कोरोना से हजार गुना बड़ी तबाही ला सकते हैं हैकर..

कोरोना से हजार गुना बड़ी तबाही ला सकते हैं हैकर..

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-सुनील कुमार||

बीती रात ट्विटर पर दुनिया के बड़े प्रमुख लोगों के अकाऊंट एक साथ हैक कर लिए गए, और उस पर ठगों ने एक झांसा पोस्ट किया कि अगले 30 मिनट में जो लोग उन्हें एक डिजिटल करेंसी, बिटकॉइनमें रकम भेजेगा, उसे वे दुगुनी रकम लौटाएंगे। और यह झांसा भूतपूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा, माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक और दुनिया के एक सबसे अमीर बिल गेट्स, और दुनिया के एक सबसे बड़े पूंजीनिवेशक और खरबपति वारेन बफे जैसे लोगों के ट्विटर अकाऊंट पर दिया गया। जिन्हें जानकारी नहीं है उनके लिए यह बताना मुनासिब होगा कि बिटकॉइनकिसी देश की मुद्रा नहीं है, और यह डिजिटल मुद्रा है, जिसे कि एक-एक करके बहुत से देशों ने मान्यता दे दी है, और कारोबार में भी कई जगह उसका इस्तेमाल होने लगा है। दुनिया के कई देश ऐसी देशरहित, बैंकरहित, गारंटीरहित मुद्रा को लेकर शक्की भी हैं, और उसे अपने देश में मान्यता नहीं देते हैं।

सुबह ट्विटर ने यह कहा कि वह इस हैकिंग की जांच कर रहा है, और जल्द ही इस पर काबू कर लेगा। यह बात तो ठीक है कि ट्विटर जैसी बड़ी कंपनियां धोखाधड़ी और जालसाजी को, हैकिंग को तेजी से काबू करती हैं, लेकिन तब तक जाने कितने लोग धोखा खा चुके रहते हैं। अभी कुछ महीने पहले बांग्लादेश के एक बैंक से ऑनलाईन हैकिंग से बड़ी रकम गायब कर दी गई थी। जो लोग यह सोचते हैं कि ऑनलाईन ठगी की रकम हर बार बरामद हो ही जाती है, उन्हें यह बात नहीं मालूम है कि इंटरनेट का एक रहस्यमय हिस्सा डार्कवेब (डार्कनेट) का नाम से अनजाने किस्म का है, और वहां अपराध की दुनिया का बोलबाला है, और दुनिया भर के सरकारी कम्प्यूटर विशेषज्ञ भी उसके भीतर अधिक घुसपैठ नहीं कर सकते हैं। वहां पर आतंकियों से लेकर ठगों तक, और बच्चों की अश्लील तस्वीरों का कारोबार करने वाले लोगों तक का राज चलता है। डार्कनेट पर हैकर और मुजरिम भी अपनी सेवाएं बेचते हैं, और उसे पुलिस और खुफिया एजेंसियों की पहुंच के बाहर माना जाता है। अब अगर ट्विटर पर हुई इस ताजा जालसाजी को देखें, और यह अंदाज लगाएं कि इंटरनेट पर अपराधियों और आतंकियों ने अगर एकजुट होकर, या अलग-अलग भी लोगों और सरकारों के कम्प्यूटरों पर घुसपैठ की, तो वहां ट्विटर जैसी सुरक्षा तो रहती नहीं है। अभी पिछले ही हफ्ते छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में नाबालिग हैकरों ने कुछ अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के कम्प्यूटरों में घुसपैठ करके बिटक्वाइन-जालसाजी से लाखों की खरीदी की है। दरअसल कम्प्यूटरों पर कमउम्र नाबालिग लोग कई तरह के कामों में महारथ हासिल कर लेते हैं। हिन्दुस्तान में ही कई कमउम्र हैकर ऐसे हैं जो कि इथिकल-हैकिंग, यानी भली नीयत से की जाने वाली हैकिंग, करते हैं। अब आमतौर पर सरकारों के कम्प्यूटर ट्विटर या गूगल जैसी कंपनियों के कम्प्यूटरों जैसी सुरक्षा वाले नहीं रहते। हॉलीवुड में पिछले 25 बरस में ऐसी अनगिनत फिल्में बनी हैं जिनमें मुजरिमों के हाथ, आतंकियों के हाथ सरकारी और बैंकिंग, सार्वजनिक और दूसरे किस्म के कम्प्यूटर-नेटवर्क लग जाते हैं, और उसके बाद वे देशों के बीच जंग छिड़वाने की नौबत भी ले आते हैं। फिल्मों को हकीकत में उतरने में अधिक वक्त नहीं लगता। पहले भी बहुत सी ऐसी विज्ञान कथाएं आई हैं जो कि आज हकीकत बनती जा रही हैं।

इस मुद्दे पर आज हम इसलिए लिख रहे हैं कि आज कोरोना और लॉकडाऊन के चलते दुनिया में जो तबाही आई है, अगर कोरोना के चलते-चलते ही, या कोरोना के खत्म होने के बाद कम्प्यूटरों में बड़े पैमाने पर ऐसी आतंकी घुसपैठ हो जो कि किसी देश की सार्वजनिक सेवाओं को, बैंकों को ठप्प ही कर दे, तो क्या होगा? 25 बरस पहले फिल्म बताती है कि सार्वजनिक सुविधाओं के कम्प्यूटर हैक करके प्लेन और ट्रेन बंद करवाए जा सकते हैं, सडक़ों पर ट्रैफिक लाईट बंद हो सकते हैं या गलत सिग्नल देकर टक्कर करवा सकते हैं, बिजलीघरों से उत्पादन ठप्प हो सकता है, और जनसुविधाओं के फोन-कम्प्यूटर ठप्प किए जा सकते हैं। क्या हिन्दुस्तान और बाकी देश दो सुविधाओं के बिना पल भर भी जीने की हालत में हैं? अगर फोन-इंटरनेट पर आतंकी या मुजरिमों का कब्जा हो जाए, और सरकार-बैंकों के कम्प्यूटरों पर उनका कब्जा हो जाए? अभी कोरोना से लडऩे की सारी तैयारी टेलीफोन और इंटरनेट के रास्ते चल रही है। अगर इन दो चीजों को हटाकर कल्पना की जाए, तो लोग बीमारी से ही नहीं भूख से भी मर जाएंगे, और गृहयुद्ध छिड़ जाएगा। जब कोई पुलिस या पड़ोसी को बुला नहीं पाएंगे, तो वे उसी तरह लुटेरों के शिकार हो जाएंगे जिस तरह अभी कुछ दिन पहले अमरीका में प्रदर्शनों के दौरान हुआ था। वहां तो सारा सिस्टम काम कर रहा था, लेकिन लोग पल भर में अराजक और लुटेरे हो गए थे। सरकारों को एक ऐसी नौबत को ध्यान में रखकर भी तैयारी करनी चाहिए जब सारे कम्प्यूटर या तो ठप्प कर दिए जाएं, या मुजरिम उनको चलाने लगें तो क्या होगा? आज दुनिया की इक्का-दुक्का सरकारें ही कोरोना से निपट पाई हैं, अधिकतर तो बड़ी-बड़ी सरकारें ऐसी हैं जो बड़ी-बड़ी बातें करती रहीं, लेकिन आखिर में थाली-चम्मच बजवाने लगीं, या ट्रंप की तरह बिना मास्क घूमने लगीं। दुनिया न कोरोना के लिए तैयार थी, न लॉकडाऊन के लिए तैयार है, और न ही ऐसे किसी बड़े कम्प्यूटर हमले के लिए तैयार हैं। यह भी समझना चाहिए कि चीन के साथ सरहद पर तनातनी और झड़प तो कम खतरनाक है, असली खतरनाक तो चीनी सरकारी हैकरों का हमला है जिससे दुनिया के कई देशों की सरकारें परेशान हैं। भारत में तो सरकारों से लेकर सार्वजनिक सुविधाओं तक के कम्प्यूटर बहुत कमजोर सुरक्षा वाले रहते हैं, और इन्हें आतंकियों या मुजरिमों के अलावा चीन जैसी घुसपैठिया सरकार के हैकर भी ठप्प कर सकते हैं। यह भी हो सकता है कि अगला कोई विश्वयुद्ध बिना हथियारों के लड़ा जाए, और हमलावर देश अपने दुश्मन देश की संचार प्रणाली पर कब्जा कर ले, उसे तबाह कर दे, और कम्प्यूटरों की सारी जानकारी को मिटा ही दे। ऐसी तस्वीर लोगों को आज फिल्मी लग सकती है, लेकिन घुसपैठियों की ताकत देखते हुए हो सकता है कि जिस वक्त हम यह लिख रहे हैं, उसी वक्त इसकी साजिश भी तैयार हो चुकी है।

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