कमला हैरिस की उम्मीदवारी के मायने

कमला हैरिस की उम्मीदवारी के मायने

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भारतीय मां और जमैकाई पिता की संतान कमला हैरिस को अमेरिका के चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया है। बीते कई दिनों से ये कयास लग रहे थे कि डेमोक्रेट्स की ओर से राष्ट्रपति उम्मीदवार जो बाइडेन किसे अपना रनिंग मेट बनाएंगे।

बाइडन ने पहले ही वादा किया था कि उपराष्ट्रपति पद के लिए किसी महिला को ही उतारा जाएगा, इस बारे में उन्होंने साफ तौर पर किसी का नाम तो नहीं लिया था, लेकिन सुजैन राइस या कैरेन बास जैसी महिलाओं के नाम संभावित उम्मीदवारों में थे। फिर कुछ समय पहले एक सभा में बाइडेन के हाथ में पर्ची दिखी, जिसमें कमला हैरिस का नाम सबसे पहले था और तब से यही कयास लग रहे थे कि कमला ही उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार होंगी।

हैरिस अब उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी करने वालीं भारतीय और एशियाई मूल की पहली अमेरिकी हैं। वह डेमोक्रेट गेराल्डाइन फेरारो और रिपब्लिकन सारा पॉलिन के बाद एक प्रमुख पार्टी की पहली अफ्रीकी अमेरिकी और उस पद के लिए उम्मीदवारी करने वालीं तीसरी महिला भी हैं। ऑकलैंड में पली-बढ़ी कमला हैरिस ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से स्नातक और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है। हैरिस सैन फ्रांसिस्को में जिला अटॉर्नी के रूप में भी काम कर चुकी हैं। वह 2003 में सैन फ्रांसिस्को की जिला वकील बनी थीं। हैरिस ने साल 2017 में कैलिफोर्निया से संयुक्त राज्य सीनेटर के रूप में शपथ ली थीं। वो ऐसा करने वाली दूसरी अश्वेत महिला थीं।

उन्होंने होमलैंड सिक्योरिटी एंड गवर्नमेंट अफेयर्स कमेटी,  इंटेलिजेंस पर सेलेक्ट कमेटी,  ज्यूडिशियरी कमेटी और बजट कमेटी में भी काम किया। कमला की उम्मीदवारी पर जो बाइडेन का कहना है कि मुझे किसी ऐसे शख्स का साथ चाहिए जो स्मार्ट हो, कड़ी मेहनत करे और नेतृत्व के लिए तैयार रहे। कमला वो शख्सियत हैं। वैसे बात केवल इतनी ही नहीं है। अफ्रीकी-अमेरिकी मतदाताओं की बड़ी संख्या और कमला हैरिस की राष्ट्रव्यापी पहचान को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। कमला एक प्रवासी परिवार से हैं, और गोरी नहीं हैं। इसका उन प्रगतिशील मतदाताओं पर असर पड़ सकता है जो प्रवासन और नस्लीय न्याय के बारे में सोचते हैं। जो बाइडेन और कमला हैरिस शुरु से एक दूसरे के साथ नहीं थे।

बल्कि कमला तो उन्हें चुनौती दे रही थीं। बाइडेन को दूसरी चुनौती बर्नी सैंडर्स से मिल रही थी, लेकिन 29 फरवरी को माहौल बदला जब बाइडन को साउथ कैरोलीना में अफ्रीकी अमरीकियों के वोट की वजह से बड़ी जीत मिली। एक के बाद एक राज्यों में बाइडन को अफ्रीकी अमरीकी समुदाय का समर्थन मिलता गया और डेमोक्रेटिक धड़े को एकजुट रखने के लिए आखिरकार बर्नी को अपना नाम वापस लेना पड़ा। एक समुदाय से इतना समर्थन मिलने पर इस बात की चर्चा शुरू हो गई कि बाइडन और पार्टी को एक ऐसा नेता उप राष्ट्रपति पद के लिए चुनना चाहिए जो इसी समुदाय से हो। हाई प्रोफाइल अफ्रीकी अमरीकी नेता जेम्स क्लाईबर्न ने बाइडन से आग्रह किया कि वो एक अश्वेत महिला को उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए चुनें। इस बीच जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद अमेरिका में जगह-जगह प्रदर्शन हुए और प्रदर्शनकारियों ने और सुधारों और एक्शन की मांग की। 

अमेरिकी चुनाव में अफ्रीकी मूल के अमरीकियों की जीत-हार तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इनके करीब 13 फीसदी वोट हैं और कई राज्यों में उनके वोट काफी अहम हैं। इसलिए डेमोक्रेटिक पार्टी ने ट्रंप को चुनौती देने के लिए कमला और बाइडन की जोड़ी बनाई है। अगर यह जोड़ी 2020 चुनाव में जीत दर्ज करती है तो ऐसा कहा जा रहा है कि इससे कमला हैरिस के लिए साल 2024 के राष्ट्रपति चुनावों में दावेदारी का रास्ता मजबूत हो जाएगा। वैसे कमला हैरिस के बाइडेन के रनिंग मेट बनते ही उनके अभियान को 2.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर का चंदा मिला है। माना जा रहा है कि आगे भी हैरिस के कारण चंदा इक करने में बड़ी मदद मिलेगी। रिपब्लिकन पार्टी की ओर से कमला हैरिस की उम्मीदवारी की आलोचना की जा रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि कमला हैरिस बीते वक्त में जो बाइडेन की मुखर आलोचक रही हैं, लेकिन अब वे उनके समर्थन में बात कर रही हैं। लेकिन आज की राजनीति में समय और सुविधा के मुताबिक विचारों की परिवर्तनशीलता कोई अनोखी बात नहीं है।

कमला हैरिस खुद को प्रगतिशील कहती हैं, वे महिला अधिकारों, वर्णभेदी मानसिकता के खिलाफ और आर्थिक तौर पर वंचित समुदायों के अधिकारों की मुखर प्रवक्ता रही हैं। जैसे शुरु में वे बर्नी सैंडर्स के मेडिकेयर फार आल प्रस्ताव की समर्थक थीं, जिसमें निजी स्वास्थ्य बीमा के खात्मे की बात थी, लेकिन बाद में अपने प्रस्ताव में उन्होंने थोड़ा फेरबदल किया और निजी बीमा कंपनियों के लिए स्थान बनाया। कमला हैरिस इजरायल समर्थक हैं और मानती हैं कि इजरायल-फिलीस्तीन मुद्दे का समाधान तभी हो सकता है जब द्विराष्ट्र सिद्धांत अपनाते हुए इजरायल को ज्यूइश और लोकतांत्रिक देश बना रहने दिया जाए।

कुल मिलाकर कमला हैरिस की उपराष्ट्रपति उम्मीदवारी तय होते ही अब अमेरिकी चुनाव में रंगभेद, इस्लामोफोबिया, समलैंगिक विवाह और मृत्युदंड जैसे मुद्दों पर भी नई बहस छिड़ जाएगी। अमेरिकी चुनाव में उनका आगमन नई हलचलें लेकर आएगा। देखना होगा कि इसका कितना फायदा रिपब्लिकन पार्टी उठाती है और डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए क्या यह फैसला सत्ता वापसी के दरवाजे खोलेगा।

(देशबंधु)

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