिरफ्तार करने वाली एनसीबी को जानें..

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-संजय कुमार सिंह||

नशा खरीदने और दूसरे आरोपों में रिया चिक्रवर्ती को गिरफ्तार करने वाले नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के डीजी राकेश अस्थाना सरकार के खास अधिकारियों में हैं। इनके लिए सीबीआई डायरेक्टर बदलने की आधी रात की कार्रवाई की गई थी। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत आता है और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) भी गृह मंत्रालय के तहत है। राकेश अस्थाना 18 अगस्त 2020 से बीएसएफ के भी डीजी हैं। यानी आधी रात की कार्रवाई के बाद गिरफ्तारी से बचे राकेश अस्थाना गृहमंत्रालय के तहत दो विभागों के डीजी हैं। राकेश अस्थाना एक अगस्त 2019 को एनसीबी के डीजी बनाए गए थे। तब वे ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन के डीजी पहले से थे। और यह चार्ज अतिरिक्त मिला था। उनपर जो आरोप हैं (थे) वे अपनी जगह हैं क्योंकि उन्हें क्लीन चिट मिल चुकी है।अब एनसीबी से संबंधित ये खबरें पढ़िए, पुरानी हैं पर बताती हैं कि एक एजेंसी के रूप में इसका इतिहास कितना दागदार है फिर भी एडिशनल चार्ज से काम चलाया जा रहा है और काम भी बिल्कुल भरोसे के अधिकारी के जरिए। ऐसा क्यों और कब होता है बताने की जरूरत नहीं है।1.सीबीआई ने 31 मई 2016 को हिमाचल प्रदेश के पोन्टा साहिब में थ्री बी हेल्थकेयर के परिसार में छापा मारा था। तलाशी के दौरान बरामदगी हुई थी। इस मामले को निपटाने के लिए 12 लाख रुपए बतौर रिश्वत दिए जाने के आरोप हैं। यह राशि कथित तौर पर इंस्पेक्टर राज कुमार को दी गई थी। सीबीआई ने 2019 में इस मामले में दो लोगों के खिलाफ कार्रवाई की, मामला दर्ज कराया। पूरे तीन साल छापे और बरामदी पर क्या कार्रवाई हुई राम जानें। ना मीडिया बताएगा ना सरकार।

deccanherald.com, 28 मई 20192.सेंट्रल नारकोटिक्स ब्यूरो के एडिशनल कमिश्नर डॉ. श्रीराम मीना को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। वे कोटा में तैनात थे और चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में लंबरदार के रूप में नियुक्ति के लिए एक अफीम उत्पादक से ऱिश्वत लेने का आरोप है। tribuneindia.com, 27 जनवरी 20193.रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोप में सीबीआई ने एनसीबी के खुफिया अधिकारी को गिरफ्तार किया। सीबीआई ने अधिकारी के बदले रिश्वत लेने के आरोप में एक वकील को भी गिरफ्तार किया। यह कोलकाता का मामला है और 04.09.18 की सीबीआई की विज्ञप्ति में ही अधिकारी का नाम नहीं लिखा गया था। business-standard.com, 5 सितंबर 20184.सीबीआई ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के दो जांच अधिकारियों और एक कांस्टेबल को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया। भुवनेश्वर की इस खबर के अनुसार जांच अधिकारी ज्ञान प्रकाश ने एनडीपीएस कानून के तहत एक मामले में नाम आए व्यक्ति को बचाने के लिए या उसका नाम हटाने के लिए पैसे मांगे थे और लेते हुए पकड़े गए। newindianexpress.com, 11 अप्रैल 2018नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के खास आईपीएस अधिकारी एक नशीले पदार्थों पर नियंत्रण करने वाली एजेंसी और दूसरी सीमा पर चौकसी करने वाली। और उससे पहले वे ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन के भी डीजी। पता नहीं अब हैं कि नहीं। हों भी तो कोई क्या कर सकता है। हालांकि नशे की तस्करी सीमा पार से होती हो तो …. बिजनेस या कारोबार के लिए ईज ऑफ बिजनेस के तमाम शोर के बीच भी ऐसा सिंगल विन्डो नहीं है जैसा नशे की तस्करी के लिए अघोषित रूप से बना या बनाया गया दिख रहा है। नशे की तस्करी में इसके अलावा स्थानीय लोगों की भूमिका होगी।

नारकोटिक्स कमिश्नर का पद 40 दिनों से खाली है क्योंकि पिछले अधिकारी का सिर्फ साढ़े सा महीने के कार्यकाल के बाद चेन्नई तबादला कर दिया गया था। जाहिर है वहां कोई और जरूरी काम होगा पर नीमच और यहां अफीम की खेती का मामला राम भरोसे पड़ा है।रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी पूछताछ में कथित स्वीकारोक्तियों और गवाहियों के आधार पर की गई है। लेकिन नशीले पदार्थों की बरामदगी (भारी मात्रा में) के कई मामले अनसुलझे हैं। और तो और बरामद माल सरकारी गोदाम से गायब होने की भी खबर है।इस तरह, एक तरफ तो लोग नशा करते हुए मर जा रहे हैं। मरने के बाद टेलीविजन चैनलों पर चली जांच में पता चलता है कि मरने वाले को नशा वही देती थी जिसपर पहले उसके पैसे उड़ाने का आरोप था। आरोपों का क्या है, आरोप तो यह भी था कि वह बिना शादी के उसके साथ रह रही थी और उसके पैसे उड़ाए जा रही थी।बाद में पता चला कि मरने वाला नशेड़ी-गंजेड़ी था और उसके साथ रह रही उसकी प्रेमिका या सहेली उसे नशा मुहैया कराती थी या उसके लिए खरीदती थी। उसका भाई भी इस काम में लगा था। सब सही होगा भी तो मुद्दा यह रहेगा कि जब नशा हो रहा था, प्रतिबंधित चीजें खरीदी बेची और पहुंचाई जा रही थीं। सेवन किया जा रहा था तब किसी को पता क्यों नहीं चला। और अगर चला तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उम्मीद है नहीं ही चला होगा। क्या ऐसी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए कि नशा उपलब्ध ही नहीं हो और हो तो उपलब्धता रोकने वाले के खिलाफ कार्रवाई हो? अगर नशे का अवैध सौदा समय रहते रोक दिया जाता या नशा खरीदना बेचना इतना आसान नहीं होता तो शायद किसी को इसकी लत नहीं लगती, शायद एक उभरती प्रतिभा का ऐसा अंत नहीं होता। नशा एक गंभीर समस्या है। अभिभावकों के लिए भी और अभिभावकों की नजर से देखें तो लड़के इसीलिए करते कि आसानी से उपलब्ध है। अगर अपराध देखने रोकने वाला पद ही खाली रहेगा भारी बेरोजगारी के बावजूद एडिशनल चार्ज दिए जाएंगे वह भी विभाग के सर्वोच्च स्तर पर तो अपराध होने और लोगों की जान जाने के बाद ही कार्रवाई होगी। देश में मीडिया के लिए यह मुद्दा नहीं है। फिर कोई चुनावी मुद्दा होगा तो मीडिया चीखना शुरू करेगा। जहां तक सीबीआई का मामला है, रिया चक्रवर्ती से सुशांत सिंह की मौत के मामले में पूछताछ चल रही थी। रोज सबकुछ लीक हो रहा था टीवी पर बताया जा रहा था पर जिसे गिरफ्तार किया गया उसका नाम विज्ञप्ति में नहीं होता है। यह मौके-मौके की बात है।

About Post Author

Sanjaya Kumar Singh

छपरा के संजय कुमार सिंह जमशेदपुर होते हुए एनसीआर में रहते हैं। 1987 से 2002 तक जनसत्ता में रहे और अब भिन्न भाषाओं में अनुवाद करने वाली फर्म, अनुवाद कम्युनिकेशन (www.anuvaadcommunication.com) के संस्थापक हैं। संजय की दो किताबें हैं, ‘पत्रकारिता : जो मैंने देखा जाना समझा’ और ’जीएसटी – 100 झंझट’।
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