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राजस्थान सरकार ने अपने ही आदेश की उड़ाई धज्जियां..

-महेश झालानी।।

राजस्थान सरकार की अदूरदर्शिता तथा अफसरों की नासमझी को सलाम । गृह विभाग ने मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश में कोरोना काल के दौरान गुटखा, सिगरेट, बीड़ी, तम्बाकू, खैनी तथा पान मसाला पर लगी रोक को पूरी तरह हटा लिया है । अब पूरे प्रदेश में तम्बाकू तथा धूम्रपान पर किसी प्रकार का प्रतिबन्ध नही है । जबकि तथ्य यह है कि तम्बाखू और गुटखा खाने वाले कोरोना वायरस के शिकार जल्दी होते हैं।

कल सुबह से चर्चा थी कि आज गुटखा तथा धूम्रपान पर प्रातिबन्ध हट जाएगा । गुटखा और खैनी निर्माता पिछले काफी दिनों से सक्रिय थे । कल उनको प्रातिबन्ध हटने की पूरी उम्मीद थी । इसके पीछे क्या “खेल” हुआ, इसकी विस्तृत जानकारी बाद में दी जाएगी । संभवतया राजस्थान पहला प्रदेश है जिसने लॉक डाउन के दौरान गुटखे पर प्रतिबन्ध पर हटाकर अपनी असलियत जाहिर की है ।

सरकार के अफसरों की नासमझी का सबसे बड़ा सबूत यह है कि राज्य के चिकित्सा विभाग ने 2 अक्टूबर, 2019 को खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत पान मसाला तथा तम्बाकू आदि पर आशिंक रूप से प्रतिबन्ध लगाया हुआ है । गृह विभाग को चिकित्सा विभाग के आदेश में अतिक्रमण करने का कोई अधिकार नही है । बकौल एक उच्च अधिकारी के प्रदेश में इससे पहले बेवकूफी पूर्ण आदेश कभी जारी नही हुआ ।

हकीकत यह है कि गृह विभाग को केवल गुटखा आदि से प्रातिबन्ध हटाना था । इसलिए दिखावे के तौर पर आदेश जारी कर निषेद्ध गतिविधियां की शर्त संख्या 7 विलोपित कर दिया गया है । अर्थात पूर्व में गृह मंत्रालय के निर्देश पर जारी निर्देश की अनुपालना में शर्त संख्या 7 के तहत गुटखे आदि पर प्रतिबंध लगाया था, उसको वापिस (विलोपित) कर विक्रय की छूट दे दी है ।

नियमानुसार गृह विभाग को चिकित्सा विभाग द्वारा 1 अक्टूबर, 2019 को जारी आदेश के अतिक्रमण में उक्त आदेश जारी करना चाहिए था । अथवा चिकित्सा विभाग को संशोधित आदेश जारी कर थूक कर चाटना चाहिए था । यह आदेश नही, गुटखा, खैनी और धूम्रपान वालो की तिजोरियां भरने वाला आदेश है ।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गांधी जयंती के अवसर पर पिछले साल 2 अक्टूबर, 2019 को प्रदेश को तम्बाकू रहित प्रदेश की घोषणा कर खूब वाहवाही लूटी थी । अखबारों में बड़े बड़े विज्ञापन प्रकाशित हुए थे और टीवी में माननीय मुख्यमंत्री के इंटरव्यू भी प्रसारित हुए थे । जनता को पता ही नही लगा कि उनको बड़ी चालाकी से बेवकूफ बनाया जा रहा है । वस्तुतः आदेश इतना चालाकी से ड्राफ्ट किया कि मुख्यमंत्री पढ़ते तो वे भी चक्कर खाकर जाते ।

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