Home देश कोरोना कहर के बीच क्यों सुलग रही हैं सरहदें.?

कोरोना कहर के बीच क्यों सुलग रही हैं सरहदें.?

-रामशरण जोशी।।

कोरोना वायरस का कहर भारत और पाकिस्तान बराबर झेल रहे हैं। पाक नाकाम देश है , कंगला हो चूका है , आर्थिक तबाही मची हुई है।
भारत के हाल भी कहां बेहतर हैं ; आर्थिक संकट के भंवर के मुहाने पर है ; प्रवासी मज़दूर सड़कों पर उतर रहे हैं ; भूखे -प्यासे घरों को गमन कर रहे हैं ; उद्योग -धंधा ठप्प है। कुलमिला कर सामाजिक -सियासी -आर्थिक असंतोष का आलम है।
मगर , 8 वावां आश्चर्य देखें। कोरोना संतप्त दोनों देशों की सरहदें बराबर सुलग रही हैं ; संघर्ष विराम तोड़ा जा रहा है ; जवान शहीद हो रहे हैं ; राज सत्ता की खुमारी में हुक्मरान मदहोश हैं ; कवच बना हुआ है धर्म -मज़हब ! क्या कभी किसी कॉर्पोरेट घराने की औलादें शहीद होती सुनी हैं , दोनों पार सरहद के? गरीब किसान -मज़दूरों -मध्य वर्ग की संतानें ही प्राणों का उत्सर्ग करती आ रही हैं , चाहे 19वीं सदी का स्वतंत्रता संग्राम रहे या बीती सदी का स्वतंत्रता आंदोलन।
इस पार -उस पार की जनता को सवाल करना चाहिए . सोचना चाहिए , आखिर इस वैश्विक महामारी की घड़ी में तोपें शांत क्यों नहीं है ? क्यों मज़हब के नाम पर आतंकवाद का कारोबार चलाया जा रहा है ? इससे शासक वर्ग ही खुश हो सकता है , रब्ब तो नहीं होगा। फिर किसे या किसकी तुष्टि की जा रही है , इस समय का बड़ा सवाल यही है।

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