कोरोना हमें क्या मारेगा, हमें तो मंदी ने मार डाला..

Desk

-सुनील कुमार।।
बाकी दुनिया के साथ-साथ हिन्दुस्तान का शेयर बाजार जिस किस्म के तूफान का शिकार दिख रहा है, उससे इसमें पूंजीनिवेश करने वाले लोगों को समझ आनी चाहिए। जनता के बीच शेयर बेचकर उनके पैसों से खरबों की कंपनियां खड़ी करना, उनमें दसियों हजार करोड़ के बैंक-कर्ज भी ले लेना, और फिर जालसाजी-धोखाधड़ी करके भाग जाना, शेयर बाजार और भारतीय कारोबार का यह मिजाज पिछले बरसों में अच्छी तरह साबित हो चुका है। बहुत से लोग इसे पहले से सट्टा बाजार सरीखा मानते आए हैं, और शेयर बाजार में पूंजीनिवेश के खिलाफ बोलते आए हैं। लेकिन बीच-बीच में कुछ ऐसे मामले सामने आते हैं जिनमें शेयर बाजार की पूंजी एकाएक कई गुना बढ़ी हुई दिखती है, और ऐसी गिनी-चुनी मिसालों को देखकर देश भर के आम पूंजीनिवेशक इसमें कूद जाते हैं। यह ठीक वैसा ही है जैसा कि मायानगरी कही जाने वाली मुंबई में फिल्म उद्योग में होता है जहां लोग चकाचौंध के शिकार होकर पहुंचते हैं, पूरी जिंदगी संघर्ष करते रहते हैं, और उनमें से कुछ गिने-चुने लोग कामयाबी और शोहरत की बुलंदियों तक पहुंचते हैं, जिन्हें देखकर दूसरे लोग भी वहां संघर्ष के लिए जाते हैं, और जवानी से अधेड़ हो जाने तक लगे रहते हैं।

आज हिन्दुस्तान में आम लोगों के सामने एक बहुत बड़ी दिक्कत यह है कि वे अपनी जमा पूंजी कहां लगाएं? बैंकों में रखें तो बैंकों का कभी भी दीवाला निकल जाता है, सरकार कभी भी रकम निकालने पर रोक लगा देती है। घर में नगदी रखें तो भी दिक्कत है क्योंकि अगली नोटबंदी कौन से नोट बंद करवा देगी इसका ठिकाना नहीं है, और चोरी हो जाने, आग में खत्म हो जाने का भी खतरा है। सोना खरीदकर रखें, तो भी एक खतरा है कि सरकार किसी भी दिन सोने की सीमा पर एक कानून लाने जा रही है, और उसके बाद उसे कैसे जायज ठहराया जाएगा? उसे सुरक्षित कैसे रखा जाएगा क्योंकि चोरों की नजर सबसे पहले सोने पर होती है। खुले बाजार में रकम ब्याज पर चलाने से डूब जाने का खतरा रहता है, जमीनों में पूंजीनिवेश करने पर सरकार कभी भी जमीनों का इस्तेमाल बदल देती है, और जमीन मिट्टी के मोल की हो जाती है। इस तरह आज हिन्दुस्तान में लोगों के बीच अपनी जमा पूंजी को सम्हालकर रखने में बड़ा असमंजस चल रहा है।

दूसरी तरफ आज दुनिया के बाकी बाजारों की मंदी की असर से हिन्दुस्तान में भी हर किस्म के पूंजीनिवेश पर असर पड़ रहा है क्योंकि देश के कारोबार पर भी असर पड़ रहा है। बाजार में ग्राहकी घट रही है, कंपनियों का दीवाला निकल रहा है, दूसरे देशों से सामानों के आने पर सरकार की कब कैसी नीतियां हो जाएंगी उनका ठिकाना नहीं है, इसलिए हिन्दुस्तानी उद्योगपति और कारोबारी मंदी के अलावा असमंजस के शिकार भी हैं। देश की पूरी अर्थव्यवस्था चौपट है, बेरोजगारी आसमान पर है, लोगों की खर्च करने की क्षमता चुक गई है। ऐसे में लोग किस धंधे में अपना पैसा लगाएं? और न लगाएं तो क्या करें क्योंकि घर में रखे-रखे तो कोई पैसा कमाई देता नहीं है। आज जिस तरह से कोरोना जैसी एक बीमारी ने चीन से शुरू होकर कुछ महीनों के भीतर ही पूरी दुनिया का कारोबार चौपट कर दिया है, और हिन्दुस्तान के स्कूल-कॉलेज बंद करवा दिए हैं, मैच-मेले बंद हो गए हैं, और करोड़ों लोगों का रोजगार, उनकी कमाई फिलहाल तो खत्म ही हो गई है। चारों तरफ एक ऐसी धुंध छाई हुई है कि आम लोगों को कुछ नहीं सूझ रहा है, और खास लोग दूसरे खास लोगों को डूबते देखकर कम से कम यह तसल्ली तो पा रहे हैं कि वे अकेले नहीं डूब रहे हैं, या अभी तक तो नहीं डूबे हैं।

यह वक्त ऐसा है कि आम लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि अपने आपको जिंदा रखने का इंतजाम भी भारी पडऩे वाला है। दिन इतने खराब हो सकते हैं कि जिसकी कभी कल्पना न की हो। ऐसे में आने वाले दिनों को लेकर हर किसी को एक बड़ी तैयारी करनी है, बहुत सावधानी से रहना है, अगर कोरोना जल्दी भी चला जाएगा, तो भी जिस तरह नोटबंदी और जीएसटी ने लोगों और कारोबार की कमर तोड़ दी थी, यह कोरोना भी लोगों की कमर तोडऩे जा रहा है, पूरे देश-प्रदेश की अर्थव्यवस्था को खत्म करने जा रहा है। और सरकार पर लोग निर्भर करते हैं, लोगों पर सरकार निर्भर करती है, इसलिए हर किसी को यह समझने की जरूरत है कि आने वाला वक्त बहुत ही खराब हो सकता है, और जो उसके लिए तैयार नहीं होंगे वे कोरोना से मरंे न मरें, वे मंदी से भी मारे जा सकते हैं।
(दैनिक ‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय, 13 मार्च 2020)

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