दीवारें कहां- कहां और कब तक..

दीवारें कहां- कहां और कब तक..

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मैक्सिको से गैरकानूनी तरीके से अपने यहां आने वाले लोगों को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने दोनों देशों की सीमा पर लम्बी-चौड़ी दीवार बना रखी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत आए तो अहमदाबाद की मलिन बस्तियों को उनकी नजरों से छिपाने के लिए वहां दीवार खड़ी कर दी गई, लेकिन तब यह सोचा ही नहीं गया होगा कि देश के कुछ राज्य बहुत जल्दी ही इसका अनुसरण करने लगेंगे, भले ही उसके कारण कुछ और हों।

देश में अचानक हुए लॉकडाऊन से लाचार हुए प्रवासी मजदूर घर लौटने लगे तो बहुत सारे गांवों-कस्बों के रास्ते बंद कर दिए गए कि कहीं ये मजदूर कोरोना का संक्रमण न फैला दें। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तो लॉकडाऊन की शुरुआत में ही अपने प्रदेश के आप्रवासी मजदूरों को वापस आने से मना कर दिया था। ऐसा करने वाले वे शायद अकेले मुख्यमंत्री हैं और अब जब लगभग सभी राज्य सरकारें दूसरे प्रदेशों से आए मजदूरों के रहने-खाने का ही इंतजाम नहीं कर रहीं, बल्कि अपने प्रदेश के छात्रों और मजदूरों को वापस लाने का भी जतन कर रहीं हैं, नीतीश कुमार अपनी बात पर कायम हैं। 

कोरोना के भय से इस समय सभी राज्यों और उनके भीतर जिलों ने भी अपनी सरहदों पर कड़ी चौकसी लगा रखी है। लेकिन कुछ राज्य इस मामले में एक कदम आगे निकल गए हैं। कर्नाटक ने केरल को जाने वाले दो राष्ट्रीय राजमार्गों को मार्च में ही बंद कर दिया था। अब खबर है कि तमिलनाडु ने वेल्लोर की सीमा पर पांच-पांच फीट की दो मजबूत दीवारें खड़ी कर दी हैं ताकि आंध्रप्रदेश के लोगों की आवाजाही रोकी जा सके। तमिलनाडु की इस कार्रवाई से वेल्लोर के उच्च विशेषज्ञता वाले सुप्रसिद्ध अस्पताल तक पहुंचने में लोगों को तो परेशानी हो ही रही है,लगभग 10 हजार लीटर दूध की प्रतिदिन आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है।

उधर ओडिशा ने आंध्रप्रदेश की सीमा पर अपनी कुछ सड़कों को ही खोद कर रख दिया है। नतीजतन, बीमारों को, $खासतौर से गर्भवती महिलाओं को बांस पर चादर बांधकर लाना पड़ रहा है। हालांकि आंध्रप्रदेश ने तमिलनाडु और ओडिशा से अनुरोध किया है कि वे ऐसी कार्रवाई न करें, जिससे किसी आपात स्थिति में फंसे लोगों की मुश्किलें बढ़ जाएं, लेकिन ये दोनों राज्य अपने पड़ोसी की गुहार सुनते हैं या नहीं, आने वाले समय में ही पता चलेगा।

अपने यहां के मजदूरों और छात्रों को वापस लाने के लिए सबसे पहले उत्तरप्रदेश सरकार ने पहल की थी। लेकिन उसी उत्तरप्रदेश में अब एक तरफ नोएडा और गाजियाबाद प्रशासन ने दिल्ली से लगने वाली अपनी सीमाओं को सील कर दिया है, दूसरी तरफ मध्यप्रदेश से होकर लौट रहे मजदूरों को झांसी और ललितपुर की सीमा में घुसने नहीं दिया जा रहा है। गोवा के मुख्यमंत्री ने तो 3 मई के बाद भी कर्नाटक और महाराष्ट्र से लगने वाली अपने राज्य की सीमाओं को बंद रखने का आग्रह केन्द्र सरकार से किया है। इस बीच हरियाणा सरकार ने दिल्ली से लगने वाली अपनी सीमाओं को सील करने का फैसला कर लिया है, जिसके कारण दिल्ली से गुड़गांव जाना भी अब आसान नहीं होगा। 

एक महीने से ज़्यादा वक्त से लागू सम्पूर्ण बंदी के चलते जब एक मोहल्ले से दूसरे मोहल्ले में जाने की इजाजत नहीं है, तब यही समझा जाना चाहिए कि एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश में आवागमन- वह भी अत्यंत सीमित, किन्हीं विशेष परिस्थितियों में ही हो रहा होगा। चोरी-छिपे सीमाएं पार करने वालों की बात और है। परिवहन के सभी साधन इस समय स्थगित हैं और सभी राज्यों और जिलों में आवाजाही के लिए बने कायदों पर कड़ाई से अमल भी हो रहा है, जिसकी वजह से लाखों लोग अपने घर-परिवार से दूर रहने को मजबूर हैं। वे अपने परिजन के अंतिम संस्कार तक के लिए नहीं जा पा रहे हैं।

ऐसे में इन राज्य सरकारों की अतिरिक्त सतर्कता कई सवाल खड़े करती है। क्या उनके पास दीवारें खड़ी करने और सड़केंखोद देने से बेहतर विकल्प नहीं हैं ?

क्या ये कदम किसी घबराहट में उठाए जा रहे हैं या इन राज्यों में सरकारी तंत्र अपनी संवेदनशीलता खो बैठा है? क्या राज्य सरकारों की ये कार्रवाईयां भारत के काश्मीर से कन्याकुमारी तक एक होने की अवधारणा को ध्वस्त नहीं कर रहीं हैं? क्या ये देश के संघीय ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचा रही हैं? और क्या यह सब इसलिए भी हो रहा है कि कोरोना से जूझने के लिए राज्यों को अकेला छोड़ दिया गया है?

यदि मान लिया जाए कि ये रोक-टोक, ये मनाही थोड़े समय के लिए ही है, तो क्या गारंटी है कि अगर कोरोना का संकट $खत्म न हुआ या लौटकर आया, या फिर लॉकडाउन की अवधि बढ़ी- जिसकी कि सिफारिश अधिकतर मुख्यमंत्रियों ने की है, तो ये प्रतिबंध राज्यों के बीच किसी विवाद का रूप नहीं धारण कर लेंगे? प्रदेशों की सीमा और पानी के बंटवारे के झगड़ों को सुलझाने में अब तक नाकाम रही केन्द्र सरकार – चाहे वह किसी भी दल की रही हो, क्या कोई नया सिरदर्द मोल लेना चाहेगी या फिर वह समय रहते राज्य सरकारों को जरूरी हिदायतें देगी.

(देशबन्धु)

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