घर से पूजा-इबादत में क्या दिक्कत है, उसने कब कहा ताला खोलो.?

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-देवेन्द्र शास्त्री।।

मंदिर-मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारे खोलने की चर्चा शुरू हो गई है। लेकिन क्यों? क्या भगवान या अल्लाह या जिसेस क्राइस्ट ने किसी से कहा कि मेरी पूजा या इबादत या प्रार्थना के लिए मंदिर, मस्जिद या चर्च में ही आना होगा? वो तो आपकी पूजा, इबादत या प्रार्थना को आपके घर से भी स्वीकार कर रहा था, कर रहा है। तो फिर कौन लोग हैं जो बिना जरूरत के मन्दिर-मस्जिद-चर्च के ताले खोल कर लोगों की भीड़ चाहते हैं? इसमें बस दो ही लोगों की दिलचस्पी है। पहला वो जो वहां नोट इकठ्ठा करते हैं। दूसरा वो जो वोट बटोरता है।

जितने भव्य मंदिर, मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारे बनाये जाते हैं,अगर उसी भव्यता के साथ अस्पताल और स्कूल बनाये गए होते तो आज असहाय जनता को इलाज के लिए सड़कों पर नहीं पड़े रहना पड़ता। लोग पढ़ लिख गए होते तो देश के फैसले टोटकेबाज नहीं कर रहे होते।

सच ये है कि कोरोना ने भगवान, अल्लाह और जिसेस आदि के बारे में गढ़े गए आडम्बर की पोल खोल कर रख दी। करीब तीन महीने हो जाएंगे, सभी तरह के धार्मिक स्थल बंद हैं। ताले पड़े हैं। हुआ क्या इस अवधि में? एक खबर आई थी कि बन्दी के दो महीनों में किस बड़े मंदिर को कितने रेवेन्यू का नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसी को 100 करोड़ का। किसी को पचास करोड़ का। चांदे में हानि लाभ नहीं देखा जाता परन्तु धर्मिक स्थलों में ये चंदा बरसों से नियमित रूप से आता है कि अब वो प्रॉफिट या लॉस के रूप में देखा जाने लगा है।

देश को प्रगति के रास्ते पर तेजी से ले जाना है तो जनता का रुझान प्रकृति और विज्ञान की तरफ खींचना ही होगा। वरना दकियानूसी, सड़ियल, धार्मिक सनक से काम करने वाले लोगों को जनता चुनती रहेगी। देश उलट दिशा में चलता जाएगा। सावधान!

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