कदम-कदम पर मुल्क में हो गए हैं दो किस्म के कानून..

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-सुनील कुमार||
सोच छुपती नहीं है। कल ही इसी जगह हमने लिखा था कि किस तरह देश में करोड़ों गरीबों को बेघर, बेसहारा, बेरोजगार छोड़कर भाजपा के बड़े-बड़े नेता अपने राज्यों में ले गए। नरसिम्हा राव नाम के भाजपा के बड़े नेता-सांसद उत्तर भारत में फंसे अपने तीर्थ यात्रियों को अपने आंध्र-तेलंगाना ले गए, उत्तरप्रदेश से योगी अपने प्रदेश के बच्चों को राजस्थान के कोटा से महंगी कोचिंग के बीच से निकलकर ले गए, और सबसे पहले तो उत्तराखंड में फंसे गुजरात के तीर्थयात्रियों को गुजरात भेजा गया था। गरीब और अमीर के बीच एक सरकारी खाई है। दूसरे देशों में बसे संपन्न हिन्दुस्तानियों के लिए मुफ्त का हवाई जहाज, और देश के मेहनतकश मजूरों के लिए सड़कों पर भूखे पेट पर लाठियां !

अब मानो वही काफी नहीं था, देश की छोटी-बड़ी दूकानें लॉकडाउन में बंद ही रहेंगी, लेकिन लोग जरूरी सामानों की ऑनलाइन खरीदी कर सकेंगे। कल तो मोदी सरकार का हुक्म ऑनलाइन सब कुछ खरीदने की छूट वाला था, भारी विरोध के बाद अब ऑनलाइन खरीदी सिर्फ जरूरी चीजों की हो सकेगी। लेकिन मजदूर किसके सामने विरोध करे ? उसके पास तो चैम्बर ऑफ कॉमर्स या कैट जैसी कोई संस्था है नहीं, इसलिए उसे भूख खत्म करने का सामान ऑनलाइन ही बुलाना होगा, शायद रोजगार भी ऑनलाइन आ जायेगा। मजदूर की औकात आज सिर्फ जहर खरीदने जितनी रह गई है।

देश के भीतर सम्पन्नता के आधार पर भेद-भाव बढ़ते ही चल रहा है। कर्नाटक में भूतपूर्व प्रधानमंत्री और भूतपूर्व मुख्यमंत्री के परिवार की शादी तमाम नियमों को तोड़कर हुई, उसमें भाजपा के मौजूदा मुख्यमंत्री भी शरीक हुए, और भीड़ भरी तस्वीरों के बाद भी कह दिया कि इस मुद्दे पर किसी बात की जरूरत नहीं है। उधर गुजरात के एक मंदिर में हुई शादी में पुलिस ने दूल्हा-दुल्हन, परिवार, पंडितों, 14 लोगों को गिरफ्तार कर लिया, क्योंकि वे मामूली लोग थे। पहले लॉकडाउन की वजह से एक बार शादी आगे बढ़ी थी, फिर लॉकडाउन बढ़ गया तो थककर मंदिर में शादी कर रहे थे।

उत्तर भारत की एक तस्वीर है कि एक बूढ़ा रिक्शा चला रहा है, और पुलिस के सामने गिड़गिड़ा रहा है कि उसके चक्के की हवा ना खोलें, वह भूख से मर जायेगा। अनगिनत शहरों के वीडियो हैं कि किस तरह पुलिस और बाकी अफसर सब्जी वालों के ठेले पलट रहे हैं, लात मारकर सब्जियां गिरा रहे हैं। दूसरी तरफ महाराष्ट्र सरकार की खबर है कि एक कुख्यात खरबपति कारोबारी के कुनबे के 32 लोगों को महाराष्ट्र के एक हिल स्टेशन के अपने रिसोर्ट तक जाने के लिए एक आईपीएस अफसर इजाजत देता है, और खुद सरकार को अफसर के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ती है। इसी महाराष्ट्र में सब्जी वाले पुलिस की लातें खा रहे हैं, सब्जी गँवा रहे हैं। किसी कार वाले को पीटने की एक भी तस्वीर किसी ने देखी है?

इस देश में इसके पहले गरीब की ऐसी मौत थी?

(दैनिक ‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय, 19 अप्रैल 2020}

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