लोग उनके मुरीद थे और वे भारत पर निसार !

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-नारायण बारेठ।।

भारत के बारे में उनके शब्द अब भी इंसानी दिलो की वादियों में गूंजते रहते है। मार्क ट्वेन कोई 123 साल पहले भारत आये और लौट कर दुनिया से कहा ‘ भारत मानव प्रजाति का पालना है ‘। पिछले हफ्ते ही ट्वेन को उनकी पुण्य तिथि पर याद किया गया। मार्क ट्वेन की भारत यात्रा से तीन साल पहले अमेरिका की धर्म संसंद में स्वामी विवेकानंद ने संसार को भारत की विराटता से परिचित करवाया। मार्क खुद अमेरिका से थे।

भारत में विचरण के बाद ट्वेन ने इस धरती को कुछ यूँ वर्णित किया ‘ -भारत ! सैंकड़ो बोलिया ,हजार राष्ट्र राज्य , हजार धर्म और दो मिलियन देवी देवता ,मानव प्रजाति का पालना , वाणी का जन्म स्थान ,इतिहास की जननी , पौराणिक कथाओ की दादी मां ,परम्पराओ की परदादी ,वो सरजमीं जिसे दुनिया हमेशा देखना चाहती है ‘ ! मार्क ट्वेन एक पत्रकार ,प्रकाशक ,लेखक और इन सबसे ऊपर प्रभावी वक्ता थे। लोग ट्वेन को सुनंने को लालायित रहते थे। वे जीवन में हास्य को बहुत महत्व देते थे। कहते थे ‘ हास्य विनोद मानवता के लिए बड़ी नियामत है। अमेरिका में उन्हें साहित्य का पितामह कहा जाता है।

मार्क ट्वेन के शब्दों की गलियों से गुजरो तो ऐसे लगता है जैसे अभी अभी वे भारत से गुजरे हो। उनके कथन आज भी उतने ही प्रासंगिक है ,जितने उस दौर में रहे होंगे। जैसे ‘ शास्त्रीय पुस्तके वो होती है जिनकी लोग प्रसंशा करते है लेकिन पढ़ते नहीं है।
उनके कुछ उद्धरण Quotes बहुत उपयोगी है –
1 – इंसान ही एक ऐसा प्राणी है जो शर्मिंदा होता है या जिसे शर्मिंदा होने की जरूरत पड़ती है।
2 – करुणा वो भाषा है जिसे बहरे भी सुन सकते है और नेत्रहीन देख सकते है।
3 – मूर्खो के साथ कभी भी बहस में मत उलझो ,वे आपको अपने स्तर तक ले जायेंगे और फिर अपने अनुभव से आपको ढेर कर देंगे।
4 – यह ईश्वर की मेहरबानी है कि हमारे देश में तीन अहम् चीजे उपलब्ध है – भाषण की आज़ादी ,अंतर् आत्मा की आज़ादी और इनमे से किसी का भी इस्तेमाल न करने का विवेक।
5 – जीवन तब अधिक खुशहाल होता जब हम अस्सी साल के पैदा होते और धीरे धीरे 18 की तरफ जाते।
6 – जब आप खुद को बहुमत के साथ खड़ा पाए तो समझ लो अब थोड़ा रुक कर सोचने का समय है /
7 – बोल कर सारा संदेह खत्म कर देने से तो अच्छा है चुप रहे। भले है लोग आपको बेवकूफ समझे।
8 – अगर आप किसी भूख से व्याकुल कुत्ते को रोटी खिला कर पोषित करते हो ,वो आपको कभी नहीं काटेगा। यही आदमी और कुत्ते में बुनियादी फर्क है।
9 -चाहे आप लिबास कैसा हो इसकी परवाह न करे पर आत्मा साफ़ रखे। 10 -पैसे की तंगी सभी समस्याओ की जड़ है।
मार्क ट्वेन 1896 में अपने परिवार के साथ भारत आये और तीन माह तक रहे।मार्क ट्वेन ने मुंबई ,आगरा पुणे ,बनारस,कलकत्ता ,दार्जिलिंग ,इलाहबाद और जयुपर जैसे कई शहरो की यात्रा की। बनारस में कम वक्त रुके मगर यही उन्हें भारत के आध्यत्मिक पक्ष से रुबरु होने का मौका मिला। बनारस में ट्वेन की मुलाकत स्वामी भास्करानंद सरवस्ती से हुई। दोनों ने अपनी अपनी किताबो का आदान प्रदान किया और विभिन्न मुद्दों पर बात की। ट्वेन फरवरी में किसी समय जयपुर आये। उन दिनों जयपुर Jeypore था। वे यहाँ केसर ए हिन्द होटल में ठहरे। उन दिनों उनकी तबियत ठीक नहीं थी। लेकिन जयपुर की वास्तुकला ,मेले उत्स्व ,लोक जीवन और नागरिक सुविधाओं की बड़ी तारीफ की /

मार्क ट्वेन ने भारत की शान में बहुत कुछ कहा है। ट्वेन ने दुनिया से कहा यही वो धरती है जहाँ इंसान ने जबान सीखी [Birth Place of human speech । पर ट्वेन आज भारत आते तो न जाने लोगो की भाषा देख कर क्या सोचते ?

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