इस महामारी के दौरान कहाँ है भाजपा और काँग्रेस..

-नारायण बारेठ।।

उम्र 40
उम्र 135 साल
एक इस वक्त सबसे बड़ी पार्टी है ,
एक सबसे पुरानी जमात है
कितना अच्छा होता अगर इस विपत्ति में फंसे लोगो के लिए खाने की पहली खेप लेकर इन दोनों में से एक कोई पहुंचता। अच्छा होता अगर ये दोनों अलग अलग जगह जरुरतमंदो के लिए लंगर चलाते मिलते।एक पास दीनदयाल का एकात्म मानववाद है ,दूसरे के पास गाँधी की विरासत है। पर मेरी जानकारी के अनुसार जयपुर में पीड़ित मानवता के लिए खाना खुराक लेकर सबसे पहले गैर राजनीतिक संगठन ही पहुंचे।

इन संगठनो के साथ मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे थे।आर्य समाज भी था तो जैन समाज के लोग भी। इन संगठनों ने कल भोजन के पांच हजार पैकेट बांटे। केंद्र सक्रिय है ,राज्य सरकार भी हरकत में है /पर आप कहाँ थे ? सरकार बाद में गठित होती है ,पार्टी पहले मैदान में उतरती है। और ! काश ऐसा होता आप दोनों मिलकर कोई लंगर चलाते। संसार को एक सदेश जाता ,मानवता अभिभूत होकर दुआए देती। यह ना मुमकिन भी नहीं है। क्योंकि बहुत सारे मामलो में आप दोनों की रीती नीति एक ही है।फिर आप में से कुछ एक दूसरे से मिलते भी रहते है ,कुछ एक दूजे से मिले हुए भी रहते है। मुनासिब है आप कही समूहिक लंगर चला रहे हो। पता लगे तो आपके प्रति सम्मान बढ़ जायेगा। साधना की नहीं कह सकता। पर आपके पास साधनो की कोई कमी नहीं है।

चुनाव आयोग में दाखिल विवरण के मुताबिक बीजेपी को वर्ष 2018 -19 में 2,410 करोड़ रूपये की आय हुई। यह उसके पिछले वर्ष से 134 प्रतिशत ज्यादा थी। कांग्रेस लम्बे समय से विपक्ष में है। उसने 918 करोड़ की आय दिखाई है। बीजेपी ने इसमें से खर्च 1008 करोड़ बताया है। कांग्रेस ने अपना खर्चा 470 करोड़ रूपये बताया है। लोकतंत्र तब मजबूत होता है जब सियासी पार्टिया सबल हो। यह सबलता चुनाव लड़ने में नहीं बल्कि ऐसे मौको पर अवाम की सेवा करने में दिखना चाहिए।

गाँधी कहते थे ‘ सही काम करना ही सबसे अच्छी राजनीति होती है -The best politics is right action /
यह वक्त का तकाजा है कांग्रेस और बीजेपी के हर आम ओ खास लोगो की सेवा में जुट जाये।लंगर चलाये। खाना खिलाये। पर बिना सियासी खुराक के।

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