Home खेल मंत्रिमण्डल को लेकर विधायकों का गहलोत पर भारी दबाव..

मंत्रिमण्डल को लेकर विधायकों का गहलोत पर भारी दबाव..

जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा.. मंत्रिमण्डल को लेकर विधायकों का मुख्यमंत्री गहलोत पर अब पड़ने लगा दबाव..
सचिन समर्थकों को प्राथमिकता देने पर अपनों की करनी पड़ेगी उपेक्षा..

-ओम भाटिया।।
पिछले दिनों प्रदेश में सरकार पर गहराये संकट के दौरान अपने घर बार छोड़ एक माह तक खुफिया निगरानी में बाड़ेबंदी के भीतर बंद रहने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थक रहे प्रत्येक विधायक की जुबान इन दिनों 1963 में बनी फिल्म ताजमहल का गीत ‘जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा’* गुनगुनाती नजर आ रही है तथा विधायकों के होठों से निकलने वाले इस गीत के बोलो ने स्वयं मुख्यमंत्री को परेशान-सा कर रखा है। कांग्रेस से बगावत कर लगभग पार्टी से बाहर का रास्ता पकड़ने वाले सचिन व उनके समर्थकों की ऐन वक्त पर वापसी से गहलोत समर्थकों के दिन में देखे गये इन सपनों पर फिलहाल अंधियारी अमावस्या की काली पट्टी छाती नजर आने लगी है।

मुख्यमंत्री गहलोत के खिलाफ जब पार्टी के ही प्रदेशाध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने सूबे का मुख्यमंत्री बनने का मंसूबा पाल बगावत का झण्डा बुलन्द किया तो प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे। स्वयं मुख्यमंत्री गहलोत ने सचिन पायलट को भाजपाइयों के हाथों खेलने व भाजपा द्वारा विधायकों की खरीद-फरोख्त के लिये 35 करोड़ रुपये तक आॅफर करने का आरोप लगाया था, अब यही रकम की गिनती मुख्यमंत्री गहलोत के लिये बड़ी परेशानी का कारण बन चुकी है।

आधे से ज्यादा विधायकों को मंत्री पद मिलने का था भरोसा

विरोधी खेमे द्वारा 35 करोड़ रुपये का दिये जाने वाला प्रलोभन छोड़ 100 से ज्यादा विधायक मुख्यमंत्री गहलोत के साथ खड़े रहे थे, जिसमें कुछ मंत्रियों ने अपने विभाग बदलने की शर्त पर 35 करोड़ को लात मारने की बात कह समर्थन दिया था तो कुछ को उपमुख्यमंत्री बनने के सपने तो दिन रात आने लग गये थे। ऐसा नहीं है कि सब विधायकों ने दबाव बनाया ही था, इनमें कुछ मंत्री विधायक गहलोत के साथ बिना शर्त भी थे तो कुछ ने जो भी मिले प्रसाद मान स्वीकारने का आश्वासन दे रखा था, लेकिन ऐसे विधायकों की संख्या बड़ी थी, जिन्होंने मंत्री पद की चाहत में अपने को मुख्यमंत्री गहलोत के चरणों में समर्पित-सा कर रख दिया था।जिस प्रकार अकबर बीरबल के समय एक गरीब ने ताजमहल की टिमटिमाती बल्ब की रोशनी से नदी के भीतर सर्दी से भरी पूरी रात काट ली थी बस कुछ उसी तर्ज पर कई विधायकों ने दिन-रात खाते-पीते उठते-बैठते, जागते-सोते नजर आने वाली मंत्री की कुर्सी के सहारे एक महीने की बाड़ेबन्दी भुगत ली, जहां जाते-जाते मोबाइल के बंद हुए नेट व खुफिया निगरानी तक को भी भुगत लिया, लेकिन सपना सच होता या नहीं, उससे पहले ही सचिन की घर वापसी ने विधायकों के अरमानों व महत्वकांक्षाओं पर पानी फेर कर रख दिया।
ताजमहल का गीत, विधायक और मुख्यमंत्री
1963 में बनी ताजमहल फिल्म का गीत जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा यों तो सुर और संगीत के चलते आज भी लोगों के बीच बहुत ही कर्णप्रिय गीत माना जाता है, लेकिन अब इस संगीत के बोल को एक माह की बाड़ेबंदी भोग चुके जब बसपा छोड़ कांग्रेस में आये विधायक, धमकियों, डर व भय की परवाह किये बिना गहलोत के समर्थन में खड़े रहे निर्दलीय विधायक और 35 करोड़ की थैली को लात मारने वाले कांग्रेस विधायकों के होठों पर गुनगुनाहट के रूप मेंआज छाया नजर आता है तो और किसी को तो मालूम नहीं, लेकिन मुख्यमंत्री गहलोत को इस गीत के बोल अपने समर्थक विधायकों के मुंह पर अब अच्छे लगते नजर नहीं आते हैं, लेकिन विधायक हैं जो मौका लगते ही ‘‘जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा’’ गीत को गाकर मुख्यमंत्री पर दबाव बनाने की पूरी कोशिश में जा लगते हैं।

सचिन समर्थक भारी पड़ सकते हैं गहलोत के वफादार समर्थकों पर
केन्द्रीय आलाकमान व उनके द्वारा गठित तीन सदस्य कमेटी जब भी मंत्रिमण्डल पुनर्गठन की गहलोत को हरी झण्डी देगी, तब बड़ी संख्या में सचिन समर्थकों को मंत्रीमण्डल में जगह दी जा सकती है, ऐसे में पिछले एक डेढ महीने से मंत्री बनने का दिन रात सपना देखने वाले गहलोत के वफादार समर्थकों को निराशा का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि कुछ युवा मंत्रियों को भविष्य का हवाला देकर उन्हें हटाने व अब तक नाराज़ सीनियर विधायकों या पूर्व मंत्रियों को मंत्रिमण्डल में स्थान दिये जाने की भी अटकले व चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में गरमाई हुई है, ऐसे में सचिन का दबाव यदि काम करता है तो महत्वपूर्ण विभाग पाने की आस पाले कुछ मंत्रियों को मंत्रिमण्डल से तो हाथ धोना पड़ सकता है तो वहीं मंत्री बनने का ख्वाब देख रहे कई विधायकों को अपने ख्वाब धूमिल होते भी नजर आने लगे हैं।

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