Home मीडिया फर्जी खबर छापने वालों में प्रभात खबर भी !!

फर्जी खबर छापने वालों में प्रभात खबर भी !!

-संजय कुमार सिंह।।


आजकल फर्जी खबरों की बाढ़ आई हुई है। सूत्रों के हवाले से छपने वाली खबर कहां से शुरू हुई यह पता लगाना मुश्किल होता है पर पता लग ही जाता है। फिर भी फर्जी खबरें आम हैं। राजनीतिक खबरों का तो मकसद होता है। अवार्ड, ईनाम और प्रशंसा वाली खबरें भी भक्त किस्म के प्रचारक फैलाते हैं पर रतन टाटा के नाम से कोई फर्जी खबर क्यों फैलाएगा? फर्जी खबरों से जुड़े कई किस्से हैं पर रतन टाटा के नाम से दूसरी बार फर्जी खबर आई तो मेरी दिलचस्पी इसमें हुई। यह खबर आज ही प्रभात खबर के जमशेदपुर एडिशन में रतन टाटा की फोटो के साथ छपी है।


जमशेदपुर के अखबार में रतन टाटा की खबर हो तो उसे सच मानने वाले बहुत सारे लोग मिल जाएंगे। हालांकि, खबर में स्रोत नहीं है और ऐसा लगता है जैसे विज्ञप्ति के आधार पर बनाई गई हो। जमशेदपुर में ऐसा कोई कर तो जरूर सकता है और यह भी संभव है कि किसी ने फर्जी विज्ञप्ति भेजी हो। पर कोई क्यों करेगा और रिपोर्टर कैसा गच्चा खा जाएगा यह लाख टके का सवाल है। जो भी हो, अखबार को यह बताना चाहिए कि यह सब हुआ कैसे। मुझे लगता है कि राजनीतिक फर्जी खबर फैलाने वाले कुछ गैर राजनीतिक खबरें देकर अपनी साख बनाना चाहते हैं और नसीब उनकी ऐसी है कि पोल खुल ही जाती है।
रतन टाटा का ट्वीट देखने के बाद मैंने खबर का शीर्षक गूगल किया तो यह खबर कई जगह दिखी। एक यू ट्यूब लिंक सबसे ऊपर मिला। रात साढ़े ग्यारह बजे वह आठ घंटे पहले पोस्ट किया गया बता रहा था। मैंने उस वीडियो को देखा तो किसी अनाम से समाचार चैनल का था उसे करीब 1200 बार ही देखा गया था। हालांकि, समाचार चैनलों के नाम के बारे में मेरी जानकारी बहुत कमजोर है। जो भी लिंक थे उसमें सबसे पुराना 22 घंटे पहले का था। यानी कल रात का। वह लिंक प्रभात खबर का था। उसे खोला तो आज रात आठ बजे के करीब अपडेट किया गया था। और फैक्ट चेक तथा रतन टाटा का फेक मैसेज हुआ वायरल जैसी खबरें मिलीं। जाहिर है पुरानी खबर ‘ठीक’ कर दी गई थी। हालांकि यह अनुमान ही है। मैंने ई पेपर देखा तो खबर छपी मिली।


प्रभात खबर ने अपडेट की हुई अपनी खबर में नहीं लिखा है कि उसने भी अपने जमशेदपुर संस्करण में यह खबर पहले पन्ने पर छापी है सिर्फ वायरल मैसेज की सूचना है। हालांकि, आज के समय में इतनी नैतिकता की उम्मीद करना भी गलत है। आज तक ने भी इस खबर का फैक्ट चेक छापा है। इसमें भी प्रभात खबर को ही इस फर्जी खबर का स्रोत बताया गया है। ई पेपर का स्क्रीन शॉट भी है। यह खबर रात 11 बजे अपडेट की गई है। प्रभात खबर एक उद्योग समूह का अखबार है और पेशेवर संपादकों के घटते इस जमाने में मशहूर पत्रकार हरिवंश लंबे समय तक इसके संपादक रहे जो राज्य सभा का सदस्य बन जाने के बाद इस अखबार से अलग हो गए।
अखबार के प्रिंटलाइन के अनुसार एक पेशेवर प्रधान संपादक के साथ झारखंड के लिए कार्यकारी संपादक और रांची तथा जमशेदपुर संस्करण के लिए अलग संपादक हैं जो पीआरबी अधिनियम के अनुसार खबरों के चयन के लिए जिम्मेदार बताए गए हैं। अखबारों में गलत खबरें छपना भी कोई नया नहीं है। कई बार लोग बयान देकर मुकर जाते हैं, सो अलग। पर समस्या यह है कि अखबार बताते नहीं हैं कि गलत खबर छपी कैसे? अगर अखबार बताने लगें कि चूक कहां हुई तो दूसरों को जानने सीखने का मौका मिलेगा और सुधार के उपाय भी किए जा सकेंगे। पर चुप रह जाने से लगता है कि कोई साजिश थी।

जब प्रभात खबर की इस फर्जी खबर को ले थू थू हुई तो फिर प्रभात खबर ने कहा, सोशल मीडिया से ली थी रतन टाटा वाली खबर, खेद जताया।

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