हमें हिन्दू-मुस्लिम परोस रहे हैं और पूंजीपतियों को धन..

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-विष्णु नागर।।

हम पर फालतू की खुशियाँ और फालतू के गम बहुत लाद दिए जाते हैं और हमारी भी ‘खासियत’ यह है कि हम खुशी- खुशी उन्हें अपने ऊपर लदवा भी लेते हैं।किसी और देश से भारत की क्रिकेट टीम फायनल में आकर भी हार जाए तो हम पर वज्रपात हो जाता है और जीत जाएँ तो खुशी के मारे हम पागल हो जाते हैं।और पाकिस्तान से जीत -हार तो हमारी या तो नाक कटवा देती है या इतनी ऊँची करवा देती है कि नाक अपनी जगह बदल कर सिर पर चिपक जाती है।

अब हमें यह भी हौले से सिखाया जा रहा है कि हम माननीय मुकेश अंबानी जी के सेंसेक्स की गिरावट या ऊपर चढ़ जाने से उनके एशिया के सबसे बड़े धनी आदमी बन जाने या नंबर दो हो जाने पर रोएँ या हँसें।क्यों रोएँ,क्यों हँसें?हमारे अपने गम कम हैं क्या?

और मेरी बला से जैक मा एशिया के सबसे धनी आदमी बने या मुकेश अंबानी, या कोई और। क्या फर्क पड़ता है?हमारी संपत्ति को प्यार से,हमारे सहयोग से लूट कर ही तो कोई इतना बड़ा या इनसे बड़ा या इनसे छोटा बनता है!होना तो यह चाहिए कि यह लूट बंद हो मगर बिल्ली के गले में घंटी बाँधे कौन? मोदीजी हों या मनमोहन जी थे या उनसे पहले के जी या साहब थे,सब हमारे नहीं,इनके हितचिंतक रहे हैं, रहे थे और रहेंगे।इन्हें ये कुछ भी इनकी और अपनी इच्छा से लुटाकर इनके हाथ पर धर देंगे।जब मुकेश अंबानी के पिताश्री जीवित थे,सुनते थे कि बजट में इनकी सुविधा और लाभ के लिए बजट में इस तरह की व्यवस्थाएँ की जाती थीं कि बहुत जानकार ही समझ पाते थे कि यह अंबानी जी के लिए किया गया है।अंबानी जी अवश्य बजट के बाद प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को धन्यवाद देते होंगे और वित्त सचिव को भी,जिनके सक्रिय सहयोग के बगैर यह संभव नहीं होता।बाद में एक पर एक सरकारी कंपनियाँ इन्हें लुटाई जाने लगीं।एक मंत्रालय ही बना दिया गया अटल बिहारी वाजपेयी के जमाने में-विनिवेश मंत्रालय।इसके मुखिया आज के मोदी विरोधी अरुण शौरी होते थे।

मोदीजी तो खैर दोनों हाथों और दोनों पैरों से भी सारे पूँजीपतियों को लुटा रहे हैं और हमें हिन्दू-मुस्लिम परोस रहे हैं और हम खुश हैं कि ‘हिंदू स्वाभिमान’ लौट रहा है!भला अंबानी -अडाणी का हो रहा है और ज्योतिरादित्य को मोदी जी के हाथों देश सुरक्षित नजर आ रहा है।देश और सुरक्षित हो जाएगा, जब सिंधिया जी भी हिंदू -मुसलमान शुरू कर देंगे।

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