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सुजस प्रकाशन की आड़ में हेराफेरी..

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डीपीआर में करोड़ो का घपला: अफसर लिप्त..

-महेश झालानी।।

जन सम्पर्क विभाग के कतिपय अधिकारी एक प्रिंटिंग प्रेस की मिलीभगत से हर साल करोड़ो रूपये का सरकार को चूना लगा रहे है । लूट का यह कारोबार पिछले 20-25 से जारी है । अब तक प्रिंटिंग प्रेस और अधिकारियों ने करीब 25 करोड़ के वारे-न्यारे कर लिए है । लूट के इस कारोबार में विभाग के संयुक्त/उप निदेशक से लेकर मुखिया तथा लेखा शाखा तक के कई लोग भागीदार है ।

बात हो रही है जन सम्पर्क विभाग द्वारा प्रकाशित सूजस की । सूजस विभाग द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका का नाम है । जानकारी के मुताबिक यह पत्रिका पिछले कई वर्षों से सुदर्शनपुरा स्थित एक प्रेस से मुद्रित हो रही है । क्यों और कैसे छप रही है, विभाग का कोई अधिकारी यह ब्यौरा देने को तैयार नही है ।

ज्ञात हुआ है कि पत्रिका की प्रति माह एक लाख प्रतियां 30 रुपये के हिसाब से प्रकाशित होती है । 30 लाख रुपये प्रतिमाह अर्थात साल के 3.60 करोड़ रुपया । इस पत्रिका प्रकाशन के पीछे असली खेल यह है कि प्रतिमाह एक लाख पत्रिका का प्रकाशन दर्शाया जाता है । जबकि हकीकत में 2-4 हजार से ज्यादा पत्रिका मुद्रित ही नही होती ।

इस प्रकार साल भर में दो-ढाई करोड़ रुपये का घपला होता है । अब तक प्रति माह एक लाख प्रति प्रकाशित होती आई है । इस बार 65 हजार पत्रिका का प्रकाशन हुआ है । एक लाख पत्रिका का वितरण कहाँ होता है, इसकी जानकारी कोई अधिकारी देने को तैयार नही है ।

विभागीय सूत्रों का कहना है कि हर अधिस्वीकृत पत्रकार, मंत्री, विधायक, आईएएस, आईपीएस, आरएएस, विभागाध्यक्ष आदि को जरिये कोरियर भेजी जाती है । मैं पिछले 35 साल से अधिस्वीकृत हूँ । शुरू के दो चार साल में यह पत्रिका घर पर अवश्य आती थी । लेकिन 25 साल से इसके कभी दर्शन नही हुए । ऐसा मेरे साथ ही नही, अनेक पत्रकारों के साथ हो रहा है ।

प्रकाशन में तो गड़बड़ी हो ही रही है, इसके अलावा वितरण में भी बहुत बड़ा घपला हो रहा है । एक लाख प्रतियों को जरिये कोरियर के जरिये प्रेषित करना दर्शाया जाता है । जब पत्रिका प्रकाशित ही नही होती है तो उसको कोरियर से भेजा कैसे जाएगा ? यानी प्रकाशन में भी घपला और वितरण में भी । इसके अलावा जितने जीएसएम का रिकार्ड में कागज दर्शाया हुआ है, उस ग्राम का कागज कभी काम मे लिया ही नही गया ।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के महानिदेशक आलोक त्रिपाठी को पत्र लिखकर इस सारे घपले से अवगत कराते हुए विस्तृत जांच की मांग की है । साथ ही उन पत्रकारों, विधायको, अफसरों के बयान लेने का भी आग्रह किया गया है जिनको नियमित पत्रिका प्रेषित की जाती है ।

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