उग आये हैं तुम्हारे चेहरे पर भय के चकते..

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वरवर राव की रिहाई के वास्ते! वरवर राव ज़िंदाबाद!

वरवर राव की कविता “चिंता”

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अनिल शुक्ल

अनिल शुक्ल: पत्रकारिता की लंबी पारी। ‘आनंदबाज़ार पत्रिका’ समूह, ‘संडे मेल’ ‘अमर उजाला’ आदि के साथ संबद्धता। इन दिनों स्वतंत्र पत्रकारिता साथ ही संस्कृति के क्षेत्र में आगरा की 4 सौ साल पुरानी लोक नाट्य परंपरा ‘भगत’ के पुनरुद्धार के लिए सक्रिय।
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