ऐक्टू समेत अन्य ट्रेड यूनियन संगठनों ने किया दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन..

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ऐक्टू समेत देश की अन्य ट्रेड यूनियन संगठनों व फेडरेशनों ने आज देशभर में प्रदर्शन किया.

ज्ञात हो कि ये प्रदर्शन मोदी सरकार की मजदूर-विरोधी, जन-विरोधी और विभाजनकारी नीतियों के साथ-साथ, तेजी से किए जा रहे निजीकरण के खिलाफ आयोजित किए गए. केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों ने देश भर में 9 अगस्त को ‘देश बचाओ दिवस’ के रूप में मनाने का आह्वान किया था, जिसके तहत आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर ऐक्टू व अन्य ट्रेड यूनियनों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया. इसमें दिल्ली परिवहन निगम, केंद्र व राज्य सरकारों के स्वास्थ्य संस्थानों, जल बोर्ड, स्कीम वर्कर्स समेत निर्माण व असंगठित क्षेत्र के मजदूरों ने अच्छी भागीदारी की.

मोदी सरकार की मजदूर-विरोधी नीतियों से परेशान हैं देश की मेहनतकश जनता : देश को धर्म के नाम पर बांटकर अधिकार छीनने की है तैयारी

अपने पहले कार्यकाल से ही मोदी सरकार लगातार मजदूर-विरोधी कदम उठाए जा रही है – 44 महत्वपूर्ण क़ानूनों को खत्म करके 4 श्रम कोड लाने की प्रक्रिया तेज़ी से जारी है. कोरोना काल में ही काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 कर दिए गए हैं. विशाखापत्तनम से लेकर दिल्ली तक के कारखानों में मजदूरों के काम करने की स्थिति काफी भयावह है – हाल ही में हुए औद्योगिक दुर्घटनाओं में कई मजदूरों की जान तक चली गई और अनेक घायल हुए, पर फिर भी फैक्ट्री अधिनियम, औद्योगिक विवाद अधिनियम, ट्रेड यूनियन अधिनियम इत्यादि महत्वपूर्ण कानूनों को खत्म कर मजदूरों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है. मोदी सरकार ने ट्रेड यूनियन संगठनों के सुझावों को न सिर्फ दरकिनार किया है बल्कि ठीक इसके उलट कदम उठाए हैं.

प्रदर्शन में मौजूद लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि मोदी सरकार व संघ-भाजपा के लोग लगातार धर्म-सम्प्रदाय के नाम पर मेहनतकश जनता को बांटने की कोशिश कर रहे हैं. एक ओर नफरत-हिंसा फैलाकर शांति और सद्भाव को भंग किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ मजदूरों-किसानों के अधिकार छीने जा रहे हैं.

निजीकरण से होगा देश का भारी नुकसान : जनता के पैसों से बने संस्थानों को पूंजीपतियों को सौंपने की है तैयारी

भारतीय रेल, बीपीसीएल, भेल, ओएनजीसी जैसी बड़ी और देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण संस्थानों को मोदी सरकार नीलामी की ओर ले जा रही है. जिन संस्थानों और मजदूरों की बदौलत आज हमारा देश कई मायनों में आत्मनिर्भर हुआ है, उन संस्थानों को केंद्र सरकार पूंजीपतियों के हवाले कर देना चाहती है. ऐक्टू के राष्ट्रीय महासचिव, राजीव डिमरी ने इस सम्बन्ध में कहा – “कोरोना काल में प्राइवेट अस्पतालों की मुनाफाखोरी सबने देखी है, अगर आगे चलकर भारतीय रेल व तमाम सार्वजनिक संस्थाओं का निजीकरण किया गया तब गरीब-मेहनतकश आबादी के लिए ये सबसे बड़ी त्रासदी होगी. रेल कर्मचारियों में काफी असंतोष और गुस्सा है, कोयला क्षेत्र के मजदूरों ने हड़ताल का आह्वान किया है, आयुध निर्माणियों में भी हड़ताल की घोषणा हो चुकी है, देश के तमाम राज्यों में स्कीम वर्कर्स जुझारू संघर्ष कर रहे हैं – देश का मजदूर वर्ग मोदी सरकार को देश बेचने नहीं देगा. मोदी सरकार आत्मनिर्भर भारत के नाम पर देश को गिरवी रखने की तैयारी कर रही है. संघर्ष को तेज़ करने के लिए हमें धर्म-सम्प्रदाय से ऊपर उठकर अपनी एकता बनाए रखने की ज़रूरत है.”

(प्रेस नोट)

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