अमेरिकी डॉलर ने मचाया कोहराम तो याद आया पड़ोसी चीन का युआन

reporter17
0 0
Read Time:4 Minute, 37 Second

अमेरिका में मंदी की आहट और डॉलर की मजबूती से आयात पर निर्भर रहने वाले छोटे कारोबारी परेशान हैं। कंप्यूटर हार्डवेयर की सबसे बड़ी मंडियों में शुमार दिल्ली के नेहरू प्लेस में तो हालत और भी खराब है। डॉलर की बेवफाई से परेशान यहां के कारोबारी मार्जिन बचाने के लिए अब चीन की मुद्रा युआन का सहारा ले रहे हैं।

नेहरू प्लेस में 3,000 से भी ज्यादा कारोबारी हार्डवेयर बेचते हैं, जिनमें लगभग 1,500 ऑल दिल्ली कंप्यूटर ट्रेडर्स एसोसिएशन (एडीसीटीए) के पास पंजीकृत हैं। यहां रोजाना 3 से 4 लाख ग्राहक आते हैं और सालाना कारोबार 7-8 हजार करोड़ रुपये का होता है, जिसमें 40 फीसदी हिस्सेदारी अमेरिकी माल की होती है। यही वजह है कि डॉलर की चाल से कारोबारियों का मार्जिन घट रहा है। यहां एसएसडी इन्फोकॉम के मालिक सागर गुप्ता रोजाना 25 से 30 लाख रुपये का सामान बेचते हैं। वह कहते हैं कि डॉलर महंगा होने से मार्जिन आधा ही रह गया है। डीलरों का मार्जिन तो खत्म हो गया है।

गुप्ता ही नहीं कई दूसरे कारोबारियों के सामने भी डॉलर दिक्कत बना है। 2 महीने पहले डॉलर की कीमत 44 रुपये थी, लेकिन अब वह 47 रुपये के करीब है। इस नुकसान को कम करने के लिए कारोबारी युआन में भुगतान करने लगे हैं। यहां हार्डवेयर का थोक कारोबार करने वाले आकाश आहूजा ने कहा, युआन की कीमत 6.50 से 7.30 रुपये है और 1 डॉलर में लगभग 6 युआन आते हैं। ऐसे में कारोबारी 1 लाख डॉलर के बदले 6 लाख युआन देते हैं, जो बमुश्किल 42 लाख रुपये के आते हैं। सीधे डॉलर में भुगतान करने पर उसे 46 से 47 लाख रुपये तक देने पड़ सकते हैं।

कुछ कारोबारी सोने का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार सौदा पक्का करते ही बैंक में रकम के बराबर सोना जमा कर देते हैं। जब उन्हें माल मिल जाता है तो बैंक विदेश में निर्यातक को सोने के एवज में रकम दे देते हैं। सूत्रों ने कहा, मिसाल के तौर पर किसी कारोबारी ने 1 सितंबर को किसी अमेरिकी निर्यातक से 22 करोड़ रुपये का सौदा पक्का किया। यदि उस दिन सोने का भाव 22,000 रुपये प्रति 10 ग्राम है तो कारोबारी 10 किलोग्राम सोना बैंक में जमा कर देगा। जब उसके पास माल 20 सितंबर को पहुंचेगा तो बैंक निर्यातक को 22 करोड़ रुपये ही देंगे चाहे सोने का भाव कुछ भी हो। इससे कारोबारी सोने या डॉलर के भाव में उतार चढ़ाव से बच जाता है।

अग्रवाल कहते हैं, डॉलर की मजबूती से सबसे ज्यादा असर ब्रांडेड कंप्यूटर उत्पादों पर पड़ा है। 1 लाख डॉलर के एवज में 2 महीने पहले 44 लाख रुपये ही देने पड़ते थे, जो अब 47 लाख के करीब बैठते हैं। ऐसे में कैबिनेट, मदर बोर्ड, हार्ड डिस्क और सीपीयू जैसे उत्पादों पर सीमा शुल्क और मूल्य वद्र्घित कर चुकाने के बाद 100 से 200 रुपये ही मिल पाते हैं, जबकि कुछ अरसा पहले मार्जिन 400 रुपये तक था। सॉफ्टटेक लखोटिया इन्फोकॉम के निदेशक उमेश गुप्ता ने बताया कि कड़े मुकाबले की वजह से मार्जिन घटने पर भी अमेरिका से माल मंगाना पड़ रहा है। लेकिन कुछ छोटे कारोबारियों ने वहां से आयात बंद कर चीन का रास्ता पकड़ लिया है।

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

चैनलों में मची MMS दिखाने की होड़, पुलिस ने कहा, लड़कियों ने किया था मज़ाक

चंडीगढ़ के पास पंचकुला में एक छात्रा का न्यूड एमएमएस बनाने का मामला एक तरफ जहां इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए टीआरपी का फॉर्मूला बन रहा है वहीं दूसरी तरफ पुलिस इस मामले को लड़कियों का आपसी मज़ाक बता कर रफा-दफा करने में जुटी है।   पंचकुला सेक्टर 5 की पुलिस ने मंगलवार […]
Facebook
%d bloggers like this: