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सरकार का भरोसा छोड़िए, अपना बचाव खुद कीजिए..

Sanjaya Kumar Singh
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-संजय कुमार सिंह।।


कोरोना संक्रमितों की संख्या कल, 6 अप्रैल को एक दिन में 700 बढ़ गई। वैसे तो यह चिन्ताजनक है पर अनजाना नहीं है। कोरोना का मामला चीन से शुरू हुआ था। चीन ने तभी कार्रवाई शुरू कर दी, वहां स्थिति संभल चुकी है। दूसरे कई देश अभी उसकी चपेट में हैं और भारत में अब यह मामला गंभीर होता लग रहा है। कायदे से शुरू में ही चीन से और बाद में कोविड प्रभावित देशों से आने वालों को रोक दिया जाता, आने के बाद उनके या सरकार के खर्च पर क्वारंटाइन कर दिया जाता तो यह स्थिति नहीं होती। हमारे यहां ठप्पा लगाकर छोड़ दिया गया। वे अलग रह नहीं सकते थे, उन्हें गंभीरता मालूम नहीं थी, बीमारी फैलती रही। दूसरी ओर, सरकार ने अगर क्वारंटाइन करने का काम गंभीरता से नहीं किया तो मास्क और पीपीई के ऑर्डर दे दिए जाने थे, क्वारंटाइन सेंटर बनाना शुरू कर देना चाहिए था पर वह भी पता नहीं कितना कब हुआ।
अखबार की खबर के अनुसार, पश्चिम बंगाल में होटलों ने ऐसे केंद्र बनाए हैं और अगर आपको अलग-थलग रहना है तो आप वहां रह सकते हैं। मध्यमवर्गीय लोगों के लिए यह मुश्किल नहीं है। गरीबों के लिए सारी व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए क्योंकि वे अपने स्तर पर ऐसा नहीं कर सकते हैं। वह नहीं हो रहा है, अपर्याप्त है। मोट तौर पर कोरोना के मामले में भारत, अमेरिका से एक महीने पीछे है। अमेरिका में भी अभी पूरी संख्या में जांच नहीं हो रही है, पीपीई नहीं हैं और इस महामारी से निपटने की कोई योजना नहीं है। भारत में एक महीने में क्या कुछ हो सकेगा आप समझ सकते हैं। दूसरी ओर आबादी ज्यादा होने के कारण यहां पीड़ितों या प्रभावितों की संख्या बहुत ज्यादा होगी। यहां जांच की दर कम है इसलिए मामले कम सामने आ रहे हैं और यही खतरनाक है।
एक खबर दिखी कि अकेले बिहार में 1.5 लाख प्रवासी पहुंचे हैं जो अलग नहीं रह रहे हैं। अव्वल तो उनमें लक्षण नहीं हैं, जांच हो नहीं सकती इसलिए वे समझ रहे होंगे कि वे सक्रमित नहीं हैं। पर उनमें से कोई संक्रमित हुआ तो साथ रहने वाले सभी लोगों के संक्रमित होने का खतरा है। दिल्ली में तबलीगी वालों के साथ यही हुआ। अगर उनमें कोई संक्रमित नहीं होता तो उनके साथ रहने से बीमारी नहीं फैलती। इसलिए, बचने के लिए सरकारी इंतजाम के भरोसे मत रहिए। संक्रमित होने की जांच का इंतजार मत कीजिए। अगर आप किसी संक्रमित या कोरोना प्रभावित देश से लौटे या महानगरों से लौटे किसी संक्रमित के संपर्क में आए हैं, कोविड के लक्षण हैं तो तुंरत अलग रहना शुरू कर दीजिए। यह आपके, आपके परिवार के और समाज के हित में है। दवा, इलाज और सुविधा की बात तो बहुत बाद की है। अगर पीड़ित होने की जरा भी आशंका और लक्षण वाले अलग रहने लगें तो यह बीमारी नहीं / कम फैलेगी।
लॉक डाउन का मकसद यही है। छोटे घरों में रहने वाले एक कमरे में कई लोग रहने की स्थिति में यह संभव नहीं है। फिर भी, अपने और अपने साथ वालों के हित में यह जरूरी है कि जरा सी भी आशंका पर आप अलग हो जाएं अपने साथी को अलग करने की व्यवस्था करें। यह काम साथी का अकेला नहीं आप सबका है। इसलिए उसे जल्दी शुरू कर दीजिए। कायदे से जांच भी होनी चाहिए। पर सुविधा नहीं है, जांच महंगी है। ऐसे में जांच की स्थिति ही न आए आप अलग रहना शुरू कर दीजिए। यह काम छोटे होटलों / लॉज वालों को शुरू करना चाहिए। अगर बंद हैं तो स्थानीय प्रशासन, समाज सेवियों से कहिए। जो पैसे दे सकते हैं उनसे लेकर और जो नहीं दे सकते हैं उन्हें मुफ्त में यह सुविधा दी जानी चाहिए। अगर संक्रमित लोग अलग रहेंगे तो यह बीमारी नहीं फैलेगी पर एक दिन में 700 मामले मिलने से लग रहा है कि ऐसा नहीं हो रहा है। दूसरी ओर, हम और हमारा मीडिया तबलीगी जमात को गाली देने में लगा है। वह इलाज नहीं है। अगर कोई गलती कर रहा है तो आप उससे बचने का उपाय करेंगे, उसे रोकने के उपाय करेंगे पर उस दोषी ठहराते रहने या उसे अपराधी बताने से कोरोना का फैलना नहीं रुकेगा।
इसलिए साथ-साथ अपना बचाव करना भी जरूरी है। जब अमेरिका में सुविधाएं पूरी नहीं हैं तो भारत में हो सकती हैं यह उम्मीद करना भी ज्यादा है। हर कोई इस महामारी से निपटने के लिए सरकार से सहयोग कर रहा है। जिसके पास पैसे हैं वह पैसे दे रहा है, जो श्रम कर सकता है वह श्रम कर रहा है आप सिर्फ अलग रहकर या पीड़ित के अलग रहने की व्यवस्था करके बड़ा काम कर सकते हैं। यही कीजिए। एक सामान्य खाते-पीते स्वस्थ लेकिन संक्रमित होने की आशंका वाले व्यक्ति को अलग रखने की व्यवस्था करना बहुत मुश्किल नहीं है। ताली थाली बजाने या दीया जलाने की अपील की जगह ऐसी अपील की गई होती तो कइयों ने कर भी दी होती। अभी यही व्यवस्था नहीं हुई है। जब हजारों वेंटीलेटर की आवश्यकता होगी तो कहां से आएंगे। दुनिया भर में इसकी जरूरत है, उतना बनता ही नहीं है जितने की मांग है। इसलिए अलग रहना शुरू कर दीजिए। उसी की व्यवस्था जरूरी है। जो संक्रमित है उसका इलाज तो कराना ही है। बचना उसके संपर्क में आए लोगो को है।
अगर यह सब संभव नहीं है तो घर में ही दूर-दूर रहें, एक दूसरे के कपड़े न पहने, कपड़े धोकर पहनें आदि। और यह सब बीमारी या लक्षण नहीं हो तब भी करना चाहिए। जब तक स्थिति सामान्य न होने लगे। दुनिया भर में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि भारत में मामले कम हैं। अगर यह भारत की विशेष स्थितियों के कारण है तो अच्छी बात है। लेकिन बचकर रहने में कोई नुकसान नहीं है। जबकि अभी

About Post Author

Sanjaya Kumar Singh

छपरा के संजय कुमार सिंह जमशेदपुर होते हुए एनसीआर में रहते हैं। 1987 से 2002 तक जनसत्ता में रहे और अब भिन्न भाषाओं में अनुवाद करने वाली फर्म, अनुवाद कम्युनिकेशन (www.anuvaadcommunication.com) के संस्थापक हैं। संजय की दो किताबें हैं, ‘पत्रकारिता : जो मैंने देखा जाना समझा’ और ’जीएसटी – 100 झंझट’।
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