भाजपा कितनी बुरी है

Read Time:7 Minute, 30 Second

-संजय कुमार सिंह।।

भाजपा उच्च स्तर पर झूठ बोलने वालों की पार्टी है। झूठ बोलने का पूरा तामझाम है, पार्टी के लिए झूठ फैलाने का काम करने वाले लोग जाने-पहचाने हैं और उनकी झूठ की पोल कई बार खुल चुकी है।

मीडिया को गोदी में कर लिया गया है और सोशल मीडिया पर झूठ फैलाने वाले उसके गिरोह के साथ गालीबाजों और ट्रोल का गिरोर है। इस गिरोह के कुछ गंभीर लोगों को प्रधानमंत्री फॉलो करते हैं।

भाजपा ने तमाम संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता नष्ट की है, कई तरह से, कई बार।

कई मामलों में हस्तक्षेप और दबाव साफ नजर आता है। कर्नाटक में दल बदल करने वालों को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया गया इसके खिलाफ वे सुप्रीम कोर्ट गए, चुनाव की तारीख टली और फैसला उनके पक्ष में हुआ – यह सामान्य नहीं है। इसमें प्रभाव और दबाव न भी हो तो इसकी जांच होनी चाहिए कि ऐसा क्यों और कैसे हुआ।

दल बदल करने वालों को टिकट देना अनैतिक है। अपने पुराने सदस्यों की उपेक्षा कर पार्टी में नए आए लोगों को उम्मीदवार बनाना- कैसे ठीक हो सकता है।

जज लोया की मौत हुई। शक के कई मुद्दे हैं। उनके परिवार, मित्र, समर्थक या किसी एक प्रशंसक को लगता है कि उसकी जांच होनी चाहिए तो सरकार को उसके क्यों रोकना चाहिए? सरकार को इससे संबंधित मुकदमे में वकील पर इतना पैसा खर्च करना कैसे सही हो सकता है जितने में जांच हो जाती।

अगर तथाकथित गुजरात मॉडल को आदर्श माना जाए तो उसमें भी कई झोल हैं। कई सवाल अनुत्तरित हैं। भाजपा इतनी बुरी पार्टी है कि अपने ही नेताओं की मौत के मामले में गंभीर नहीं है। जांच नहीं हुई।

पुलवामा का मामला एक और उदाहरण है। देविन्दर सिंह की गिरफ्तारी के बाद पूरी अलग कहानी बनती है। लेकिन उसपर कोई चर्चा नहीं है।

भाजपा कितनी बुरी है

  1. भाजपा उच्च स्तर पर झूठ बोलने वालों की पार्टी है। झूठ बोलने का पूरा तामझाम है, पार्टी के लिए झूठ फैलाने का काम करने वाले लोग जाने-पहचाने हैं और उनकी झूठ की पोल कई बार खुल चुकी है।
  2. मीडिया को गोदी में कर लिया गया है और सोशल मीडिया पर झूठ फैलाने वाले उसके गिरोह के साथ गालीबाजों और ट्रोल का गिरोह है। इस गिरोह के कुछ गंभीर लोगों को प्रधानमंत्री फॉलो करते हैं। यह सब आम जनता को पता होना चाहिए जो गोदी मीडिया नहीं कर रहा है। या उसे करने नहीं दिया जा रहा है।
  3. भाजपा ने तमाम संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता नष्ट की है, कई तरह से, कई बार। शिक्षा, इलाज आदि के पक्ष में काम करने की बजाय उसका नुकसान किया है।
  4. कई मामलों में हस्तक्षेप और दबाव साफ नजर आता है। कर्नाटक में दल बदल करने वालों को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया गया इसके खिलाफ वे सुप्रीम कोर्ट गए, चुनाव की तारीख टली और फैसला उनके पक्ष में हुआ – यह सामान्य नहीं है। इसमें प्रभाव और दबाव न भी हो तो इसकी जांच होनी चाहिए कि ऐसा क्यों और कैसे हुआ। मध्य प्रदेश में वही होने वाला है।
  5. दल बदल करने वालों को टिकट देना अनैतिक है। अपने पुराने सदस्यों की उपेक्षा कर पार्टी में नए आए लोगों को उम्मीदवार बनाना- कैसे ठीक हो सकता है। पार्टी अपने लोगों के लिए भी अच्छी नहीं है।
  6. जज लोया की मौत हुई। शक के कई मुद्दे हैं। उनके परिवार, मित्र, समर्थक या किसी एक प्रशंसक को लगता है कि उसकी जांच होनी चाहिए तो सरकार को उसके क्यों रोकना चाहिए? सरकार को इससे संबंधित मुकदमे में वकील पर इतना पैसा खर्च करना कैसे सही हो सकता है जितने में जांच हो जाती।
  7. अगर तथाकथित गुजरात मॉडल को आदर्श माना जाए तो उसमें भी कई झोल हैं। कई सवाल अनुत्तरित हैं। भाजपा इतनी बुरी पार्टी है कि अपने ही नेताओं की मौत के मामले में भी गंभीर नहीं है। जांच नहीं हुई। एक नेता की मौत को ईवीएम से जोड़ा गया पर कुछ नहीं हुआ।
  8. पुलवामा का मामला एक और उदाहरण है। देविन्दर सिंह की गिरफ्तारी के बाद पूरी अलग कहानी बनती है। लेकिन उसपर कोई चर्चा नहीं है।
  9. सांप्रदायिक है। दिल्ली दंगे में भड़काने वाले और उकसाने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सीएए का पूरा कानून और इसके विरोध का विरोध सांप्रदायिक है। विरोध का विरोध करने की जरूरत ही नहीं है। पर उसे नहीं रोका जा रहा है क्योंकि उससे तनाव बना रहता है और मुख्य मुद्दे पीछे रह जाते हैं।
  10. ठीक है कि गृहमंत्री पर अब आरोप नहीं है और उन्हें पहले तड़ीपार घोषित किया गया था। पर क्या यह महत्वपूर्ण पद किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं दिया जाना चाहिए था जिसपर कोई दाग न हो। क्या पार्टी इसकी जरूरत नहीं समझती है। यह भी संभव है कि पार्टी के पास गृहमंत्री की योग्यता का कोई विकल्प न हो – क्या यह पार्टी की कमजोरी नहीं है कि उसके पास कोई बेदाग नेता नहीं है जो गृहमंत्री बन सके।

मैं नहीं मानता कि भाजपा इतनी बुरी भी नहीं है कि हर समय उसे सूली पर टांगे रखा जाए। भाजपा से मेरी निराशा इसलिए ज्यादा है कि कांग्रेस से कोई उम्मीद नहीं है और अटल बिहारी वाजपेयी ने इसे अलग चाल चरित्र और चेहरे वाली पार्टी कहा था जबकि नरेन्द्र मोदी ने इसे एक ईमानदार पार्टी होने का ढोंग किया था। ईमानदार होने का मतलब सिर्फ आर्थिक ईमानदार होना नहीं होता है पर भाजपा उतना भर भी नहीं है।

0 0

About Post Author

Sanjaya Kumar Singh

छपरा के संजय कुमार सिंह जमशेदपुर होते हुए एनसीआर में रहते हैं। 1987 से 2002 तक जनसत्ता में रहे और अब भिन्न भाषाओं में अनुवाद करने वाली फर्म, अनुवाद कम्युनिकेशन (www.anuvaadcommunication.com) के संस्थापक हैं। संजय की दो किताबें हैं, ‘पत्रकारिता : जो मैंने देखा जाना समझा’ और ’जीएसटी – 100 झंझट’।
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments
No tags for this post.

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

बेवफाई का बहाना..

कुछ तो मजबूरियां रहीं होंगी, यूँ ही कोई बेवफा नहीं होता, शायर बशीर बद्र का यह शेर बहुत अच्छा है, लेकिन इसकी आड़ में बेवफाई को सही नहीं ठहराया जा सकता। वफादारी शर्तों से बंधी नहीं हो सकती। नैतिकता का यह तकाजा, निस्वार्थ, बिना किसी लोभ के निभाया जाना चाहिए। […]
Facebook
%d bloggers like this: