सरकार, जासूसी, ऐप्प और सॉफ्टवेयर

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-संजय कुमार सिंह।।

कोरोना से लड़ने के लिए जो होना चाहिए वह सब कितना-कैसे हो रहा है ये तो राम जानें उसके नाम पर आरोग्य सेतु का खूब प्रचार हो रहा है। पूरी तरकार धन-मन धन से उसका प्रचार कर रही है। अगर यह जरूरी या उपयोगी है तो अपने आप चर्चा में आएगा। इतनी जबरदस्ती क्यों? वैसे भी, सरकार कोरोना जैसी महामारी में भी जनता के लिए क्या कर रही है यह नहीं बता कर उसे जनता से सिर्फ अपेक्षाएं हैं। फोन से जासूसी हो सकती है। सरकार ने अभी तक यह नहीं बताया है कि कुख्यात इजराइली सॉफ्टवेयर पेगासस उसने खरीदा है या नहीं।

इसके बारे में कहा जा चुका है कि उसे सरकारें ही खरीद सकती हैं और भारत में कुछ लोगों को उनके शुभचिन्तकों ने बताया है कि उनके फोन में पेगासस लगाया जा चुका है। भीमा कोरेगाँव मामले में एनआईए के समक्ष समर्पण करने वाले प्रो. आनंद तेलतुम्‍बडे ने लिखा है कि उन्हें भी किसी ने बताया कि उनके फोन में पेगासस सॉफ्टवेयर इंसटाल किया जा चुका है। मतलब यह कि सरकार जनता के पैसे से जनता की जासूसी कर रही है। अब कोरोना के नाम पर जो ऐप्प प्रचारित किया जा रहा है उसे हैक किया जा सकता है। उसका डाटा सुरक्षित नहीं है यह कई जानकार कह चुके हैं। सरकार कोई स्पष्टीकरण देने या जनता को भरोसे में लेने की बजाय उसका सिर्फ प्रचार कर रही है।

दूसरी ओर, सेना ने इसके उपयोग पर सावधानी बरतने की सलाह दी है। क्या यह शर्मनाक नहीं है कि सरकार जिसका प्रचार कर रही है सेना उससे सतर्क कर रही है। कहने के लिए कहा जा सकता है कि सेना ने ऑपरेशनल एरिया के लिए ही सतर्क किया है पर जो सैनिक ऑपरेशनल एरिया में नहीं है और वह इस ऐप्प के साथ गलती से ऑपरेशनल एरिया में चला जाए तो नुकसान देश का होगा। आप सजा देने के लिए बलि का बकरा भले ढूंढ़ लेंगे पर देश का नुकसान तो उस सॉफ्टवेयर से होगा जिसका प्रचार देश के प्रधानमंत्री और दूसरे मंत्री कर रहे हैं। क्या इसे ठोक-पीट कर ठीक नहीं किया जा सकता है? और जब सुरक्षित नहीं है तो पूरा प्रतिबंध क्यों नहीं।

इस सॉफ्टवेयर से कितना खतरा हो सकता है इसका अंदाजा इससे भी चलता है कि सैनिकों से कहा गया है कि वे अपने कांटैक्ट लिस्ट में दूसरे अधिकारियों का रैंक न सेव करें और सुनिश्चित करें कि उसमें एंटी वायरस है। अव्वल तो एंटी वायरस एक अलग खर्चा है और फोन में नंबर या रैंक नहीं सेव कर पाना अपने आप में परेशानी है। यह सब परेशानी वह सैनिक क्यों उठाए जिसे कोरोना नहीं है या होने पर कुछ दिन में ठीक हो जाना है या स्वर्ग सिधार जाना है। आखिर इसका महत्व या इसकी जरूरत कौन बताएगा। सिर्फ प्रचार करके भोलेभाले देशवासियों को जासूसी के जाल में फंसाना क्या उचित है?

About Post Author

Sanjaya Kumar Singh

छपरा के संजय कुमार सिंह जमशेदपुर होते हुए एनसीआर में रहते हैं। 1987 से 2002 तक जनसत्ता में रहे और अब भिन्न भाषाओं में अनुवाद करने वाली फर्म, अनुवाद कम्युनिकेशन (www.anuvaadcommunication.com) के संस्थापक हैं। संजय की दो किताबें हैं, ‘पत्रकारिता : जो मैंने देखा जाना समझा’ और ’जीएसटी – 100 झंझट’।
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