सेंगर को सजा की खबर में प्रधानमंत्री की फोटो..

-संजय कुमार सिंह।।

कुछ चीजें बाई चांस होती हैं पर होती दिलचस्प हैं। आज सुबह मैंने किसी अखबार में खबर पढ़ी कि बलात्कार के आरोपी चिन्मयानंद का जन्म दिन मनाया गया। जहां तक मुझे याद है गेरुआ वस्त्रधारी बाबा की खबर अंदर किसी पन्ने पर थी। मैं देखना चाह रहा था कि खबर पहले पन्ने पर क्यों नहीं है या हो सकती थी कि नहीं। पर पहला पन्ना तो छोड़िए, खबर गायब ही हो गई है। मिल ही नहीं रही है। इंटरनेट पर अखबार अपनी खबर भले न बदलें पर तकनीकी रूप से बदलना संभव है और चूंकि मैं कई बार, कई एडिशन पलटकर भी देखता हूं कि कौन सी खबर कितने एडिशन में छपी तो याद ही नहीं रहता है कि कहां कब पढ़ी थी। आज यही सब करते हुए याद आया कि उत्तर प्रदेश के बलात्कारी पूर्व भाजपा विधायक उन्नाव के कुलदीप सिंह सेंगर के मामले में कल पढ़ा था कि उन्हें पीड़िता के पिता की हत्या का भी दोषी पाया गया है। भले ही इससे उनकी सजा पर कोई असर ना पड़े और ना कोई दो बार उम्र कैद काटेगा ना किसी को दो बार फांसी पर लटकाया जाएगा। पर खबर तो खबर है।

यह उत्तर प्रदेश में डबल इंजन सरकार के राज में कानून व्यवस्था की स्थिति की पोल पट्टी तो खोलती ही है। इस लिहाज से यह एक बड़ी खबर है। विधायक बलात्कारी ही नहीं पाया गया है शिकायतकर्ता के पिता की हत्या का दोषी भी साबित हुआ है और यह हमारी सत्तारूढ़ पार्टी का सदस्य है। पार्टी ने पहले तो शिकायतकर्ता की नहीं सुनी, फिर अपने नेता के खिलाफ कार्रवाई नहीं की और इतनी आजादी दी कि उसने शिकायतकर्ता के पिता की भी हत्या कर दी (करा दिया जो भी हो) और उसपर गवाहों की हत्या के लिए दुर्घटना कराने का भी आरोप है। सरकारी संरक्षण प्राप्त ऐसे व्यक्ति को दोषी पाया जाना निश्चित रूप से बड़ी खबर है पर आजकल ऐसी खबर अंदर के पन्ने पर छापने का रिवाज है। अंग्रेजी अखबारों में तो नहीं लेकिन उत्तर प्रदेश के हिन्दी अखबारों में यह खबर निश्चित रूप से पहले के पन्ने की है (अमर उजाला और दैनिक जागरण में है भी) पर देखिए आपके अखबार में इस खबर को कैसे छापा गया है।

जहां तक हिन्दुस्तान टाइम्स में इस खबर का सवाल है, स्क्रीन शॉट में दाहिने तरफ देखिए सेंगर के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भी फोटो है। अब सेंगर को सजा हुई उसमें प्रधानमंत्री की फोटो देखकर लगेगा कि खबर में डबल इंजन जैसा कुछ होगा। मैं तो फोटो देखकर ही चौंक गया क्योंकि मैं जानता हूं कि ऐसा कुछ होने वाला नहीं है। दूसरी तरफ देखते ही बात समझ में आ गई। मामला तकनीकी झोल का है। प्रधानमंत्री की फोटो सिंगल कॉलम की एक खबर के साथ लगी है जिसमें बताया गया है कि प्रधानमंत्री ने पांच साल में कितने रुपए की विदेश यात्राएं कीं। बहुत सामान्य सी बात है पर ढंग से शिकायत की जाए तो दो-चार लोगों की नौकरी जा सकती है। मैं नहीं चाहता कि ऐसा कुछ हो इसलिए यह पोस्ट कि अगर ऐसी कभी कोई शिकायत आए तो ठीक से देख-समझ कर कार्रवाई की जाए। किसी गरीब और मजबूर की नौकरी न जाए।

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