राहुल की सही सलाह मान लेने में हर्ज़ क्या है?

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रोजाना खबरें आ रही हैं कि देश और दुनिया में कोरोना का खतरा बढ़ता जा रहा है। साल 2020 का चौथा महीना आधे से अधिक बीत चुका है और लगभग इतना ही वक्त कोरोना के वैश्विक प्रसार को हो चुका है। पूरी दुनिया में वैज्ञानिक इसकी दवा या वैक्सीन के निर्माण में लगे हुए हैं, मगर अब तक कोई खास सफलता नजर नहीं आ रही, इसका अर्थ यही है कि कम से कम ये पूरा साल कोरोना के डर के साए में ही बीतने वाला है। इसके संक्रमण को रोकने का फिलहाल एक ही तरीका नजर आ रहा है, संपूर्णबंदी। चीन, अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, आस्ट्रेलिया ऐसे तमाम देशों ने अलग-अलग अवधि का लॉकडाउन किया है और भारत में भी इसका दूसरा चरण शुरु हो चुका है।

पहला चरण 21 दिनों का था, जिसमें उम्मीद थी कि कोरोना फैलाव की श्रृंखला टूटेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, बल्कि मामले और बढ़ गए। जहां मार्च की शुरुआत में आंकड़ा दहाई में था, अब 10 हजार को पार कर चुका है। लॉकडाउन के कारण जो अन्य दिक्कतें देश के सामने पेश आ रही हैं, उनसे पार पाना भी एक बड़ी चुनौती बन गई है। अलग-अलग विशेषज्ञ इस बारे में सुझाव दे रहे हैं, विपक्ष भी अपनी ओर से मोदी सरकार को लगातार सलाह दे रहा है और जो गलत हो रहा है, उसकी आलोचना भी कर रहा है। यह देखना सुखद है कि पिछले छह सालों में जिस विपक्ष को एकदम अप्रासंगिक बना दिया गया था, अब उसकी बातों को भी मीडिया में जगह मिल रही है और जनता तक उसकी बातें पहुंच रही हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कुछ समय पहले ही विपक्ष के नेताओं से चर्चा की थी, फिर सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से विमर्श किया। वे विपक्ष से लगातार सुझाव मांग भी रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पहले ही केंद्र सरकार को पत्र के जरिए अपनी राय से अवगत करा चुकी है। और अब राहुल गांधी ने कुछ महत्वपूर्ण बातें कोरोना के कारण उपजे संकट से निपटने के लिए कही हैं, जिन पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। 

गुरुवार को लाइव वीडियो प्रेस कांफ्रेंस में राहुल गांधी ने मुख्यत: तीन बातों पर सरकार का ध्यान दिलाया, कोरोना के संक्रमण को रोकने के उपाय, गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने की जरूरत और प्रवासी मजदूरों के लिए राहत के कदम। राहुल गांधी ने अधिक से अधिक टेस्टिंग की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि लॉकडाउन से समस्या केवल कुछ देर के लिए टलेगी, लॉकडाउन खत्म होते ही वायरस अपना काम करने लगेगा। इसलिए इस समय का उपयोग बड़े पैमाने पर टेस्टिंग के लिए करना चाहिए, टेस्ट नहीं किए तो लॉकडाउन खत्म होने के बाद फिर उसी हालत में पहुंचने का खतरा है। देश पर वित्तीय दबाव बढ़ने के बारे में आगाह करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को पहले से इसके लिए तैयारी रखनी चाहिए। किसानों को संरक्षण की जरूरत है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को संरक्षण की जरूरत है।

उन्होंने सरकार को सलाह दी है कि अपनी 100 क्षमताओं को अभी मत झोंकिए। अगर अभी झोंक दिया और 3 महीने तक स्थिति नहीं सुधरी तब हालात खराब हो जाएंगे। राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रवासी मजदूरों की लॉकडाउन के दौरान बदहाली पर सरकार से कहा कि दुनिया में भारत के अलावा कोई ऐसा देश नहीं है, जिसने इतने ज्यादा प्रवासी मजदूरों के बावजूद लॉकडाउन किया। आपको मुख्यमंत्रियों को और ज्यादा अधिकार देने की जरूरत है। केंद्र को मेन नैशनल सिस्टम को कंट्रोल करने की जरूरत है लेकिन राज्यों को अपने क्षेत्रों को लेकर फैसला लेने का अधिकार होना चाहिए।  इसी के साथ राहुल गांधी ने खाद्य क्षेत्र को मजबूत करने की सरकार से अपील की। उन्होंने कहा कि गोदाम भरे पड़े हैं लेकिन गरीबों के पास खाने को नहीं है।

गरीबों तक अनाज दीजिए। जिनके पास राशनकार्ड नहीं हैं, उन्हें भी राशन दीजिए। न्याय योजना को अपनाइए और गरीबों के खाते में सीधे पैसे भेजिए। राहुल गांधी की इन तमाम बातों और सुझावों में खास बात ये है कि उन्होंने इसे आलोचना न मानने का आग्रह किया है। उनके दिए सुझावों में ऐसी कोई बात नहीं है, जिसे नकारा जा सके। अब देखना ये है कि मोदी सरकार इस बार उनकी बातों को सुनती है या नहीं। वैसे नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन, अभिजीत बनर्जी और उनके साथ आरबीआई के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन ने सरकार को इसी तरह के सुझाव दिए हैं और खासकर दो बातों पर खास ध्यान देने कहा है, पहला लॉकडाउन बढ़ने की इस स्थिति में सरकार गरीबों तक अधिक से अधिक धनराशि पहुंचाएं और दूसरा गोदामों में जमा अनाज को सही हितग्राहियों तक पहुंचाएं, केवल चुनिंदा लोगों तक नहीं, बल्कि उन तमाम लोगों तक खाद्य सुरक्षा पहुंचे जो मौजूदा हालात के कारण गरीबी रेखा के नीचे जाने के खतरे में पहुंच गए हैं।

 एक लेख में अर्थशास्त्रियों की इस त्रयी ने लिखा कि आजीविका के छिन जाने और आपूर्ति श्रृंखला में बाधा होने से बड़ी संख्या में लोगों के गरीब होने और भुखमरी की हालत में पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। भूख से मरते लोगों के पास खोने के लिए कुछ नहीं रहता।  इस वक्त उन लोगों को यह भरोसा दिलाना होगा कि समाज उनकी फिक्र करता है और उनके न्यूनतम हितों की रक्षा होगी। 

हालांकि सरकार ने राज्यों को एफसीआई के गोदामों से ऋण पर अनाज उठाने की छूट दी है। लेकिन सभी जरूरतमंदों के पास राशन कार्ड नहीं है, इसलिए इन तीनों अर्थशास्त्रियों का सुझाव है कि सरकार अभी टेम्पररी राशन कार्ड जारी करे, ताकि कोई भी सब्सिडी वाले अनाज की सुविधा लेने से वंचित न रह जाए। मोदी सरकार को इस संकट की घड़ी में विश्व के श्रेष्ठ अर्थशास्त्रियों से सुझाव मिल रहे हैं, साथ ही विपक्ष भी रचनात्मक तरीके से अपना सहयोग कर रहा है, ताकि संकट का सामना करने में मदद हो। इस कठिन समय में मोदीजी अगर इन सुझावों को अपनाते हैं तो उनके पास अपनी सरकार को लोककल्याण की कसौटी पर परखने और लोगों के अपने ऊपर जतलाए गए भरोसे को सही साबित करने का सुनहरा मौका है। मोदीजी को यह मौका चूकना नहीं चाहिए।

(देशबन्धु)

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