Corona: हॉकरों की स्क्रीनिंग क्यों नही ?

Desk

अखबार मालिक बेवकूफ बना रहे है हॉकरों को..

-महेश झालानी।।

माना कि अखबार बांटने वाले हॉकर कोरोना के खिलाफ लड़ाई वीरयोद्धाओ की तरह जंग कर रहे है । जंग से लड़ना इनका बुनियादी कर्तव्य है । सर्दी हो बरसात, गर्मी हो या कर्फ्यू ये अपनी ड्यूटी को बखूबी अंजाम देते आये है । इनको अब क्यों हीरो की तरह पेश किया जा रहा है, इनको समझना होगा वरना पेशेवर लोग इनको इस्तेमाल कर अपना उल्लू सीधा करते रहेंगे ।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रदेश भर के हॉकरों की स्क्रीनिंग क्यों नही ? इनको वरदान नही मिला हुआ है कि ये कोरोना से संक्रमित नही हो सकते है । जब पिज्जा डिलीवर करने वाला संक्रमित होकर वायरस की “डिलीवरी” की डिलीवरी कर सकता है तो हॉकर अछूते कैसे रह सकते है ? भगवान ने वरदान नही दे रखा है कि इनको कोरोना नही होगा ।

चूँकि हॉकरों की आज तक स्क्रीनिंग हुई नही है, इसलिए किसी को पता नही है कि इनमें से कितने संक्रमित है और कितनों को इन्होंने कोरोना परोस दिया है । सरकार को चाहिए कि “वीरयोद्धा” हॉकरों की अविलम्ब सामूहिक स्क्रीनिंग की जाए ताकि वास्तविकता सामने आ सके ।

हकीकत यह है कि अखबार मालिक बेचारे हॉकरों को गुमराह करते हुए सीढ़ी की तरह इस्तेमाल कर रहे है । मालिकों को हॉकरों से कोई सहानुभूति नही है । सहानूभूति है तो केवल अपने बिजनेस से । मालिक लोग यह बखूबी जानते है कि एक भी हॉकर कोरोना पॉजिटिव पाया गया तो उनका धंधा चौपट होना स्वाभाविक है । इसलिए हॉकरों को गुमराह कर मालिक लोग इनके जीवन से खिलवाड़ कर रहे है । इसीलिए वीर योद्धा का खिताब देकर रोज छापी जा रही है इनकी फ़ोटो । ताकि ये भरम में जीते हुए मालिकों की तिजोरियां भर सके ।

आज जो अखबार वाले अपना उल्लू सीधा करने के लिए उनकी फोटो छाप कर सूली पर चढ़ा रहे है । भगवान ना करें कोई कोरोना से पीड़ित हो जाये तो ये अखबार वाले योद्धाओं को पहचानने से भी इंकार कर देंगे । हॉकरों को चाहिए कि गलतफहमी का गमछा उतारकर धरातल पर आए और कराए अपनी स्क्रिनिंग । वरना इतनी देर हो चुकी होगी कि भगवान भी बाद में हाथ खड़े कर देगा ।

अखबार वाले हॉकरों को वीर योद्धा मानते है । इस बात का रोज जोर जोर से ढिंढोरा भी पीटा जा रहा है । इनकी सहानुभूति के लिए टसुए भी बहाए जा रहे है तो फिर इन बेचारे को जीवन और स्वास्थ्य बीमा क्यों नही ? हॉकर यूनियन को चाहिए कि वे अविलम्ब अखबार मालिकों से न्यूनतम 50 लाख का जीवन बीमा तथा 10 लाख का मेडिक्लेम (कैशलेस) अविलम्ब कराए । लॉक डाउन समाप्त होने के बाद जो लोग फ़ोटो छापकर सूली पर चढ़ा रहे है, पहचानने से भी इंकार कर देंगे । सरकार को भी इनके कल्याण के बारे में कोई युक्ति निकालनी चाहिए ।

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