अपने ही पहियों से टकरा कर पलटी ”रावलपिंडी एक्सप्रेस”: कट सकता है 70 लाख का चालान..

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गए थे नमाज बख्शवाने, रोजे गले पड़े। पूर्व पाकिस्तानी गेंदबाज शोएब अख्तर के साथ कुछ ऐसा ही होता दिख रहा है। शोएब ने अपनी ताजा किताब ‘कंट्रोवर्सियली योर्स’ को भारतीय क्रिकेट के भगवान कहलाने वाले बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर और भारतीय टीम की दीवार माने जाने वाले राहुल द्रविड़ को नीचा दिखा कर विवादों में लाने की कोशिश की, लेकिन अब इस किताब का विवाद उनके ही सिर पड़ने वाला है।

दरअसल शोएब ने इस किताब को अपने नाम के अनुरूप बना कर बेचने की योजना बनाई थी और इस जोश में अपनी ही टीम के सदस्यों की अनुशासनहीनता और बॉल टेम्पिरंग के बारे में टिप्पणी की थी, लेकिन पाकिस्तानी क्रिकेट अधिकारियों ने इस टिप्पणी को उन पर लगाए गए जुर्माने के सिलसिले में अदालती कार्रवाई के लिए सबूत बनाने की कोशिश शुरू कर दी है। शोएब पर अनुशासनहीनता और बॉल टेम्परिंग के मामले में 70 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था जिसके खिलाफ शोएब की अपील लाहौर उच्च न्यायालय में लंबित है। माना जा रहा है कि पाकिस्तानी अधिकारी शोएब के खिलाफ इस किताब का हवाला दे सकते हैं।

पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के कानूनी सलाहकार तुफैल रिजवी ने कहा है कि इस किताब के उद्धरण अदालत में पेश की जाएंगी। उन्होंने कहा कि एक रिट मामले में आपका अपना भी व्यवहार साफ सुथरा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शोएब ने अपनी आत्मकथा में माना है कि उन्होंने अनुशासन तोडा़ है। वह अब तक बेदाग नहीं हुए हैं इसलिए यह प्रसंग अब अदालत में इस्तेमाल किया जाएगा। उधर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) इस किताब को भारत-पाक क्रिकेट संबंधों के लिए नुकसानदेह बताते हुए आधिकारिक कार्रवाई की बात कह रहा है।

कभी रावलपिंडी एक्सप्रेस कहलाने वाले शोएब अख्तर को पाकिस्तान टीम से रुख्सत किया जा चुका है। लगता है कि सुर्खियों में बने रहने की शोएब की आदत ने ही उन्हें अपनी आत्म कथा में इस तरह की सतही बातों का जिक्र किया है। उन्होंने इस किताब में लिखा है कि सचिन तेंदुलकर उनकी गेंदों का सामना करने से डरते थे। यह बात अलग है कि भारत में एस किताब को एक जोक-बुक की तरह माना जा रहा है। हाल ही में नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा, यह दोनों देशों के क्रिकेट प्रेमियों को यह अच्छी तरह याद है कि मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर कई बार रावलपिंडी एक्सप्रेस को पटरी से उतार चुके हैं।

इसके अलावा शोएब ने अपनी इस किताब में आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स के फिल्मस्टार मालिक शाहरुख खान और आईपीएल के सीईओ ललित मोदी पर आईपीएल के दौरान धोखा देने के भी आरोप लगाए हैं। शोएब की उम्मीदों के विपरीत इस किताब के अच्छा व्यापार करने की संभावना नगण्य है।

शोएब ने यह किताब पत्रकार और लेखक अंशु डोगरा के साथ मिलकर लिखी है। उन्होंने इस आत्‍मकथा में कुबूल किया है कि वे मैदान में गेंद के साथ छेड़-छाड़ किया करते थे। इतना ही नहीं उनका तो यहां तक कहना है कि इस छेड़-छाड़ तो कानूनी तौर पर मान्यता भी दे देनी चाहिए। इस किताब में शोएब ने पीसीबी, परवेज मुशर्रफ, वसीम अकरम, जावेद मियांदाद समेत कई नामी-गिरामी हस्तियों पर निशाना साधा है।

शोएब का कहना है कि वे रिटायरमेंट के बाद काफी शांति महसूस कर रहा हैं। इन दिनों वे अपने बूढ़े माता-पिता की सेवा में व्यस्त हैं। आत्मकथा के बारे में उनका कहना है, ”मैंने जो लिखा है वह मेरा अनुभव है। इसमें जो कुछ भी है वह सच है, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह विवाद का कारण हो सकता है।” लेकिन वो शायद भूल गए हैं कि ज्यादा समझदारी दिखाना कई बार इंसान को दुनिया के सामने मूर्ख ही साबित कर देता है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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