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सहारनपुर के फेसबुकियां नेता की सोशल मीडिया पर हो रही है आलोचना..

-तौसीफ कुरेशी।।

कोरोना वायरस कोविड-19 जैसी महामारी के चलते भी सहारनपुर की सियासत में आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा है लोकसभा चुनाव 2019 में किसे वोट दिया और किसे नहीं दिया इस पर सोशल मीडिया पर बहस हो रही है क्या यह समय इस पर बहस करने का है ? लगता है कि ऐसे विचार रखने वाले नेताओं की आत्मा मर चुकी हैं जो इस तरह के सवाल जनता से पूछ रहे हैं।

इसको लेकर उनकी खूब आलोचना हो रही है लेकिन भक्त अपने नेता के निकम्मे पन को भी सही ठहरा रहे हैं ये हाल है हमारे नेता और उनके भक्तों का शर्म इनको मगर नहीं आती एक सवाल भी पैदा हुआ उनकी कयादत कयादत चिल्लाने से कि जब अपने चाचा की स्थापित कयादत की हत्या कर अपनी बात रहे थे जब यह ज़हन में नहीं आया था कि स्थापित कयादत को ख़त्म नहीं करना चाहिए।

लेकिन जब यह बात बुरी और नागवार लगती थी आज जब खुद स्थापित नहीं हो सके तो याद आ रही हैं कयादत की आज सहारनपुर में सब कुछ सही चल रहा है तो इन्हें दिक़्क़त हो रही है सहारनपुर के सांसद हाजी फजलूर्रहमान बिलकुल सही कार्य कर जनता की हर तरीक़े से कयादत कर रहे हैं इस लिए वह आवली बावली बक रहे हैं।कमजोर कयादत पहले एसएसपी सहारनपुर से मिली और पूरी जानकारी दी साथ ही यह भी कहा कि दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाए और इस मामले में कोई FIR नहीं की जाएगी ये आश्वासन मिलने के बाद फिर देवबन्द गए और देवबन्द पुलिस के द्वारा मुसलमानों पर ढाए गए ज़ुल्मों का घर-घर जाकर उन मज़लूमों की आप बीती सुन रही थी और स्वयंभू मजबूत कयादत का दम भरने वाली कयादत फ़ेसबुक पर इस बात का रोना रो रही थी कि अगर मैं होता तो ऐसा न होता।

क्या बात है इस स्वयंभू मज़बूत कयादत के कमांडर की फ़र्ज़ी बातें कर लोगों को बरगलाने का काम करते है जनता के लिए करते कुछ नहीं CAA , NPR एवं संभावित NRC के आंदोलन से ग़ायब थी जनता उन्हें तलाश कर रही थी ? जबकि सांसद हाजी फजलूर्रहमान उस आंदोलन में भी जनता के बीच में ही काम रहे थे। लेकिन हाँ, वह सियासी ढोंग नहीं करते उस फ़र्ज़ी स्वयंभू कमांडर मज़बूत रहनुमा की तरह ये फ़र्क़ है उसमें और सांसद हाजी फजलूर्रहमान में।

कोरोना वायरस जैसी आपदा में भी फ़ेसबुक पर लोगों से ख़ाली अपील करते हैं न कि मदद दूसरों के द्वारा की जाने वाली मदद पर जाकर फ़ोटो खिंचवा कर फ़ेसबुक पर डालने की आदत है और न ही फ़ेसबुक बैठकर रोने का बुख़ार है सांसद हाजी फजलूर्रहमान ने जब से यह महामारी भारत में आई वह अपने संसदीय क्षेत्र सहारनपुर की जनता के लिए हर तरीक़े से मदद कर रहे हैं।जिस तरीक़े से सहारनपुर के सांसद हाजी फजलूर्रहमान हर विषय पर काम कर रहे हैं कोई मौक़ा हो सांसद आगे खड़े मिलते हैं रही बात स्वयंभू रहनुमा की उनके इस दर्द को कम नहीं किया जा सकता है।

देश और जनपद सहारनपुर कैसे हालात से गुजर रहा है सबको एकजुट होकर गरीब और असहाय लोगों की मदद करने की बजाय इन्हें चुनावों में मिली करारी शिकस्त का दर्द है वो भी तीसरे स्थान पर आने के बाद मान लेते अगर वह दूसरे स्थान पर रहे होते और मामूली अंतर से हारे हुए होते तो लगता कि ग़लती की। लेकिन 2014 में हुए चुनाव में सहारनपुर की पाँचों विधानसभाओ से पूरा वोट मिला था। तब कौन था, क्यों हार गए थे?

पुलिस प्रशासन से डराकर सियासत करने वालों को अब हक़ीक़त में काम करना पड़ेगा तब काम चलेगा। मुखबिरी कर लोगों की शिकायत कर उन्हें पकड़वाना या छुड़वाना कोई काम नहीं होता चाहे उसमें कोई भी हो। स्वयंभू रहनुमा हो या हाजी फजलूर्रहमान। सबके साथ एक ही फ़ार्मूले पर काम करना चाहिए। जब तक हाजी फजलूर्रहमान सही काम कर रहे तब तक सही वर्ना सियासी लॉकडाउन कर छुट्टी पर भेज देना चाहिए।

सियासत में ये काम बंद करना पड़ेगा कि हम किसी के बँधवा मज़दूर बनकर कार्य करें मौक़े पर जो हालात हो उसके मुताबिक़ सियासी फ़ैसला ले, तब परिणाम अच्छे आएँगे। जैसा पहले होता था कि हम तो फला पार्टी या व्यक्ति के साथ है यही रणनीति तबाही की ओर ले जाती हैं। इसी का परिणाम हमारे सामने है कि देश किन हालात में पहुँच गया है।

अगर सोच समझ कर मतदान करते तो शायद ये हालात न होते सहारनपुर लोकसभा सीट के चुनाव में जनपद की जनता ने सही फ़ैसला लिया था उसी का परिणाम हाजी फजलूर्रहमान सांसद है नहीं तो राघव लखन पाल शर्मा होते जो ये स्वयंभू रहनुमा चाहते थे।स्वयंभू रहनुमा का दम भरने वाले ये भी नहीं देखते इस समय वोट किसने किसको दिया या नहीं दिया इस पर बहस नहीं होनी चाहिए बहस इस पर होनी चाहिए थी जिन पुलिसकर्मियों ने अगर ज़्यादती की उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होने की बात होती। शायद बढ़िया रहता लेकिन स्वयंभू रहनुमा को इसी का दर्द है कि मेरी कयादत क़ायम रहेंगी या किसी और की। जब जबरन अपने चाचा की कयादत की हत्या कर रहे थे तब ये सब भूल गए थे या याद थी। यह भी स्वयंभू रहनुमा को विचार करना चाहिए लेकिन ये वह नहीं करेंगे यही उनकी पहचान भी बन गई है। फ़ेसबुक पर बैठकर कहते है कि मेरी एसएसपी व एसपी ग्रामीण से बात हो गई है और जनता को मान लेना चाहिए था और कोई नेता कुछ न करता न रात में घटनास्थल पर पूर्व विधायक माविया अली को नहीं जाना चाहिए था। जबकि माविया अली अगर समय रहते घटनास्थल पर न पहुँचते तो हालात और ख़राब होते। यह भी एक सच हैं और न सांसद हाजी फजलूर्रहमान को जनपद के नेता विधायक संजय गर्ग , पूर्व विधायक शशिबाला पुण्डीर , सहारनपुर देहात से सपा प्रत्याशी रहे सरफराज खान , बसपा ज़िला अध्यक्ष योगेश कुमार , बसपा प्रभारी नरेश गौतम , ज़िला पंचायत अध्यक्ष के प्रतिनिधि माजिद अली आदि को लेकर एसएसपी से नहीं मिलना चाहिए था। हंसी आती हैं ऐसी घटिया मानसिकता पर शर्म इनको मगर नहीं आती।

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