Home देश मोदी जी के अच्छे कामों पर आलोचकों की नज़र नहीं जाती.?

मोदी जी के अच्छे कामों पर आलोचकों की नज़र नहीं जाती.?

-विष्णु नागर||

प्रधानमंत्री बीच- बीच में कुछ अच्छे काम भी करते रहते हैं।, जिन पर उनके आलोचकों की दृष्टि नहीं जाती। कोरोना की वजह से ही सही प्रधानमंत्री इस बीच विदेश तो गए ही नहीं।, देश में भी एक जगह गये पश्चिम बंगाल के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करने। असम और बिहार की बाढ़ देखने भी नहीं गए। सोचा होगा सारी बाढ़ें एक जैसी होती हैं। इनमें कोई सेंसेशन नहीं है। छड्डो जी।, वेख कर भी की होणा ए। अब कोरोना के आगमन के बाद पहली बार वह विशिष्ट जनता के बीच जाएँगे -अयोध्या में रामलला का मंदिर बनवाने- खतरा उठाते हुए। भगवान राम के लिए वह स्वास्थ्य तो क्या जीवन भी बलिदान कर सकते हैं।

इस बीच प्रधानमंत्री ने कहीं न जाकर देश का सैकड़ों करोड़ रुपया बचाया है।, इसकी प्रशंसा की जानी चाहिए थी मगर उनके मंत्रियों तक ने ऐसा नहीं किया तो विरोधियों से ही क्या अपेक्षा रखना! राहुल गाँँधी से तो बिल्कुल ही नहीं। शायद मैं पहला व्यक्ति हूँँ ।, जो इसकी प्रशंसा करने की हिम्मत कर रहा है। शाबाश पट्ठे विष्णु नागर। इसके बावजूद मुझे मालूम है कि इसके लिए मेरी तारीफ़ स्वयं मोदीजी तो क्या।, उनका कोई चंगूमंगू भी नहीं करेगा मगर कोई बात नहीं। अब आदत सी हो गई है इस सबकी। कोरोना की तरह ।, यह भी एक मजबूरी है। चलिए फिर भी अपन ने अपना धर्म निभा दिया। ऊपरवाले मेरी तरफ से आँख मत मीच लेना।, याद रखना मेरे इस योगदान को।

अब मोदीजी का दूसरा अच्छा काम। इधर राममंदिर बन रहा है।, उधर पाँच राफेल लड़ाकू विमान भी धूमधाम से भारत पधार गए हैं। मुझे खुशी होती अगर प्रधानमंत्री स्वयं उनका स्वागत करने जाते। नहीं गये।, यह मेरे खयाल से गलत हुआ। पर वे प्रधानमंत्री हैं।, गलती भी वही करेंगे।, उनकी तरफ से मैं तो नहीं कर सकता! एलाऊ भी नहीं है। यह उनका अधिकार क्षेत्र है। राफेल में परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता भी है। यानी मोदीजी।, भगवान के भरोसे भी हैं और राफेल के भरोसे भी। इसे यूँ भी कह सकते हैं कि उन्हें भगवान से अधिक भरोसा राफेल पर है। प्रशंसक बताते हैं कि इससे बढ़िया लड़ाकू विमान पाकिस्तान तो क्या चीन के पास भी नहीं है। इसका नाम सुनते ही चीन के होश उड़ गए हैं तो पाकिस्तान का हाल क्या हुआ होगा।, आप समझ ही सकते हैं। मोदी जी और गोदी चैनलों के एंकर-एंकरानियाँ।, इस पर तो होना चय्ये बल्ले-बल्ले। घर-घर दिए जलने चय्ये थे मगर लोग भी गलती कर रहे हैं। यथा राजा।, तथा प्रजा।

वैसे अब ये सब क्या याद करना गलत है कि मनमोहन सरकार 126 राफेल विमानों का सौदा कर रही थी और मोदीजी 36 से ही संतुष्ट कैसे हो गए ।, यह सीक्रेट है। वैसे कहते हैं ।, संतोषी सदा सुखी। इस बहाने एक कंगाल उद्योगपति की भी मदद हो गई।, अच्छी बात है। वैसे भी मोदीजी को बैंकों को कंगाल करनेवाले मगर खुद संपन्न होकर विदेश भाग जानेवाले उद्योगपतियों को ज्यादा पसंद करते हैं।

ऐसों पर भी वह कृपा करते हैं।, जो देशभक्त रहे।, लूट कर भागे नहीं। कायर नहीं थे। और ऐसों पर तो उन्हें विशेष कृपा करना चाहिए।, जो भागे नहीं मगर देशी-विदेशी बैंकों का पैसा जीम कर यहीं बैठे हैं। वैसे मोदीजी की दयालुता विश्व प्रसिद्ध है। सुना है कि अब यह ब्रह्मांड प्रसिद्ध भी होने जा रही है। इससे भारत का गौरव बहुत बढ़ेगा। इस पर सभी भारतीयों को गर्व होना चाहिए और इसकी अभिव्यक्ति भी गीत।, संगीत।, नृत्य।, कविता ।, फिल्मों आदि माध्यमों से होना चाहिए। मेरा काम सुझाव देना था।, दे दिया। बाकी आपकी इच्छा। मैं अवसर के अनुकूल कविता नहीं लिख पाता हूँ। इस मामले में मैं दिव्यांग हूँ वरना मैं भी पीछे रहनेवालों में नहीं हूँ।

राममंदिर पर तो उत्साह का इजहार मैं पिछले ही हफ्ते कर चुका था। अब फिर से करना चाहता था मगर इस बीच मन पर उदासी की छाया पड़ चुकी है। पता चला कि आडवाणी जी के भगीरथ प्रयत्नों से जो बाबरी मस्जिद गिराई गई थी और दंगे हुए थे(या कराए गए थे) ।, उसके 18 साल बाद जिस मंदिर का शिलान्यास मोदीजी करने जा रहे हैं।, वह भव्य तो होगा मगर इतना भव्य भी नहीं होगा कि विश्व का सबसे भव्य और दिव्य मंदिर कहलाने की योग्यता पा सके। और तो और भारत का भी सबसे भव्य-दिव्य कहला सके। इस काबिल भी नहीं हो सकेगा। यह विश्व का पाँचवा और भारत का दूसरा बड़ा मंदिर होगा। सुना है कि यह सुनकर मोदीजी के प्रति भक्तों का विश्वास डोलने लगा है। वे कह रहे हैं।, अच्छा हुआ।, हमें नहीं बुलाया गया वरना मोदीजी को तो अपनी बदनामी की परवाह नहीं मगर हमें तो अपनी इज्ज़त की परवाह है! खत्म होने दो कोरोना संकट , विरोधस्वरूप अब हम स्वयंसेवक अंगकोरवाट मंदिर जाएँगे, अयोध्या नहीं। उनकी इस बात से तो मैं भी इत्तफाक रखता हूँ और मैंने भी अटैची तैयार रखी है। मैं भी वहीं जाऊँगा।

डिसकस तो मोदीजी की अन्य उपलब्धियों को भी करना चाहता था मगर बहते आँसुओं के बीच मुझसे लिखा नहीं जा रहा। वैसे जाते -जाते इतना कह दूँ कि मोदीजी ने कोरोना को “जन आंदोलन ” बना कर अच्छा किया। इस कारण ही शायद रोज पचास हजार लोग इसकी चपेट में रहे हैं। ‘ जनांदोलन ‘ बनाए बिना यह संभव नहीं था। यह भी कमाल है कि उन्होंने अपने बंगले में बैठे- बैठै इसे ‘ जनांदोलन ‘ बना दिया!

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