विमान सेवाएं बंद करने की क्रोनोलॉजी भी समझ लीजिए..

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-संजय कुमार सिंह।।


कोरोना वायरस से संबंधित पिछली क्रोनोलॉजी से आप जानते हैं कि देश में इस मामले में कार्रवाई देर से शुरू हुई और समय रहते आवश्यक सावधानी नहीं बरती गई, ना आवश्यक तैयारियां शुरू हुईं। इस संबंध में देश भर में घोषित और सार्वजनिक स्तर पर अगर कोई बड़ा काम हुआ तो 19 मार्च को प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को संबोधित किया और इसमें कोई योजना या तैयारी की चर्चा करने की बजाय देशवासियों से आग्रह किया कि जनता की सेवा करने वालों के सम्मान में ताली-थाली बजाई जाए। यह कार्यक्रम अगले ही दिन क्यों नहीं रखा गया उसपर सवाल हैं। लेकिन 22 तारीख को थाली बजाने से पहले यह पता चलने लगा था कि इस बीमारी से निपटने के लिए अस्पतालों में आवश्यक किट नहीं है।
हैदराबाद की एक डॉक्टर ने फेसबुक पोस्ट लिखकर कहा था कि उसके लिए ताली नहीं बजाई जाए बल्कि प्रधानमंत्री से पूछा जाए कि उन्होंने इस महामारी से निपटने के लिए क्या किया है। यह राहुल गांधी पूछते रहे थे जिसका कोई जवाब नहीं किया गया। इस संबंध में कल राहुल गांधी के सारे ट्वीट सोशल मीडिया पर घूमते रहे। पोस्ट लिखने वाली डॉक्टर का भक्तों ने अपने ढंग से सम्मान किया और द टेलीग्राफ की एक खबर के अनुसार उन्हें धमकी भी दी गई। मनीषा बांगड़ ने लिखा था, “मैं चाहती हूं कि आप मोदी जी और भाजपा सरकार पर दबाव डालें कि वे ज़रूरतमंदों की मदद के लिये तत्काल कुछ ठोस काम करें, जैसे :
~ आपदा राहत कोष और चिकित्सा सहायता रणनीति का सभी के लिये आवंटन और
~ कोरोना संकट का मुक़ाबला करने के लिये कम से कम उससे दोगुनी राशि फ़ौरन ज़ारी करें, जितनी आपने सरदार पटेल की मूर्ति के लिये ज़ारी की थी।
~ कॉरपोरेट्स और अपने उन उद्योगपति मित्रों से, जिन्हें आपने हमारा पैसा लेकर देश से भागने दिया, या जिनके संकट का समाधान करने के लिये हमारे पैसों से बेल आउट पैकेज दिया, उनसे मिल कर यह बतायें कि अब देश को मौज़ूदा संकट से उबारने के लिये बेल आउट देने की बारी उनकी है।
~ लूट-लूट कर इकट्ठा किये गये टनों सोना, चांदी और वे सारे रुपये, जो अब भी तिरुपति, पद्मनाभन, शिरडी, सिद्धिविनायक और पुरी के मंदिरों में जमा हैं, उनको राष्ट्रीय ख़ज़ाना घोषित करें, ताकि मौज़ूदा कोरोना आपदा और ऐसी ही कई दूसरी विपत्तियों के कठिन वक़्त में देशहित में उनका उपयोग किया जा सके।
अगर कुछ करना ही है, तो ताली बजाना छोड़ कर कम से कम इतना कर दें…। अगर यह सब नहीं करना है, तो मैं नहीं चाहती कि आप मेरे लिये ताली बजायें।“ द टेलीग्राफ ने कल लिखा था कि ताली थाली बजाने के बाद भारत सरकार के प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) के फैक्ट चेक ट्वीटर हैंडल को रविवार को इन दावों का खंडन करना पड़ा कि ताली बजाने या शोर करने से अथवा बारह घंटे में वायरस नहीं मरता है।
यह स्थिति ऐसे ही नहीं हुई। मूर्खों के भक्तिप्रदर्शन के अलावा अपील इतनी अस्पष्ट थी कि डीएम-एसपी तक जुलूस निकाल रहे थे। आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था, साधनों और उपकरणों के बिना देश भर के कई हिस्सों में स्वास्थ्य रक्षक काम करते रहे और अपनी जान जोखिम में डालकर आम लोगों की रक्षा की। ऐसी खबरें अब भी आ रही हैं। अभी तक आठ लोगों की मौत हो चुकी है। अंतिम मौत पश्चिम बंगाल में हुई और जिस व्यक्ति की मौत हुई उसका विदेश से आए किसी व्यक्ति या किसी ज्ञात कोरोना पीड़ित से कोई संपर्क नहीं था। इस व्यक्ति ने एक रेल यात्रा जरूर की थी और संभावना है कि इसी दौरान उसे संक्रमण हुआ होगा। पर तब यह इस बात का भी संकेत है कि यह वायरस अनजान लोगों तक भी पहुंच गया है।
आपको याद होगा कि लखनऊ में गायिका कनिका कपूर की पार्टी में उसके संपर्क में आए लोगों को वायरस फैलने का डर था और सबका पता लगाया गया। इस हिसाब से ट्रेन में किसी अनजान व्यक्ति का वायरस पीड़ित का होना (और उसका अभी तक पता नहीं चलना) गंभीर मामला है। सैकड़ों लोग बीमार हैं, जिनकी जांच चल रही है, जिनके कोरोना पीड़ित होने की पुष्टि हुई या नहीं हुई और जो ठीक हो गए वह सब अलग है। लचर तैयारियों का ही आलम है कि लोगों के हाथ पर मुहर लगाकर उन्हें अलग रहने के लिए कहकर छोड़ दिया गया। इससे पहले कि यह बीमारी गरीबों के मोहल्लों में पहुंचे वहां के पीड़ितों को अलग करने की भी व्यवस्था होनी चाहिए। वरना एक कमरे में पांच लोग रहने वाले अलग कहां रहेंगे?
इसलिए कल (सोमवार, 23 मार्च) को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कोलकाता एयरपोर्ट की सारी हवाई उड़ानों के संचालन को पूरी तरह से बंद करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कोरोना को नियंत्रित करने की प्रक्रिया में यह एक बड़ी बाधा है, इसलिए, इसे पूरी तरह से बंद किया जाना चाहिए। इससे पहले ताली-थाली बजाने वाले दिन ही दिल्ली सरकार ने राजधानी में कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए रविवार, 22 मार्च को पूरी राष्ट्रीय राजधानी में 31 मार्च तक लॉक डाउन की घोषणा कर दी थी। उसी दिन और राज्यों तथा शहरों में लॉक डाउन की घोषणा हुई। लेकिन दिल्ली की सभी गैर जरूरी सेवाओं और दुकानों को अस्थायी तौर पर बंद कर दिए जाने के साथ यह घोषणा भी की गई थी कि दिल्ली एयरपोर्ट से जुड़ी सेवाएं भी बंद रहेंगी। कहा गया था कि घरेलू या अंतरराष्ट्रीय उड़ान भी बंद रहेंगे। दिल्ली में उड़ानें सोमवार, सुबह 6:00 बजे से बंद होनी थी। पर इसके घंटों बाद भी दिल्ली के इंदिरागांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से विमानों का परिचालन जारी रहा। कहने की जरूरत नहीं है कि केंद्र सरकार ने इस प्रतिबंध को रोक दिया या लागू नहीं किया। ममता बनर्जी की अपील के बाद मंगलवार रात से देश भर में उड़ान बंद करने की घोषणा की गई जो खबर आज अखबारों में है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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