Home मीडिया कोरोना के नाम पर पत्रकारों के वेतन में जबरदस्त कटौती..

कोरोना के नाम पर पत्रकारों के वेतन में जबरदस्त कटौती..

जनता की भावना को एनकैश कर लोगों को बेरहमी से लूट रहे है मीडिया हाउस.

-महेश झालानी।।

अखबार वाले “सही खबर” परोसने के नाम पर जनता की झूठी वाहवाही लूट रहे है । लेकिन ये जनता को किस तरह मूर्ख बना रहे है, इसकी बानगी यह है कि 24 पेज वाले अखबार के बदले में केवल दस पेज ही दिए जा रहे है । जबकि ग्राहकों से पैसे पूरे लिए जा रहे है । क्या यह उपभोक्ताओं के नाम पर सरेआम लूटपाट नही है ? सरकार खामोश क्यो है, इसका तफसील से जवाब देना चाहिए । दरअसल मीडिया की आजादी के नाम पर अखबार नवीसों को लूटने का लाइसेंस हासिल है ।

अपने आपको महामारी के इस दौर में तथाकथित “भगवान” घोषित करने वाले अखबार कोरोना की सहायतार्थ जनता से तो पैसा उगाह रहे है, गांठ से खुद एक पैसा नही दे रहे है । जनता की भावना को इनकैश करने का इससे बड़ा और कोई धंधा हो ही नही सकता । कई “भगवानों” ने तो कोरोना के नाम पर पेज तो कम कर ही दिए है, इसके अलावा वेतन-भत्तो में भी जबरदस्त कटौती करदी है । दूसरों को न्याय दिलाने का दम्भ भरने वाले अखबारनवीस इस अन्याय के खिलाफ आंसू तो बहा सकते है, लेकिन आवाज उठाने की हिम्मत नही जुटा पा रहे है । भगवान इतने दयालु है तो इनको अपने यहां मौत या तीये की बैठक के विज्ञापनों का कोई शुल्क नही लेना चाहिए । क्या अखबारों का कोई सामाजिक उत्तरदायित्व नही है ? है तो फिर दो साल तक मृत्यु और श्रद्धांजलि आदि के लिए कोई राशि नही लेनी चाहिए ।

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