20 लाख करोड़: राहत की हवाबाजी

Desk
0 0
Read Time:9 Minute, 48 Second

2013 में जब मोदीजी केंद्र की सत्ता में आने का रोडमैप तैयार कर रहे थे, तब दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में एक भाषण के दौरान उन्होंने नए भारत में विकास का रोडमैप पेश करते हुए पानी से आधे भरे गिलास को उठाकर कहा था कि कुछ लोग इसे आधा भरा या आधा खाली कहेंगे, लेकिन वे इस गिलास को भरा कहेंगे, जो आधा पानी और आधा हवा से भरा है। इस हवाबाजी वाले जुमले का असर ऐसा हुआ कि वे लगातार दो बार भारी बहुमत से सत्ता में आए। भाजपा, आरएसएस के मन की बहुत सी बातें उनके शासनकाल में पूरी हुईं, लेकिन गरीब जनता आधे गिलास के खालीपन में अपनी जिंदगी की उम्मीदें तलाशती ही रह गई।

कोरोना में लॉकडाउन के सरकार के अचानक लिए फैसले ने गरीब जनता को बड़े पैमाने पर विस्थापन के लिए मजबूर कर दिया और लाखों लोगों की बची-खुची उम्मीदें भी जाती रहीं। पहले, दूसरे और तीसरे लॉकडाउन में सरकार से राहत पैकेज का और राहत देने के फैसलों का इंतजार होता रहा। सरकार ने राहत कहे जाने वाले कदम तो उठाए, लेकिन उसे किन लोगों को राहत मिली, यह शोध का विषय है।

फिलहाल देश भर से जो खबरें और तस्वीरें सामने आ रही हैं, उनमें यह नजर आ रहा है कि बेरोजगारी अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई है, बहुत से लोगों का भविष्य अधर में है, क्योंकि उन्हें पता ही नहीं कि वे आगे अपना कारोबार या नौकरी कैसे जारी रखेंगे, हजारों लोग श्रमिक ट्रेनों के शुरु होने के बावजूद सड़क के रास्ते ही अपने गांव लौट रहे हैं। शहर से घरवापसी करते लोगों को अब ये नहीं पता कि वे आगे किस तरह कमाएंगे-खाएंगे। सरकार ने अप्रैल में गरीबों के लिए एक राहत पैकेज का ऐलान किया था, लेकिन उसका भी कुछ खास लाभ हकीकत में नजर नहीं आया। अब मोदीजी ने चौथे लॉकडाउन की भूमिका बांधते हुए अपनी छाती को और चौड़ा करते हुए नए राहत पैकेज का ऐलान किया। इस ऐलान में उनके बाकी भाषणों की तरह अलंकार और विशेषण कूट-कूट कर भरे थे।

मोदीजी ने चुनौती को अवसर में बदलने का उपदेश दिया, आत्मनिर्भर भारत अभियान का जिक्र किया और बताया कि 2020 में 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज का ऐलान किया।  20 की गिनती उन्होंने बीस बार तो शायद नहीं की, लेकिन इतने बार 20 कहा मानो बार-बार कहने से लोगों के खाते में पैसे अपने आप आ जाएंगे या जो लोग भी सड़कों से हजारों किमी की दूरी पैदल नाप रहे हैं, वे उड़कर अपने घर पहुंच जाएंगे। अगर 20 वाली ये राहत 20 दिनों में मिल जाती तो इस तुकबंदी में जरा और मजा आता। 

बहरहाल, अभी भी जिस शान से उन्होंने ये बताया है कि ये कितना बड़ा राहत पैकेज है और इससे कैसे भारत की सारी मुसीबतें दूर हो जाएंगी, वो आधे खाली गिलास की हवा जैसी ही है, जो दिखाई नहीं देती है और जिसके होने का कोई अर्थ भी नहीं है।

भारत की जो गरीब जनता अभी 20 रुपए की कमाई के लिए भी तरस रही है, उसके लिए 20 लाख करोड़ की बात आकाश कुसुम तोड़ने की तरह है। मोदीजी ने छह साल पहले लोगों को उम्मीद दिलाई थी कि सबके खाते में 15 लाख आएंगे, अब लोगों को 20 लाख करोड़ में अपनी हिस्सेदारी का हिसाब लगाने में व्यस्त कर दिया है। वैसे सरकार ने जिस शान से 20 लाख करोड़ का ढिंढोरा पीटा है वह असल में अब तक के सारे राहत पैकेज की मिली-जुली राशि है। सरकार ने पहले पौने दो लाख करोड़ रुपए की राशि के एक राहत पैकेज का ऐलान किया था फिर रिजर्व बैंक के जरिए भी आठ लाख करोड़ रुपए बाजार में डालने का इंतजाम किया गया, यानी लगभग दस लाख करोड़ रुपए का ऐलान पहले किया जा चुका है और अब 10 लाख करोड़ रुपए इसमें और जोड़ दिए गए हैं।

मोदीजी ने इसके जरिए आत्मनिर्भर भारत अभियान के लक्ष्य को पूरा करने की बात कही, हालांकि यह नहीं बताया था कि इस राशि का कैसे उपयोग होगा, क्योंकि बाजार में सभी सेक्टर्स अपने लिए राहत चाहते हैं। मोदीजी ने यह दायित्व वित्तमंत्री पर छोड़ दिया। बुधवार को शाम चार बजे वित्तमंत्री ने प्रेस कांफ्रेंस कर पहले तो मोदीजी की तरह ही घुमा-फिरा कर खूब बातें कीं और उसके बाद बताया कि इस राहत पैकेज में किसे क्या मिलेगा। वित्तमंत्री ने कहा कि आने वाले दिनों में इस पैकेज की हर रोज अलग-अलग विस्तृत जानकारी दी जाएगी। यह बात समझ से परे है कि सरकार एक बार में अपनी योजनाओं और घोषणाओं को साफ-साफ क्यों नहीं बताती।

क्या सरकार किसी की कर्जदार है, जो ईएमआई की तरह योजनाएं किश्तों में पेश करती है या उसके पास कोई पुख्ता तैयारी ही नहीं होती कि एक बार में बिना गलतियों के सारी बातें साफ-साफ जनता के सामने रख सके। बहरहाल, आज वित्तमंत्री ने एमएसएमई के लिए कुछ ऐलान किए, जैसे 3 लाख करोड़ रुपये का बिना गारंटी के लोन, संकट में फंसे एमएसएमई के लिए 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान, कारोबार विस्तार के लिए 10,000 करोड़ रुपये के फंड्स ऑफ फंड के माध्यम से सहयोग, इसके अलावा 15 हजार रुपये से कम वेतन वालों को अगस्त तक ईपीएफ केंद्र की ओर से, एनबीएफसी के लिए 30,000 करोड़ रुपये की स्पेशल लिक्विडिटी स्कीम आदि शामिल हैं। हजारों करोड़ की ऐसी घोषणाओं को सुनकर लगता है कि राहत पैकेज न हुआ जादू की छड़ी हो गई, कि जिसे घुमाते ही सब कुछ ठीक हो जाएगा। लेकिन सवाल ये है कि 20 लाख करोड़ की रकम सरकार के पास आखिर किन मदों से आ रही है। क्योंकि राजकोषीय घाटा तो बढ़ रहा है।

सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए बाजार से कर्ज लेने का लक्ष्य बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपये कर दिया है,  आम बजट में इसका लक्ष्य 7.8 लाख करोड़ रखा गया था। पेट्रोल-डीजल पर टैक्स बढ़ाने से सरकार के खाते में 1.4 लाख करोड़ रूपये आएंगे, कुछ रकम कर्मचारियों के भत्तों में कटौती और सांसद निधि में कटौती से आएगी। पीएम केयर्स से अगर इसमें कुछ राशि डाली जा रही है, तो उसका खुलासा भी होना चाहिए। क्या सरकार राहत की पूरी रकम आसानी से जुटा लेगी। अगर उसके पास पहले से इसका इंतजाम था तो राहत पैकेज के ऐलान में इतनी देरी क्यों की। 

लघु और मध्यम उद्योगों में मानव श्रमशक्ति की जो जरूरत होती है, वह तो इस वक्त अपनी शक्ति घर जाने में लगा रही है। जिस श्रमिक वर्ग के बूते आत्मनिर्भर भारत की बात मोदीजी कह रहे हैं, वह तो वाकई इतना आत्मनिर्भर है कि पैदल ही अपने घर चल पड़ा है। मजदूरों की कमी के साथ एमएसएमई किस तरह काम कर पाएंगे, क्या इस बारे में सरकार ने विचार किया है। हजारों करोड़ के बांटने की ईमानदार और पारदर्शी व्यवस्था किस तरह होगी, क्या इसका कोई रोडमैप तैयार हुआ है। अक्सर ये देखा गया है कि मजदूर, किसान को पता ही नहीं चलता है और उनके नाम की भलाई केवल कागजों में दर्ज हो जाती है और राहत की मलाई किसी और को खाने मिलती है। देखना है कि मोदीजी गिलास को पानी से पूरा भर पाते हैं या फिर लोगों को हवा से ही काम चलाना पड़ेगा।

(देशबन्धु)

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

मजदूर तो जिंदा रह लेंगे, पर बाकी डायनासॉर न हो जाएं

-सुनील कुमार।।चारों तरफ से दुख-तकलीफ की खबरों के बीच एक अच्छी खबर यह है कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एयरपोर्ट वाला गांव अपनी महिला सरपंच की अगुवाई में बाहर से लौटे मजदूरों को तुरंत ही सरकारी काम में मजदूरी दे रहा है, और लोग आते ही काम पर लग […]
Facebook
%d bloggers like this: