लंका मॉडल..

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-शशिकुमार सिंह।।

लंका जीतने के पश्चात् अयोध्या की गद्दी पर कैकेयी के साथ सुमित्रा ने भी अपने बेटों के लिए दावेदारी ठोंक दी. राम फिर जंगल चले गए और बन्दर अयोध्या में ही खेती-किसानी करने लगे. विभीषण के हृदय में सेवा-भाव उमड़ आया. उन्होंने अयोध्या में ही रुकने का निर्णय लिया.
विभीषण ने ओजस्वी वाणी में कहा, ”अयोध्यावासी मितरो ! मैं अयोध्या की सेवा करना चाहता हूँ. अभी तक यहाँ एक खड़ाऊँ सरकार चल रही थी, जो बड़े निर्णय नहीं ले पाती थी. अब मैं आ गया हूँ. अब अयोध्या को वंशवाद की नहीं अपितु लोकतंत्र की आवश्यकता है. निर्णय वोट से होगा. बन्दर, भालू और लंका के राक्षस बन्धु जिसे चुनेंगे वह राजा होगा.”
अयोध्या के बंदरो और भालुओं को भी लगा कि विभीषणजी ठीक कह रहे हैं. अब अयोध्या में लोकतंत्र की स्थापना होनी ही चाहिए. विभीषण ने लंका के राक्षसों को भी चुनाव प्रचार के लिए अयोध्या बुला लिया क्योंकि अब लंका अयोध्या का एक्सटेंशन है.इसलिए लंका के राक्षस भी मतदान कर सकेंगे.विभीषण ने सुग्रीव और हनुमान को भी रोक लिया.
उन्हें धमकाया, ”तुम दोनों यहीं रुको, नहीं तो हमारी लंका की सरकार किष्किन्धा पर कब्ज़ा कर लेगी.दोनों का कच्चा चिट्ठा मेरे पास है.और हनुमान सुनो ! ज्यादा उड़ो मत.तुम्हारे ऊपर लंका की अदालत में कई मामले लंबित हैं.”
बेचारे सुग्रीव और हनुमान दोनों अयोध्या में ही रुक गए.सुग्रीव ने चुनाव का सारा खर्च भी वहन करने की हामी भरी क्योंकि विभीषण ने राजा बनने पर सारा पैसा सूद समेत वापस करने का आश्वासन दिया.
अगले दिन अयोध्या में चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी गयी.अधिसूचना स्वयं विभीषण ने ही जारी की.शुभ मुहूर्त देखकर विभीषण, हनुमान, सुग्रीव और उनके चुने हुए बंदरों ने चुनाव प्रचार शुरू किया.चुनाव विभीषण के नेतृत्व में ही लड़े जाने का निर्णय लिया गया.अब विभीषण के चुने हुए बन्दर जाकर राम और उनके भाइयों का चरित्र हनन करते.बन्दर अयोध्यावासियों को विस्तार से बताते कि कैसे लक्ष्मण शूर्पणखा के साथ छेड़खानी कर रहे थे और राम ने भी उनका साथ दिया.विभीषण ने भगवान् राम की ससुराल मिथिला से शराब मंगवाई और बंदरों-भालुओं तथा सजातीय राक्षसों में बंटवा दी.विभीषण बंदरों के बच्चों को गोद में लेकर दुलारते.बन्दर के बच्चे भी खो-खो करके प्यार जताते.विभीषण बंदरों के बच्चों के साथ बिलकुल बन्दर हो जाते.बन्दरों के बच्चे ‘संग्राम बहुत भीषण होगा, हमारा राजा विभीषण होगा’ का नारा लगाते.लंका से आये राक्षस यह बताते कि राम और उनके भाइयों से भीषण संघर्ष की आवश्यकता पड़ेगी.अयोध्यावासियों को तैयार रहने की आवश्यकता है.विभीषण ने ‘लंका मॉडल’ अपनाने की घोषणा की.विभीषण ने बंदरों के साथ अलग से मीटिंग की.बंदरों से कहा, ”तुम्हें जंगल लौटने की कतई आवश्यकता नहीं.हमारी सरकार पलायन रोकने के लिए कटिबद्ध है.आप जमकर खेती-किसानी करिए.जो भी पैदावार होगी उसे राज्य खरीद लेगा.” बंदरों ने भी ‘संग्राम बहुत भीषण होगा, हमारा राजा विभीषण होगा’के गगनभेदी नारे लगाए.अत्यंत उत्साह से लबरेज बंदरों ने किसानी शुरू की और जमकर विभीषण का साथ दिया.विभीषण का राजतिलक हो गया.
सुग्रीव से आगामी चुनाव पर चर्चा करते हुए विभीषण को एक दिन एकाएक लगा कि अयोध्या कितनी पिछड़ी हुई है.हमारी लंका तो सोने की है.वहाँ कितनी रौनक रहती है.यहाँ भी हाईवे और मॉल होना चाहिए.विभीषण ने अयोध्या में डुगडुगी पिटवा दी, ”अयोध्या को लंका मॉडल की तर्ज़ पर विकसित करना है.बन्दर अपनी जमीन अयोध्या सरकार को सौंप दें.अयोध्या को मॉल और हाईवे तथा लंका को द्रुतगामी ट्रेन की आवश्यकता है.अभी प्रयोग के तौर पर लंका से किष्किन्धा तक द्रुतगामी ट्रेन शुरू की जायेगी.”
बंदरों ने सवाल किया,”हम बंदरों से आपने ढेर सारे वादे किये थे, उन वादों का क्या हुआ?”
विभीषण ने सवाल का जवाब सवाल से दिया,”तुम्हें क्या चाहिए, सभी बंदरों का क़र्ज़ माफ़ हुआ है जिसका प्रमाण पत्र भी तुम्हें प्रदान कर दिया गया है.क्यों नल मैं झूठ बोल रहा हूँ?”
”नहीं सर आप झूठ बोलते ही नहीं.ये देखिये प्रमाण पत्र.लोगों का एक-एक पैसा माफ़ हुआ है.आप तो ऋणमोचक हैं.इन बन्दरों को बरगलाया गया है.” नल ने आत्मविश्वास के साथ उत्तर दिया.

बन्दर बहकावे में नहीं आये.बंदरों ने अपनी मांगों के लिए आन्दोलन का रास्ता अपनाया.लोकतंत्र में यही सबसे अच्छा रास्ता होता है, जिस पर महाजन भी चलते हैं.बंदरों का कहना था कि विभीषण सरकार अपने वादे पूरे करे.विभीषण सरकार को लग रहा था कि उसने तो सारे वादे पूरे कर दिए हैं.अब ये बन्दर किस वादे की बात कर रहे हैं?लोकतंत्र का सबसे बड़ा लाभ यही है कि इसमें शासक और शासित दोनों को अपने अच्छे होने का मुगालता सदैव रहता है.बंदरों का आन्दोलन कई दिनों तक चलता रहा.वयोवृद्ध जामवंत ने भी इधर विभीषण का विरोध करना शुरू कर दिया था.विभीषण को बड़े भाई से तो डांट खाने की आदत थी.मगर जामवंत और तुच्छ बंदरों का विरोध उन्हें नागवार गुजरा.उन्होंने क्रोध में नथुने फड़फड़ाते हुए कहा, बंदरों की इतनी मजाल?बंदरों को तुरंत गिरफ्तार कर कारावास में डाला जाय.”
दारोगा नील सिंह ने कहा, ”हुज़ूर आपकी आज्ञा पालन में हम सदैव तत्पर हैं.बंदरों को गिरफ्तार कर कारागार में बंद कर दिया गया है.बंदरों को निर्वस्त्र कर हम उन पर थर्ड डिग्री का इस्तेमाल कर रहे हैं.”
”हाँ, उनसे कबूल करवाओ कि उन्हें किसने बरगलाया है?”
”हुज़ूर बन्दर मान नहीं रहे हैं.”
”उन पर बंदरनाशक औषधि का छिड़काव करो.”
”हुज़ूर सारे बन्दर मर जायेंगे.”
”कोई बात नहीं ‘लंका मॉडल’ में आने वाली बाधाओं से सख्ती से निबटा जाएगा.दो चार मरते हैं.मरने दो.गोलियों की परवाह मत करो.”
”जी हुज़ूर.”
”ये ऐसे नहीं मानेंगे.”
”इनको मनाने का उपाय है हमारे पास.मगर मैं कैसे सलाह दूं?”सुग्रीव ने कहा.
विभीषण बोले, ”अपना बहुमूल्य सुझाव दें सुग्रीवजी.आपकी ही पूंजी से यह सरकार बनी है.इसे आप अपनी ही सरकार समझें.”
”सरकार जो काम फूल से हो जाए उसके लिए गोली बर्बाद करने की क्या जरूरत है?इनकी रोजी-रोटी बंद करो.भूखे मरेंगे, अपना मूत पियेंगे तो होश ठिकाने आ जायेंगे.” सुग्रीव ने अपना बहुमूल्य सुझाव दिया.
”हम आपके विचारों का स्वागत करते हैं.हमारी सरकार इन्हें खुदकुशी में मदद करेगी.”विभीषण ने कहा.
”सरकार बन्दर मान ही नहीं रहे हैं.वे अपनी भूमि देने के लिए तैयार नहीं हैं.”दारोगा नील सिंह बोले.
”तो क्या मेरे ‘लंका मॉडल’ का स्वप्न अधूरा रह जाएगा?”विभीषण चिंतित मुद्रा में बोले.
”सरकार बन्दर भूमि नहीं छोड़ेंगे.हमें शीघ्र कुछ करना होगा.”दारोगा नील सिंह ने कहा.
विभीषण ने चिन्तन की मुद्रा में आँखें बंद कीं और धीरे से बोले,”ओह लगता है किसानों की खुदकुशी में राज्य के सहयोग का समय निकट आ गया.जाओ उसी भूमि में एक-एक बन्दर की समाधि बना दो.किसी तरह हमें ‘लंका मॉडल’को लागू करना है.”
”ठीक है सरकार.”कहकर दरोगा नील सिंह हड़बड़ी में निकल पड़े.
सभी बंदरों के भूमि-मोह को देखते हुये उन्हें उनकी भूमि में ही दफ़न कर दिया गया.अब वहाँ प्रतिवर्ष मेले के आयोजन का निर्णय विभीषण सरकार ने लिया है.मेले के संचालन के लिए ‘बंदर हितकारिणी सभा’ का गठन किया गया है.सुग्रीव को इस सभा का अध्यक्ष सर्वसम्मति से चुन लिया गया है.सुग्रीव ने इन समाधियों पर ‘मरो'(माय अयोध्या रिकंस्ट्रक्शन आर्गेनाईजेशन)के टावर लगा दिये हैं.लंका से किष्किन्धा तक द्रुतगामी ट्रेन सेवा शुरू कर दी गयी है.सुग्रीव ने जितना धन विभीषण के चुनाव में खर्च किया था, विभीषण एक-एक पाई चुका रहे हैं.अयोध्या में ‘लंका मॉडल’को पूर्णतया सफल बताया जा रहा है.

(साभार: व्यंग्यदेश)

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