कोरोना से बचाव की रणनीति..

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देश में गुरुवार को कोरोना के नए मामलों ने रिकॉर्ड तोड़ दिया। बुधवार से गुरुवार के बीच 24 घंटों में 75,760 नए मरीज सामने आए और 1023 लोगों की मौत हो गई। जबकि देश में अब कुल संक्रमितों की संख्या 33 लाख के पार हो चुकी है और इनमें से 60 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना वायरस आम आदमी का हाल बेहाल कर रहा है, लेकिन आम हिंदुस्तानी तो मुश्किलें पड़ी इतनी कि आसां हो गई, वाले अंदाज में जीने की कोशिश करने लगा है। लॉकडाउन से लेकर अनलॉक के बीच लाखों जिंदगियों पर संकट आ चुका है और यह संकट कब तक टलेगा कुछ कहना मुश्किल है। हम ये सोच कर खुद को झूठा दिलासा दे सकते हैं कि इस परेशानी में अकेले हम ही नहीं हैं, दुनिया के और बहुत सारे देश भी इसी कठिन दौर से गुजर रहे हैं।

लेकिन अब बाकी देशों में कहीं कोरोना संक्रमण के मामले थमने शुरु हो गए हैं, कहीं सरकार से मिले आर्थिक पैकेज की वजह से लोगों की परेशानी थोड़ी कम हुई है, तो कहीं वैक्सीन को लेकर नई उम्मीदें बंध रही हैं। रूस के गमलेया इंस्टीट्यूट ने ‘स्पूतनिक-वी’ नाम के वैक्सीन को विकसित किया। जिसका पंजीकरण इसी महीने हुआ है और अब अगले महीने देश के कई हिस्सों में व्यापक टीकाकरण होगा। अमेरिका में मॉडर्ना कंपनी वैक्सीन को विकसित करने में लगी है। चीन की फार्मा कंपनी सिनोफार्म ने हाल ही में घोषणा की है कि इस साल के अंत तक वो कोरोना की वैक्सीन बना लेगी। रूस ने ‘एपीवैक कोरोना’  नाम से एक और वैक्सीन तैयार करने का भी दावा किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस नई वैक्सीन का ट्रायल सितंबर में पूरा हो जाएगा और अक्तूबर तक इसे पंजीकृत कर लिया जाएगा। वहीं, नवंबर से इस वैक्सीन का उत्पादन भी शुरू हो जाएगा।

भारत में भी कोरोना की तीन वैक्सीन पर तेजी से काम चल रहा है। पहली वैक्सीन पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट की है, जो ऑक्सफोर्ड के साथ मिलकर बनायी गई है। इसे कोविशील्ड के नाम से लॉन्च किया जाएगा। दूसरी वैक्सीन,  भारत बायोटेक की है, जिसका नाम कोवैक्सिन है। तीसरी वैक्सीन जाइडस कैडिला की है। इन तीनों का परीक्षण अभी अलग-अलग स्तरों पर चल रहा है और यही उम्मीद की जाना चाहिए कि ये जल्द इस्तेमाल के लिए तैयार होंगी। लेकिन क्या इनकी उपलब्धता आम जनता के लिए भी सरलता से हो पाएगी, यह बड़ा सवाल है।

सरकार की ओर से वैक्सीन विकसित करने के बारे में तो बयान आते हैं, लेकिन इन्हें देश की 130 करोड़ की आबादी तक कैसे पहुंचाया जाएगा, इस बारे में अब तक किसी रोडमैप की बात सरकार की ओर से सुनने नहीं मिली है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इसी सवाल के साथ एक ट्वीट किया है कि ”कोविड के टीके तक पहुंच की एक उचित और समग्र रणनीति अब तक बन जानी चाहिए थी। लेकिन अब तक इसके कोई संकेत नहीं मिले हैं। भारत सरकार की कोई तैयारी नहीं होना खतरनाक है।” 

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले राहुल गांधी ने कहा था कि सरकार को कोरोना वायरस के टीके के इस्तेमाल, इसके वितरण की व्यवस्था पर अभी से काम करना चाहिए। हो सकता है सरकार के प्रवक्ता, सोशल मीडिया के सहारे राजनीति चलाने वाले पैरोकार इस बात पर भी राहुल गांधी को लेकर कोई पैरोडी बना लें, किसी मीम में उनका मजाक उड़ा लें और फिर एक गंभीर चेतावनी को हवा में उड़ाने में कामयाब हो जाएं। मोदी सरकार में अब तक यही होता आया है। फरवरी में जब राहुल गांधी ने कोरोना के खतरे और आर्थिक दशा पर उसके असर को लेकर सावधान होने की चेतावनी दी थी, तब भी सरकार ने उसे अनसुना किया था। इसके बाद उन्होंने लॉकडाउन को पॉज बटन बताते हुए रणनीति बनाने की अपील सरकार से की थी। उन्होंने सुझाव दिया था कि टेस्टिंग बढ़ाइए, ताकि इसके संक्रमण का ठीक-ठीक पता लगे और उसे फैलने से रोका जा सके। मगर सरकार ने तब भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।

राहुल गांधी ने गरीबों तक सीधे रकम पहुंचाने की बात कही, ताकि आर्थिक मुसीबत में उन्हें थोड़ी राहत मिले। सरकार ने फिर उनके सुझाव को नजरंदाज किया। ऐसा लगता है मानो भाजपा राहुल गांधी के किसी सुझाव को जानबूझकर सुनना-समझना नहीं चाहती। क्योंकि इससे राहुल गांधी की छवि को मजाक का विषय बनाने की उसकी रणनीति नाकाम हो जाएगी। इस तरह भाजपा अपना राजनैतिक फायदा भले कर रही हो, लेकिन देश को सही सुझावों से वंचित कर नुकसान ही कर रही है। राहुल गांधी कोई भविष्यवेत्ता नहीं हैं, लेकिन वे स्थितियों का आकलन कर, विशेषज्ञों से बातचीत कर जिन परिणामों की आशंकाएं जतला रहे थे, वे सही साबित हो रही हैं। चाहे वो कोरोना के बढ़ते मामले हों या फिर डगमगाती अर्थव्यवस्था। अब उन्होंने एक बार फिर टीके को लेकर रणनीति बनाने की बात सरकार से कही है। इस पर भी सरकार गौर नहीं करेगी तो आम आदमी के लिए वाकई मुसीबत और बड़ी हो जाएगी।

हिंदुस्तान में लोकतंत्र होने के बावजूद सुविधाओं पर संपन्न वर्ग पहले हक जमा लेता है, शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक हमने यही देखा है। अब अगर कोरोना की वैक्सीन आ गई और उसका लाभ भी अगर संपन्न तबके ने पहले उठा लिया, तो देश के लिए बीमारी का खतरा बरकरार रहेगा। क्योंकि कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए हरेक को इससे बचना होगा। देश को पोलियोमुक्त करने के लिए ही लंबे अभियान और जनजागरुकता की जरूरत हुई, तब जाकर इसमें सफलता मिली। वहां तो केवल पांच साल तक के बच्चों को इसकी खुराक देनी थी। लेकिन कोरोना से सारी आबादी को सुरक्षित रखना होगा। इसके लिए यह जरूरी है कि जब भी वैक्सीन आए तो गरीबी-अमीरी के भेद से परे सब तक इसकी पहुंच हो। यह काम सरकार की त्रुटिरहित रणनीति से ही संभव है।

(देेशबंधु)

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