सिंधिया और ‘रियाया’ मोदी-शाह की अदालत में..

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द टेलीग्राफ ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफे की खबर ऐसे दी है

-संजय कुमार सिंह।।


द टेलीग्राफ की आज की प्रमुख खबर का शीर्षक है, कुछ भारतीय राज्यों समेत सारी दुनिया एक महामारी और आर्थिक संकट की आशंका से लड़ रही है पर हम लोग एक …. कोरोना वायरस के सम्मान में लगे हैं। इस खबर का साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की तस्वीरों के बीच में ज्योतिरादित्य सिंधिया की तस्वीर है। दोनों लोग हंस रहे हैं पर बीच में ज्योतिरादित्य हंस नहीं रहे हैं और गंभीर दिख रहे हैं। इन तीन तस्वीरों का कैप्शन है, सर्वश्री व्यंग किस पर है? कैप्शन में बताया गया है कि नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की तस्वीरें मंगलवार को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय की हैं जब वहां केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक चल रही थी। बीच में ज्योतिरादित्य सिंधिया की फोटो 2018 में ली गई थी जो संसद के बाहर की है। अखबार ने यह भी लिखा है कि सभी तस्वीरें पीटीआई की है।
कुल मिलाकर, यह खबर ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने और भाजपा में शामिल होने की अटकलों पर है। लेकिन कोरोनावायरस को देश में जो सम्मान मिल रहा है यह टिप्पणी उसपर भी है। आप जानते हैं कोरोना वायरस से लड़ने के लिए क्या सब चल रहा है और उसमें एक संकट यह भी है कि किसी को मोबाइल पर फोन कीजिए तो कई सेकेंड तक कोरोना वायरस झेलना पड़ता है। कल्पना कीजिए कि किसी को रोज 20-25 कॉल करने हो तो कितने सेकेंड कोरोना को झेलना या उसका सम्मान करना होगा। हालांकि, इसका एक इलाज है जो कम प्रचारित है और वह यह कि जैसे ही विज्ञापन शुरू हो आप कोई भी नंबर दबा दीजिए, घंटी बजने लगेगी।
इस माहौल में अखबार ने आज पहले पन्ने पर ही बैंगलोर की एक और खबर छापी है – जिम्मेदार डॉक्टर की नौकरी गई। इस खबर के मुताबिक, कोरोना वायरस प्रभावित केरल में एक युवा डॉक्टर की नौकरी चली गई क्योंकि उसने नियमों का पालन किया और तेज बुखार में अपने पास आए एक मरीज की सूचना स्वास्थ्य विभाग को दे दी। असल में एक प्राइवेट क्लिनिक में नौकरी करने वाली डॉक्टर शिनु श्यामलन के पास यह मरीज आया तो उसने उससे सरकारी अस्पताल में जाने के लिए कहा पर उसने मना कर दिया क्योंकि उसे दोहा जाना था। डॉक्टर ने इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी। इसका नतीजा यह हुआ कि थ्रिसुर के जिस रोश क्लिनिक में वह नौकरी करती थी वहां से उसे निकाल दिया गया क्योंकि इस निजी क्लिनिक को लगता था कि इससे उसका कारोबार प्रभाविक होगा। यह हालत तब है जब केरल में ही कोरोना वायरस के 14 मरीज हैं। होली की छुट्टी के कारण आज दूसरे अखबार नहीं आएंगे वरना मैं बताता कि यह खबर किस अन्य अखबार में पहले पन्ने पर है। फिलहाल द टेलीग्राफ की लीड खबर ही बताता हूं।
ऊपर बताये गए मुख्य शीर्षक के साथ दो खबरें हैं और एक बॉक्स में भाजपा व कांग्रेस से सवाल शीर्षक के तहत कुछ सवाल छापे गए हैं। ये सवाल क्या हैं उसपर आने से पहले बता दूं कि नीचे रामचंद्र गुहा का एक ट्वीट है जो हिन्दी में कुछ इस प्रकार होगा, “अगर सिंधिया में रीढ़ होती तो वह करते जो ममता बनती और शरद पवार ने किया – अपनी पार्टी बनाई।” पहली खबर तीन कॉलम में दो लाइन के शीर्षक वाली है। शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होता, सिंधिया और ‘रियाया’ मोदी-शाह की अदालत में। संजय के झा की इस खबर में बताया गया है कि सिंधिया को नेहरू-गांधी परिवार का करीबी माना जाता था अब वे भाजपा में चले गए हैं। यह सब तो आप जानते हैं पर आज के अखबारों में कौन यह सब छापता यह देखना महत्वपूर्ण होता लेकिन सिंधिया ने ऐसे दिन पार्टी छोड़ी कि अगले दिन ज्यादातर अखबार नहीं आए हैं।
इसके साथ सिंगल कॉलम की एक खबर है, ‘गर्दन’ सेफ एंड हाई। इसमे ‘गर्दन’ हिन्दी वाला ही है। इस शीर्षक का मतलब है, (सिंधिया की) गर्दन सुरक्षित और तनी हुई है। जेपी यादव की इस खबर में कहा गया है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने घर वापसी के लिए एक शुभ दिन चुना। जनता की सेवा के लिए बेहतर मौका तलाशने के लिए यह उनकी बुआ, यशोधरा राजे सिंधिया के शब्द हैं। मंगलवार को सिर्फ होली नहीं थी बल्कि ज्योतिरादित्य के पिता माधवराव सिंधिया की सालगिरह भी थी। दो साल पहले उनके पुत्र ने एलान किया था, हमारी गर्दन कट जाए, लेकिन हम झुकेंगे नहीं। अखबार ने इसका उल्लेख करते हुए लिखा है कि मंगलवार की सुबह सिंधिया ने जब अमित शाह को फोन किया और केंद्रीय मंत्री के साथ प्रधानमंत्री से मिलने गए तो उनकी गर्दन एकदम तनी हुई थी और प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास से निकलते हुए वे वी (विक्ट्री साइन) दिखाते हुए निकल रहे थे। इसके बाद उनके ट्वीटर हैंडल पर सोनिया गांधी के नाम उनका पत्र पोस्ट किया गया जिसमें उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा देने की सूचना दी है।
और अब भाजपा व कांग्रेस से सवाल
• गोवा, बिहार, मणिपुर, कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा, मध्य प्रदेश — क्या चुनाव बेमतलब और पूरी तरह मजाक बन गए हैं।
• क्या दल विरोधी कानून बेमतलब हो गया है?
• आज दल बदल कल ईनाम : क्या मतदाता इतने मूर्ख हैं कि दलों को दिखावे की भी जरूरत नहीं रह गई है?
• अगर मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष 22 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करते हैं तो यहां डेढ़ साल से भी कम समय बाद फिर से चुनाव होंगे। क्या दलबदलुओं के कारण होने वाले चुनावों पर इस तरह जनता का पैसा बर्बाद किया जाना सही है?
• सिंधिया ने कहा है कि उनका मकसद जनता की सेवा करना है। ठीक है कि वे एक शाही परिवार के हैं लेकिन क्या उन्हें जनत्ता को और बुद्धिमान नहीं समझना चाहिए?
• भाजपा वंशवाद का मजाक उड़ाती है। क्या सिंधिया वंश परंपरा के भाग नहीं हैं या दल बदल के गंगाजल ने उन्हें शुद्ध कर दिया है?
• लालच नहीं झेल पाने वाले लोगों को चुनाव मैदान में उतार कर कांग्रेस ने कैसे जनप्रतिनिधि चुने थे जो पाए।
• अगर कांग्रेस अपने सर्वोच्च नेतृ्तव को ऐसे लोगों से मुक्त नहीं रख सकती है जो भाजपा में चले जाएं तो वह आदर्शों का कैसा संघर्ष कर रही है।
• अगर राहुल गांधी ट्वीट करके और सांसद बने रहकर खुश हैं तो क्या उन्हें डूबते लग रहे जहाज से कूद कर किसी और पार्टी में नहीं शामिल होना चाहिए ताकि वायनाड के अपने मतदाताओं की बेहतर सेवा कर सकें।

About Post Author

Sanjaya Kumar Singh

छपरा के संजय कुमार सिंह जमशेदपुर होते हुए एनसीआर में रहते हैं। 1987 से 2002 तक जनसत्ता में रहे और अब भिन्न भाषाओं में अनुवाद करने वाली फर्म, अनुवाद कम्युनिकेशन (www.anuvaadcommunication.com) के संस्थापक हैं। संजय की दो किताबें हैं, ‘पत्रकारिता : जो मैंने देखा जाना समझा’ और ’जीएसटी – 100 झंझट’।
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