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-मुजाहिद नफीस

अहमदाबाद, आरटीई फोरम, गुजरात, 9 जून, 2020 “आज गुजरात बोर्ड का 10वीं कक्षा के परिणाम घोषित हुए हैं जिसमें 60.64% विद्यार्थी ही उत्तीर्ण हो पाये हैं। गौरतलब है कि ये प्रतिशत पिछले साल से 6.33% कम है। इस वर्ष ए-1 ग्रेड में सिर्फ़ 1671 छात्रों को सफलता मिली जबकि गत वर्ष 4974 बच्चे ए-1 ग्रेड के साथ उत्तीर्ण हुए थे। इस वर्ष सिर्फ़ D ग्रेड में बढ़ोतरी हुई है जिसमें 13977 बच्चे सफल हुए हैं जबकि पिछले साल 6288 बच्चे D ग्रेड में थे, यानि इस रिज़ल्ट में केवल D ग्रेड में ही बढ़ोतरी हुई है। गुजरात बोर्ड के परीक्षा परिणामों के ये आंकड़े राज्य में शिक्षा की चिंताजनक हालत की तस्वीर बयान करते हैं। ये समझना जरूरी है कि गुजरात सरकार द्वारा हर क्षेत्र में विकास के दावों के बावजूद सार्वजनिक शिक्षा की ऐसी बदहाली के क्या कारण हैं?” – ये जानकारी देते हुए आरटीई फोरम, गुजरात के मुजाहिद नफीस ने निराशा प्रकट करते हुए कहा कि गुजरात में शिक्षा के गिरते स्तर पर गंभीरता से विचार करने की ज़रूरत है|

प्राथमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक शिक्षा की मौजूदा हालात पर एक त्वरित टिप्पणी करते हुए मुजाहिद नफीस ने कहा कि 2019 में गुजरात सरकार द्वारा कराये गए सर्वेक्षण में सामने आया कि गुजरात में 12000 प्राथमिक स्कूल महज एक या दो शिक्षक के सहारे चल रहे हैं, 9000 प्राथमिक विद्यालयों में खेल का मैदान नहीं है, गुजरात में 11376 प्राथमिक स्कूल सीमेंट/ तीन शेड (शीटेड रूफ़) में चल रहे हैं वहीं 10000 से अधिक क्लासरूम जर्जरित हालत में हैं। दिसंबर 2019 में विधानसभा के पटल पर माननीय शिक्षा मंत्री द्वारा दी गयी सूचना के अनुसार माध्यमिक स्तर पर 2371 रिक्तियाँ हैं, जिसमें 494 अंग्रेज़ी के व 884 विज्ञान, गणित के पद रिक्त हैं। वहीं उच्चतर माध्यमिक स्तर पर 4020 शिक्षकों के पद रिक्त हैं।

उन्होंने कहा कि राइट टू एजुकेशन फ़ोरम, गुजरात लंबे अरसे से शिक्षा के स्तर में गुणवत्तापूर्ण सुधारों के संदर्भ में सरकार को पत्र लिखकर मांग करता रहा है| ऐसे में हमें इस परिणाम से सीख लेते हुए पूर्व प्राथमिक से उच्चतर मध्यमिक स्तर तक के स्कूलों की संख्या, शिक्षकों की नियुक्ति, शिक्षा पर बजट में अपेक्षित बढ़ोतरी, बेहतर पठन- पाठन वाले उत्साहजनक शैक्षणिक वातावरण की तैयारी के लिए आवश्यक क़दम उठाने चाहिए ताकि हमारे राज्य में शिक्षा का स्तर एक विश्वस्तरीय कक्षा का बन सके। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक शिक्षा के ढांचे को मजबूत किए बगैर हम इस दिशा में आगे कदम नहीं बढ़ा सकते।

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