असली स्यापा तो तीन माह बाद मनेगा..

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जनाजा निकलने वाला है अर्थव्यवस्था का..

-महेश झालानी।।

बिजली के बिल, पानी के बिल, ईएमआई तथा स्कूल/कॉलेज की फीस तीन माह स्थगित कर सरकार ने जनता को तात्कालिक राहत तो प्रदान करदी है । लेकिन सवाल यह उत्पन्न होता है कि तीन माह बाद जनता के पास पैसा आएगा कहाँ से जिससे वह इन सबका चुकारा कर देगी ।

सारे उद्योग धंधे ठप्प पड़े है । दुकानों के ताले लगे हुए है । कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है । दिहाड़ी मजदूर जो पलायन कर गए है, वापसी के लिए उनके पास पैसे नही । ऐसे में वे वापिस आएंगे तो आएंगे कैसे ? मजदूरों को किराने, मकान किराए और दूध आदि का भुगतान भी करना है । इन हालातों में किसी के पास अल्लादीन का चिराग हाथ लगने वाला नही कि घिसा और चुका दिया पैसा ।

अभी कोरोना से लड़ाई लड़नी है । लेकिन कोरोना से बड़ी लड़ाई तो आगे लड़नी है । सारी अर्थव्यवस्था ठप्प होने वाली है । उत्पादन पैंदे बैठेगा । हालत 2008 से भी बदतर होने वाली है । इसलिए शुल्क या किश्त स्थगित होने पर खुश होने की नही, स्यापा मनाने की जरूरत है ।

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