क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी प्रकरण: क्या 2 करोड़ की रिश्वत एडीजी ने मांगी थी ?

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-महेश झालानी।।

दो करोड़ की रिश्वत मांगने के मामले में भ्रस्टाचार निरोधक ब्यूरो शीघ्र ही एडीजी अनिल पालीवाल से भी पूछताछ करेगी । इससे पूर्व मुख्य अभियुक्त अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सतपाल मिड्ढा के बयान कलमबद्ध होंगे । राजस्थान का यह पहला केस है जिसमे एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने एडीजी स्तर के अधिकारी के लिए रिश्वत मांगी ।

गौरतलब है कि एसीबी में मुकदमा दर्ज होने के बाद भी सतपाल मिड्ढा को अभी तक निलंबित नही किया गया है । बल्कि इनको वांछित स्थान दिल्ली में पदस्थापित हो गए है । साथ ही अनिल पालीवाल को भी एसओजी से कार्मिक का एडीजी नियुक्त कर दिया गया है ।

क्रेडिट कॉपरेटिव सोसायटी के मामलों की जांच का जिम्मा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सत्यपाल मिढ्ढा के पास था । मिड्ढा ने सोसायटी के नाम पर धोखाधड़ी करने वालों से पहले 8 करोड़ की मांग की । बाद में दो करोड़ में सौदा तय हुआ । दो करोड़ की राशि मे से मोटी राशि एडीजी अनिल पालीवाल को देनी थी । ऐसा मिड्ढा ने कहा था ।

परिवादी की शिकायत पर एसीबी ने सत्यपाल मिढ्ढा समेत अन्य के खिलाफ धारा 7-ए, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एवं आईपीसी की धारा 120 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। एसओजी से सत्यपाल मिढ्ढा का तबादला आरएसी 8वीं बटालियन दिल्ली कर दिया गया है। लेकिन अभी तक इनको निलंबित नही किया गया है । जबकि ऐसे मामलों में या तो निलंबित किया जाता है या फिर एपीओ । जैसे कि भरतपुर रेंज के डीआईजी लक्ष्मण गौड़ को एपीओ कर रखा है ।

परिवादी ने एसीबी में रिपोर्ट दी कि हमारी एक क्रेडिट कॉपरेटिव सोसायटी है। यह सोसायटी अपने सदस्यों से डिपोजिट लेने और ऋण देने का कार्य करती है। सोसायटी के खिलाफ एक शिकायत की जांच एसओजी ने विष्णु खत्री पुलिस निरीक्षक एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सतपाल मिड्ढा की ओर से की जा रही थी।

मिड्ढा की ओर से जांच समाप्त करने एवं एफआईआर दर्ज नहीं करने की एवज में अपने लिए एवं एसओजी के उच्चाधिकारियों (इनमे एडीजी अनिल पालीवाल भी शामिल है) के लिए 2 करोड़ रिश्वत राशि की मांग की । एसीबी द्वारा सत्यापन करने पर पाया गया कि सत्यपाल मिढ्ढा ने एडीजी अनिल पालीवाल के नाम से रिश्वत की मांग की गई है ।

सूत्रों से पता चला है कि सतपाल मिड्ढा के साथ एडीजी अनिल पालीवाल भी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी के वैशाली नगर स्थित तमन्ना टावर दफ्तर में गए । वहां पालीवाल ने कागज पर 8 करोड़ की राशि अंकित की । तत्पश्चात 2 करोड़ में सौदा तय हुआ । बाद क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी की ओर से एसीबी में मुकदमा दर्ज करवाने से सारा भांडा फूट गया । एसीबी सीसीटीवी की फुटेज और जीपीएस के माध्यम से अनिल पालीवाल की उपस्थिति को प्रमाणित करेगी।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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