Home राजनीति विकास दुबे यूपी की राजनीति का घिनौना चेहरा..

विकास दुबे यूपी की राजनीति का घिनौना चेहरा..

-कृष्ण कांत।।

कानपुर वाला विकास दुबे पर्दे के पीछे छुपी अपराधी सियासत के हाथों का देसी कट्टा है, जो इस बार बैकफायर कर गया.

विकास दुबे भारत में सात दशकों से चल रही राजनीतिक ठगी का जिंदा नमूना है. दुबे फरार है, लेकिन कई की किस्मत इतनी अच्छी थी कि सीधा संसद पहुंच गए और दशकों से चांदी काट रहे हैं. विकास दुबे ‘अपराध मुक्त संसद’ और ‘अपराध मुक्त राजनीति’ के चुनावी नारों की नाजायज परिणति है, जिसके जरिये जनता ठगी जाती रही है.

इंदिरा गांधी ने राजनीति का अपराधीकरण कैसे किया था, यह हमने वरिष्ठ पत्रकारों से सुना था. पिछले 20 सालों में उसे अपनी आंखों से फलते फूलते देख रहा हूं.

2014 में नरेंद्र मोदी ने जनता के बीच जाकर नारा लगाया कि मैं एक साल के अंदर ‘अपराध मुक्त संसद’ और ‘अपराध मुक्त राजनीति’ की स्थापना करूंगा.

2014 के चुनाव से पहले घोषणा पत्र जारी करके कहा गया कि चुनाव सुधार होगा ​और ‘अपराधियों को राजनीति से बाहर’ कर दिया जाएगा.

एक रैली में नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘आजकल चर्चा जोरों पर है कि अपराधियों को राजनीति में घुसने से कैसे रोका जाए. मेरे पास एक इलाज है और मैंने भारतीय राजनीति को साफ करने का फैसला कर लिया है… मैं इस बात को लेकर आशान्वित हूं कि हमारे शासन के पांच सालों बाद पूरी व्यवस्था साफ-सुधरी हो जाएगी और सभी अपराधी जेल में होंगे. मैं वादा करता हूं कि मैं अपनी पार्टी के दोषियों को भी सजा दिलाने से नहीं हिचकूंगा.’

यह वादा सैकड़ों बार दोहराया गया और लाखों लोगों ने लाखों तालियां बजाईं. क्या पिछले छह सालों को देखते हुए आप कह सकते हैं कि राजनीति को अपराध मुक्त बनाने की एक छोटी सी कोशिश भी हुई?

यह कानपुर वाला विकास दुबे इस बात का जिंदा सबूत है कि नेता जो कहते हैं, वह काम कभी नहीं करते. जो नहीं करते हैं, वह हमेशा करते हैं.

अगर किसी दुर्दांत अपराधी को मंत्री की हत्या के बाद भी अभयदान मिला हुआ था, तो क्या यह राजनीतिक संरक्षण के बगैर संभव है? पूरा थाना, दर्जनों पुलिसकर्मी उसके गुलाम ऐसे नहीं हुए होंगे!

जिस जनता ने यह भरोसा किया था कि ‘अपराध मुक्त राजनीति’ की स्थापना होगी, वह ठगी गई. इस ठगी में सभी पार्टियां समान रूप से शामिल हैं. मेरी जानकारी में उत्तर भारत की कोई ऐसी पार्टी नहीं है, जो गुंडे न पालती हो. जो सत्ता में होता है, सबसे ज्यादा गुंडे उसके दरबार में पल रहे होते हैं.

आठ सिपाहियों की हत्या के बाद यह विकास दुबे अब या तो एनकाउंटर में मारा जाएगा, या कानून के हाथों सजा पाएगा. लेकिन आप उस वादे पर फोकस कीजिए, जिसके लिए एक छोटा प्रयास तक नहीं किया गया.

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