Home देश 9 मिनट बत्ती गुल करना पावर ग्रिड को पड़ेगा भारी..

9 मिनट बत्ती गुल करना पावर ग्रिड को पड़ेगा भारी..

कुछ बातें : (नो ) लाइट + कैमरा + एक्शन..

1.कोरोना के खिलाफ अपने ‘ परावैज्ञानिक ‘ दर्शन को भारत में लागू करने के प्रयासों की नई कड़ी के रूप में
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज प्रातःकाल नौ बजे राष्ट्र के नाम संबोधन में सभी देशवासियों से रविवार 5 अप्रैल 2020 को रात्रि नौ बजे से 9 मिनट के लिए बिजली बत्ती गुल रखने का आह्वान किया है .

  1. ये तो खबर है.भारत की मीडिया इसकी अनवरत सनातनी व्याख्या करने में लग गया है. जाहिर है कि इस व्याख्या में व्हाट्सएप युनिवर्सिटी के कतिपय विद्वानों की शास्त्रीय डिस्कवरी इनसाइट के लाखों की तादाद में शेयर किए पोस्ट और ट्वीट के वजन से ही दुनिया हिला देने का इरादा है.

3.लेकिन दुनिया भर के कोरोना विशेषज्ञों और खास कर भारत के ही बिजली अभियंताओं के कुछ प्रश्न भी प्रगट हुए हैं. इन अभियंताओं के अनुसार बिजली वितरण के घरेलू पीक लोड के समय इस बत्ती गुल के कारण पॉवर ग्रिड पर गंभीर दुष्परिणाम भी पड़ सकता हैं.

4.अभियंताओं का कहना है कि अगर मोदी जी का ये आह्वान भी इसी तरह के राष्ट्र के नाम संबोधन की पिछली कड़ी में लॉक डाउन की अकस्मात घोषणा की ही तरह
अनियोजित रूप से कार्यान्वित किए गए तो जैसे करोड़ों माइग्रेंट लेबर अपने गांव घर लौटने पैदल ही सड़कों पर निकल पड़े उसी तरह पॉवर ग्रिड का भट्टा बैठ सकता है.

5.तकनीकी भाषा में कहें तो इस बत्ती गुल से 400 किलोवाट के इलेक्ट्रिक हाई वोल्टेज ( ईएचवी ) की लाइनें , ओवर वोल्टेज का शिकार हो जाएंगी. इससे ट्रिपिंग आदि और पूरे ग्रिड सिस्टम के कोलेप्स होने का वास्तविक खतरा है.

6.अभी खेतीबाड़ी के सिवा लगभग सारा उत्पादन कार्य ठप है.बिजली की पहले से मुश्किल में पड़ी अप्रयुक्त आपूर्ति को ,खपत में 9 मिनट की कमी की समस्या से निपटने में लीक से हट कर कुछ उपाय करने होंगे.ये उपाय नहीं किए गए तो बिजली उत्पादन के संयंत्रों में रियेकटिव पॉवर जेनेरेशन आदि और उपकरणों के खराब हो जाने का भी खतरा होगा. हाई वोल्टेज से घरेलू विद्युत उपकरणों की जो शामत आती है उससे सभी खास कर शहरी नागरिक अवगत है.

7..मोदी जी तो मानेंगे नहीं और न ही उनके भक्त मानेंगे. इसलिए बत्ती गुल का यह आह्वान वापस लिए जाने की कोई उम्मीद नजर नहीं आती है. तो फिर क्या करें ? एक अभियंता ने भारत की बेमिसाल जुगाड टेक्नोलॉजी का सहारा लेकर सुझाव दिया है कि बेशक ठं ढ़ के दिन गुजर गए लेकिन अगर देश के उच्च और मध्य वर्ग के शहरी नागरिक अपने अपने घर में लगे वाटर गुजर आदि को 5 अप्रैल को रात नौ बजे के ऐन पहले 9 मिनट के लिए भी ऑन कर लेते है तो कोरोना से लड़ने में मोदी जी के परा विज्ञान से होने वाली मुसीबतें कम की जा सकती है.

(चन्द्र प्रकाश झा की फेसबुक पोस्ट)

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