Home देश शाहीन बाग: सरकार की मिट्टी पलीद न हो जाये..

शाहीन बाग: सरकार की मिट्टी पलीद न हो जाये..

-चंद्र प्रकाश झा।।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) की मोदी सरकार के नए बनाये नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 (सीएए) और कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (यूपीए) सरकार द्वारा 2005 में लागू ‘ नेशनल सिटिज़नशिप रजिस्टर ‘ (एनसीआर) और नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) आदि के खिलाफ अपनी मांगों पर जोर देने के लिए दिल्ली के शाहीन बाग में औरतों की अगुवाई में धरना उत्तर आधुनिक भारत में रेनेसां का प्रतीक बन चुका है.भारत में लखनऊ के हुसैनाबाद घंटाघर समेत करीब 200 जगहों पर औरतों की अगुवाई में इसी तरह का धरना चल रहा है.

शाहीन बाग़ का धरना ,शाहीन बाग़-कालिंदी कुंज मार्ग पर 15 दिसंबर 2020 को शुरू हुआ था. सुप्रीम कोर्ट ने आंदोलनकारी महिलाओ से बातचीत कर धरना दूसरी जगह शिफ्ट कराने के लिए तीन मध्यस्थ नियुक्त किए.मध्यस्थों ने सीलबंद लिफाफे में 23 फरवरी को कोर्ट को जो रिपोर्ट सौंपी उसकी प्रति किसी पक्ष को नहीं दी गई.उसके एक दिन पहले तीसरे मध्यस्थ हबीबुल्लाह ने हलफनामा दाखिल किया,जिसमें धरने की वजह से पैदा समस्याओं के लिए दिल्ली पुलिस को जिम्मेदार ठहराया गया है.

सुप्रीम कोर्ट में शाहीन बाग़ से धरना हटाने के निर्देश देने की याचिका अधिवक्ता अमित साहनी ने दाखिल की है. महिला आंदोलनकारियों का कहना है कि उन्होंने शाहीन बाग़ में सिर्फ 150 मीटर क्षेत्र कवर किया है और दिल्ली पुलिस ने वहां की सड़कों की तीन तरफ से घेराबंदी कर उसे ब्लॉक कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर 26 फरवरी को अपनी पिछली सुनवाई में कोई खास आदेश नहीं दिया.अदालत का ऑब्जर्वेशन था: मध्यस्थों की रिपोर्ट से लगता है कि बातचीत में सफलता नहीं मिली.ऐसे माहौल में अभी और सुनवाई करना ठीक नहीं है.अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी. इससे पहले कोर्ट ने इस याचिका पर 23 फरवरी को अपनी सुनवाई टाल दी थी.सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त मध्यस्थ दो वकीलो-साधना रामचंद्रन और संजय हेगड़े ने चार दिन शाहीन बाग़ जाकर आंदोलनकारी महिलाओ से बातचीत में उन्हे वहां रास्ता खोलने के लिए धरना किसी दूसरी जगह शिफ्ट करने की सलाह दी थी.
इन वार्ताकारों के समक्ष खुले सत्रों में आंदोलनकारियों ने अपनी बात पुरजोर तरीके से कह साफ कर दिया कि मूल मसला धरना नहीं बल्कि उसके शुरू करने की वजहें हैं. इन वजहो नागरिकता संशोधन अधिनियम (2019) का प्रतिरोध है और जबतक यह अधिनियम निरस्त नहीं किया जाता उसके खिलाफ प्रतिरोध कायम रहेगा.उन्होंने वार्ताकारों के जरिये कई मांग भी उठाई. इनमें शाहीन बाग़ आंदोलनकारियों और जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रो के विरुद्ध दर्ज पुलिस मामले वापस लेने के अलावा यह भी मांग है कि धरना स्थल के साथ लगती सड़क को यदि पुलिस-प्रशासन द्वारा खोला जाता है तो सुप्रीम कोर्ट उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का उपाय करे. आंदोलनकारियों ने वार्ताकारों को अपना मांगपत्र सौंपा. इसमें डिवाइडर पर एल्यूमीनियम शीट की बैरिकेडिंग की मांग की गयी है ताकि विरोध स्थल को सड़क के दूसरी तरफ से अलग किया जा सके.

पुलिस ने आपराधिक दंड संहिता की धारा 117 के तहत अनेक आंदोलनकारियों को नोटिस भेजे है.यह भी मांग है कि शाहीन बाग़ धरना के सन्दर्भ में जिन लोगों ने वहा 500 रुपये लेकर बैठने आदि आपत्तिजनक बयान दिए उनके खिलाफ कानुनी कार्रवाई की जाए. सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली सरकार के नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर तैयार करने के काम पर रोक लगाये, जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों पर उसके पुस्तकालय आदि मै घुस कर दिल्ली पुलिस द्वारा किये बर्बर हमलो की जांच करायी जाए.

दिल्ली पुलिस ने अंतत स्वीकार कर लिया है कि आंदोलनकारियों ने शाहीन बाग़ में समानांतर सड़क जाम नहीं की है. लेकिन उन्होंने धरना स्थल पर सुरक्षा के लिये अपनी तरफ से मार्ग अवरोधक लगाए हैं. नोएडा को दक्षिण दिल्ली और फिर हरियाणा में फरीदाबाद से जोड़ने वाली सड़क 15 दिसंबर से शाहीन बाग़ के आंदोलनकारियों के धरना के फलस्वरूप बंद है. लेकिन एम्बुलेंस और स्कूल बसों जैसे जरूरी वाहनों को इस सड़क से जाने की अनुमति दी जा रही है.एक महिला ने वार्ताकारों को बताया: “इलाके की कई दूसरी सड़कें जब खुली हुई हैं, तो वे हमें इस सड़क से हटाने पर क्यों जोर दे रहे हैं. दिल्ली-नोएडा को जोड़ने वाली यह एकमात्र सड़क नहीं है.”
एक अन्य महिला ने वार्ताकारों से कहा: “ सरकार सोचती है कि हम महिलाएं अशिक्षित हैं.हम सभी शिक्षित हैं, जो जानती हैं कि हम क्यो लड़ रही हैं. हमें सीएए और एनआरसी के बारे में और ज्यादा जानकारी देने वाले जामिया के छात्रों को पीटा जा रहा है. पुलिस अगर हम पर गोली चलाने वाले लोगों को नहीं रोक सकती, तो ये दावा कैसे कर रहे हैं कि अगर समानांतर सड़क खुल जाने पर वे हमारी सुरक्षा करेंगे ”.एक अन्य महिला ने कहा: ‘हम लिखित गारंटी चाहिये कि अगर हमला या गोली चलने की एक भी घटना हुई तो थानाध्यक्ष से लेकर पुलिस आयुक्त तक सभी पुलिस अधिकारियों को हटा दिया जाएगा. गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि एनआरसी अब जल्द नहीं होगा लेकिन उन्हें लिखित गारंटी देनी होगी कि सरकार अब एनआरसी पर जोर ही नहीं देगी ‘.
वार्ताकारों ने कुछ महिलाओ और पुलिस अधिकारियों के साथ दिल्ली को नोएडा से जोड़ने वाली सभी सड़कों का मुआयना किया. साधना रामचंद्रन ने कहा: ‘जब हमने सड़कों का निरीक्षण किया तो पाया कि प्रदर्शनकारी सही थे.कई सड़कें खुली हैं, जिन्हें पुलिस ने बंद कर रखा है.मैं बेहद व्यथित हूं कि नोएडा-फरीदाबाद मार्ग, जो शुक्रवार को खुला था उसे पुलिस ने फिर बंद कर दिया है. जिस किसी ने भी यह किया है वह अब सुप्रीम कोर्ट के प्रति जवाबदेह है.’ शाहीन बाग की एक दादी ने साधना रामचंद्रन से कहा कि जब सरकार सीएए वापस लेगी तो रोड खाली होगा, वरना नहीं.दूसरी महिला ने कहा:अगर आधी सड़क खुलती है तो सुरक्षा चाहिए. सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस नहीं, सुप्रीम कोर्ट ले. उन्होंने कहा कि स्मृति ईरानी ने हमारे बारे में कहा है कि ‘ शाहीन बाग की महिलाएं बातचीत के लायक नहीं हैं ‘.जिन लोगों ने शाहीन बाग के खिलाफ बोला है उनके खिलाफ अदालती कार्रवाई हो ‘.

सुप्रीम कोर्ट ने धरना-प्रदर्शन को भारत के नागरिको का अधिकार माना. लेकिन चिंता जताई कि शाहीन बाग़ वाली सड़क बंद होने से लोग परेशान हो रहे हैं. कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों को दूसरे स्थान पर जाने का सुझाव दिया,जहां कोई सार्वजनिक स्थान इसके चलते बंद न हो.कोर्ट ने 17 फरवरी की सुनवाई में कहा था कि लोगों को शांतिपूर्वक और कानूनी रूप से विरोध करने का मौलिक अधिकार है.कोर्ट केवल शाहीन बाग़ में रास्ता बंद होने से परेशान हैं, क्योंकि इससे अराजक स्थिति पैदा हो सकती है.

कुछ लोगो को आशंका रही कि जैसे 1919 में ब्रिटिश शासन के दौरान ब्रिगेडियर रेगिनाल्ड डायर के आदेश पर अमृतसर के जलियांवाला बाग़ में उपस्थित करीब एक हज़ार निहत्थे लोगो को गोलियो से भून दिया गया था वैसा ही कुछ शाहीन बाग़ के आंदोलंकारियोन के खिलाफ न हो जाये. भक्तगणो ने सोशल मीडिया पर इसकी ‘फर्माइश’ भी की.उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ,केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर, भाजपा (दिल्ली) के प्रवेश वर्मा और कपिल मिश्रा जैसे नेताओ ने खुल कर यह नारे लगाये या उनका समर्थन किया:“ देश के गद्दारों को गोली मारो सालों को “.योगी जी के बोल थे: दूसरी पार्टियां गद्दारों को बिरयानी खिला रही हैं,हम उन्हे गोलियां खिलायेंगे.अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा ने यहां तक कहा कि ये आंदोलनकारी गद्दार ही नहीं सम्भावित बलात्कारी भी हैं जो “ हमारी बहनों और बेटियों का बलात्कार करेंगे. उनको हमेशा के लिये खामोश कर दो “.

खुद अमित शाह ने खुले आम कहा कि दिल्ली विधान सभा चुनाव मे मतदाता बीजेपी के पक्ष मे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का बटन ऐसे दबायें कि उसके करेंट के झटके शाहीन बाग़ (के आंदोलनकारियों) को लगे. हम जानते हैं कि दिल्ली के पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक, अमित शाह के इशारे पर कुछ भी कर-करा सकते हैं.दिल्ली पुलिस, दंगों से पहले जामिया और जेएनयू परिसर में निहत्थे छात्रो पर हिंसक हमले कर कुछ ‘ रियाज़ ’ पहले ही कर चुकी थी.

शाहीन बाग़ में महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट के नुमाइंदों से जो सवाल पूछे, उनके जवाब नहीं मिले हैं. मोदी सरकार खुद शाहीन बाग़ के आंदोलनकारियों से बातचीत नहीं करना चाहती है.लेकिन वह चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट बीच का रास्ता निकाल दे और भारत की राजसत्ता के इस संकट पर पर्दा डाल दे.यह सब इसलिये कि शाहीन बाग़ प्रकरण में सरकार की कहीं मिट्टी पलीद न हो जाये !

  • सीपी नाम से ज्यादा ज्ञात पत्रकार-लेखक,फिलवक्त अपने गांव के आधार से समाचारपत्र, पत्रिकाओं के लिए और सोशल मीडिया पर लिखते हैं.उन्होंने हाल में न्यू इंडिया में चुनाव, आज़ादी के मायने ,सुमन के किस्से और न्यू इंडिया में मंदी जैसी कई ई-बुक लिखी हैं, जो वेब पोर्टल http://NotNul.com पर उपलध हैं. लेखक से [email protected] पर सम्पर्क किया जा सकता है.
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