Home गौरतलब जस्टिस गोगोई सारी मर्यादा भूल गए..

जस्टिस गोगोई सारी मर्यादा भूल गए..

-चंद्र प्रकाश झा।।

उत्तर आधुनिक महाभारत के मायने : छठी किश्त

लोचा जस्टिस गोगोई का..

1.भारत में किसी के भी सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद दो साल तक उस व्यक्ति को किसी भी पद पर नियुक्ति न करने का नियम है.इसे ‘ लॉक इन पीरियड ‘ कहते हैं.
2. वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार का सबसे पहला कानूनी काम  एक अध्यादेश था.इसे  पूर्व आई ए एस अधिकारी नृपेन्द्र  मिश्र को प्रधानमंत्री का प्रमुख सचिव बनाने में ‘लॉक इन ‘ की बाधा ख़तम करने के लिए लागू किया गया था .
3. मिश्र जी टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया ( ट्राई )के प्रमुख थे. उस सरकारी पद से मुक्ति के बाद दो बरस का उनका  लॉक इन पीरियड पूरा नहीं हुआ था. 


4.इसलिए नियम कानून को ताक पर रख उनकी नई नियुक्ति के लिए वो अध्यादेश लागू किया गया. बताया जाता है कि अध्यादेश लाने का सुझाव खुद मिश्र जी ने दिया था जो हाल के दिनों में भारत के सबसे ‘बड़े बाबू ‘ रहे हैं. वो बाबरी मस्जिद विध्वंस के ठीक पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के प्रमुख सचिव रहे थे .
5.राज्य सभा सदस्य के रूप में जस्टिस गोगोई की नियुक्ति नहीं हुई है बल्कि यह  मनोनयन है. इसलिए उनके मामले में दो बरस का लॉक इन पीरियड का क्लाऊज लागू हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता है . 
6.सवाल है कौन यह तय करेगा कि उनके राज्य सभा सदस्य के रूप में मोदी सरकार की अनुशंसा पर राष्ट्रपति द्वारा किए गए मनोनयन और उसकी गजट अधिसूचना की वैधानिकता पर कोई शक है या नहीं है ?
7.राजनयिक और इंटेलिजेंस हल्कों के हवाले से अरुण कुमार मिश्र ने , जो जे एन यू  में शिक्षा प्राप्त करने के बाद स्लोवेनिया में एक उच्च शिक्षा संस्थान में प्रोफेसर रहे हैं  , यह जानकारी दी है कि  मनोनयन भी नहीं हो सकता है सर्विस रूल के तहत. क्योंकि आफिशितल सीक्रेट कोड लागू होता है. 
8.भारतीय संविधान के भाग 5 के अनुच्छेद 80 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए और प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति राज्यसभा के सदस्यों का मनोनयन करता है .
9.अनुच्छेद 80 के अनुसार राज्यसभा के लिए वही लोग मनोनीत हो सकते हैं जो साहित्य, विज्ञान कला या समाज विज्ञान के क्षेत्र में विशिष्ट  हों और जिन्होंने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान भी दिया हों। 
10.लेकिन सरकारे अक्सर इसे बैकडोर के रूप में इस्तेमाल करती है.ग्वालियर के सोशल मीडिया एकटिविस्ट गिरीश मालवीय ने पुरानी खबरों को छान कर जानकारी दी है कि 2018 में मोदी सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद , राम शकल जैसे सक्रिय राजनेता को राज्यसभा भेज चुके है जो बीजेपी के टिकट पर रॉबर्ट्सगंज संसदीय क्षेत्र से तीन बार सांसद रह चुके थे.इससे पहले भाजपा , सुब्रमन्यम स्वामी और नवजोत सिंह सिद्धू को राज्य सभा सदस्य बना कर उपकृत कर चुकी है .
11.जब मनमोहन सिंह के कार्यकाल में  मणिशंकर अय्यर को राज्य सभा के लिए मनोनीत  किया गया तब भाजपा ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया था.मणिशंकर अय्यर 2009 में लोकसभा चुनाव हार गए थे. भाजपा ने उनके मनोनयन का भारी विरोध किया था. कांग्रेस ने दावा किया था  कि साहित्य में मणिशंकर अय्यर के  योगदान के आधार पर ही उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया .
12.तब भाजपा प्रवक्ता मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद थे , जिन्होंने अनुच्छेद 80 के आधार परअय्यर के मनोनयन पर सवाल खड़े किए थे .भाजपा प्रवक्ता के रूप में कोविंद जी ने कहा था कि अनुच्छेद 80 में  जो श्रेणियां निर्दिष्ट हैं उन्हीं में से राज्य सभा के लिए मनोनीत किया जाना चाहिए.
13. उन्हीं रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति के रूप में राज्यसभा के लिए  जस्टिस रंजन गोगोई को मनोनीत किया है , जिनका साहित्य, विज्ञान कला या समाज विज्ञान के क्षेत्र में कोई योगदान नहीं है .
14.कुछ तो लोचा लगता है इस मामले में , जिसकी विस्तृत जानकारी मिलने पर हम गौरतलब कॉलम के इसी शनिवार के साप्ताहिक अंक में चर्चा करेंगे 

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