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इनकी बू, उनकी बू..

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-संजय कुमार सिंह।।


आइए देखें अजीब सी बू किसे कब और क्यों आती है
द टेलीग्राफ ने लिखा है, दिल्ली शहर में कुछ तो सड़ गया है
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा था कि देश में राष्ट्रवाद के विचार और भारत माता की जय के नारे का दुरुपयोग हो रहा है। मनमोहन सिंह ने देश के पहले प्रधानमंत्री पर लिखी गई एक किताब के लोकार्पण के मौके पर कहा था कि इनके जरिए भारत में उग्र राष्ट्रवाद का विचार पैदा किया जा रहा है। ऐसा करने से देश के लाखों नागरिक अलग-थलग पड़ जाएंगे। दिल्ली में दंगे से पहले मनमोहन सिंह ने 22 फरवरी को कहा था कि अगर आज भारत को एक शानदार देश और जीवंत लोकतंत्र के तौर पर पहचाना जाता है, तो इसका श्रेय पंडित जवाहरलाल नेहरू को जाता है। अगर आज भारत दुनिया की प्रमुख शक्तियों में शामिल हैं, तो यह नेहरुजी के कारण संभव हुआ। पहले प्रधानमंत्री को इसका शिल्पी माना जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने दिल्ली में भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में सांसदों को संबोधित करते हुए मंगलवार को दिल्ली दंगों की चर्चा नहीं की पर सांसदों की क्लास लेते हुए कहा कि आप पर सवा सौ करोड़ का भार है। आप बहुत व्यस्त रहते हैं लेकिन फिर भी कुछ समय देश के लिए निकालिए। पीएम मोदी ने आगे कहा कि विकास जरूरी है और इसके लिए शांति, सद्भाव और एकता जरूरी है। सभी सांसदों को समाज में शांति, सौहार्द और एकता सुनिश्चित करने के लिए अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। अपने भाषण में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को ‘भारत माता की जय’ बोलने में बू आती है। मनमोहन सिंह का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि यह तकलीफदेह है कि कुछ लोगों को देशभक्ति के नारे से अजीब सी बू आती है।
द टेलीग्राफ ने आज इसी को पहली खबर बनाया है और शीर्षक लगाया है, जी प्रधानमंत्री जी, जैसा आपने कहा एक अजीब सी बू आती है। दिल्ली महानगर में कुछ सड़ा हुआ है जब आप अपना समय ऐसे काम में लगाते हैं ….. इसके बाद प्रधानमंत्री का एक ट्वीट है जो मंगलवार को यह बताने के लिए किया गया लगता है कि सोमवार को जब उन्होंने कहा था कि, “इस रविवार को मैं अपने सोशल मीडिया अकाउंट छोड़ने के बारे में सोच रहा हूं ….” तो उनका क्या मतलब था। हिन्दी अखबारों ने इस ट्वीट के बारे में ऐसे लिखा है, ‘‘इस महिला दिवस (8 मार्च) पर, मैं अपने सोशल मीडिया अकाउंट ऐसी महिलाओं को सौंप दूंगा जिनका जीवन और कार्य हमें प्रेरित करते हैं। इससे लाखों लोगों को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘क्या आप इस तरह की महिला हैं या आप इसी तरह की किसी प्रेरणास्पद महिला को जानते हैं? ‘#SheInspiresus’ (वह हमें प्रेरित करती हैं) के साथ ऐसी गाथाएं साझा करिए।’’


इसके साथ द टेलीग्राफ ने दो खबरें छापी है। पहली भाजपा नेता कपिल मिश्रा को मिली वाई प्लस सुरक्षा मिलने की खबर है और इसका शीर्षक है, (जब) ….. इस आदमी को नौ गार्ड मिलते हैं और (दूसरी खबर) …. जब आप ट्वीट कर रहे होते हैं तो स्वयंसेवक परेशान हो रहे होते हैं। ये दोनों शीर्षक दिल्ली में कुछ सड़ा होने और बू आने से जोड़कर लगाए गए हैं और इसमें कपिल मिश्रा का नाम नहीं है। तस्वीर लगाकर “इस आदमी” लिखा गया है। कल जब इस आदमी को सुरक्षा देने की खबर आई तो बहुतों को यकीन नहीं हुआ। सोशल मीडिया में किसी ने एक अखबार की क्लिपिंग लगाई थी जो फर्जी है कहने पर उसने हटा ली। और तो और अमर उजाला की साइट पर यह खबर अभी भी है, कपिल मिश्रा की वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा का दावा झूठा, दिल्ली पुलिस ने किया इनकार। लेकिन द टेलीग्राफ से लेकर तमाम दूसरे अखबार गलत खबर छापेंगे इसपर यकीन करना मुश्किल है और यह सरकार के हित में है कि अखबारों की साख खराब होती जाए और अखबारों को अपनी चिन्ता नहीं है तो कोई कर भी क्या सकता है। देश भक्ति के इस माहौल में सब मिल कर देश का बाजा बजा रहे हैं।
द टेलीग्राफ ने अगर एक तरफ दंगा भड़काने के आरोपी कपिल मिश्रा को सुरक्षा दिए जाने को दिल्ली में कुछ सड़ा होने और बू आने का कारण बताया है तो दूसरी तरफ दिल्ली दंगे के पीड़ितों के लिए मुस्तफाबाद ईदगाह में चल रही राहत शिविर की हालत का वर्णन किया है। इसमें आपदा प्रबंध एक्सपर्ट मुनीष कौशिक के हवाले से लिखा है, दबाव में नौकरशाह जो मानवीय संवेदना नहीं मुहैया करा पा रहे हैं उसे स्वयंसेवक ला रहे हैं।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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