क्या मोदी-शाह के निशाने पर आ गए हैं भूपेश बघेल?

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नजदीकी कुछ बड़े लोगों पर आयकर विभाग द्वारा पिछले तीन-चार दिनों में मारी गई जोरदार छापामार कार्रवाई से छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक तरह से भूचाल आ गया है। ऐसा माना जा रहा है कि यह कार्रवाई राज्य सरकार को अस्थिर करने के उद्देश्य से हुई है।

राज्य की राजधानी के महापौर एजाज ढेबर, पूर्व मुख्य सचिव व वर्तमान में रेरा के अध्यक्ष विवेक ढांढ, मुख्यमंत्री कार्यालय की उपसचिव सौम्या चौरसिया, मीनाक्षी टुटेजा, डॉ. ए फरिश्ता, एपी त्रिपाठी, संजय संचेती, कमलेश जैन, अमोलक सिंह भाटिया, गुरुचरण होरा, अजय साधवानी आदि के यहां छापे पड़े हैं। इनके घरों, व्यवसायिक परिसरों और कार्यालयों पर आयकर के लगभग 200 अधिकारियों ने दिल्ली से आकर दबिश दी।

घटनाक्रम इतना नाट्यपूर्ण और सनसनीखेज रहा कि स्थानीय अधिकारियों को सूचित तक नहीं किया गया और प्रदेश पुलिस की बजाए सीआरपीएफ को सुरक्षा के लिए अपने साथ रखा गया। मीनाक्षी टुटेजा एक बड़े अधिकारी अनिल टुटेजा की पत्नी हैं जिनकी ब्यूटी पार्लरों की चेन है। पिछली सरकार के दौरान हुए नान घोटाले में अनिल टुटेजा पर भी ऊंगलियां उठी थीं लेकिन हाल ही में उन्हें प्रशासन की मुख्यधारा में ले आया गया है। ढांढ सीएम के नजदीक हैं तथा अमोलक भाटिया और गुरुचरण होरा शराब और होटल कारोबार से जुड़े व्यवसायी हैं। त्रिपाठी, संचेती व कमलेश जैन सीए हैं। साधवानी भी कांग्रेस के करीबी बताए गए हैं।

आईटी टीम ने अनेक ठिकानों को सील कर दिया है, कई लोगों से पूछताछ की है और बड़ी संख्या में दस्तावेज जब्त कर अधिकारी दिल्ली लौट गए हैं। सौम्या चौरसिया घर पर नहीं मिलीं तो पुलिस कंट्रोल रूम को लाईव दिखाकर उनका घर सील बंद किया गया। 

बताया जा रहा है कि पोलिटिकल फंडिंग की आशंका में ये छापे मारे गए हैं। आयकर विभाग के साथ केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो, केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, वित्त मंत्रालय आदि विभागों के भी अधिकारी इस टीम में शामिल थे। इस कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस ने शनिवार को शहर के गांधी मैदान में बड़ी सभा की और आयकर विभाग के दफ्तर को घेर लिया।

केन्द्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। भूपेश बघेल शनिवार की केबिनेट बैठक को स्थगित कर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने के लिए दिल्ली गए लेकिन मौसम खराब होने की वजह से उनके विमान को जयपुर उतारा गया था। रविवार को उन्होंने अंतत: इस विषय पर श्रीमती गांधी से मिलकर चर्चा की। साथ ही आज दिल्ली में ही कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया और प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार द्वारा नान घोटाले की जांच शुरू करने के कारण आयकर के ये छापे मारे गये हैं।

प्रदेश कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के इशारे पर राज्य सरकार को अस्थिर करने के लिए ये छापे मारे गए हैं। दरअसल पिछले दिनों छत्तीसगढ़ सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कुछ नजदीकियों के खिलाफ आर्थिक अपराधों के मामले दर्ज कर जांच शुरू की गई है। इनमें रमन सिंह के खासमखास रहे पूर्व नौकरशाह अमन सिंह और उनकी पत्नी यास्मिन शामिल हैं। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि लगभग तीन महीने पहले भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक देवजी भाई पटेल ने बघेल सरकार के काम के तौर-तरीकों को लेकर एक पत्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भेजा था। यह कार्रवाई पीएमओ के निर्देश पर की गई है। इसे लेकर अब प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच संघर्ष तेज हो गया है।

भाजपा के नेता तो इस पर बहुत ज्यादा कुछ नहीं बोल रहे हैं लेकिन कांग्रेस मुखर हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा है कि 15 साल पुरानी भाजपा को उखाड़ फेंकने के कारण वह कांग्रेस से बौखलाई हुई है और प्रधानमंत्री मोदी की नीयत में खोट है। बघेल के अनुसार भाजपा बदलापुर की राजनीति कर रही है।

इन आयकर छापों से क्या निकलकर आता है, यह तो बाद की बात है, लेकिन यह सच है कि भूपेश बघेल ने जिस तरीके से लगभग एक वर्ष पहले हुए विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की थी वह अन्य दो राज्यों (मध्यप्रदेश व राजस्थान- जहां इसी प्रदेश के साथ चुनाव हुए थे) के मुकाबले बेहद शानदार तो थी ही, अन्य कांग्रेसी राज्य सरकारों की तुलना में यह सबसे मजबूत भी है। शुरू से ही बघेल ने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ बहुत आक्रामक रवैया अपनाया हुआ है।

जहां एक ओर उन्होंने प्रदेश में महात्मा गांधी को विभिन्न शासकीय और सांगठनिक स्तरों पर केन्द्र में लाया है, वहीं गांधी के हत्यारे नथूराम गोडसे को लेकर भाजपा-आरएसएस की हमेशा घेराबंदी की है। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने प्रदेश के बाहर-भीतर भाजपा व संघ की भरपूर आलोचना की है। इतना ही नहीं, नागरिकता विरोधी कानूनों के खिलाफ भी बघेल ने जमकर आवाज उठाई है। उन्होंने तो यहां तक कह दिया है कि वे नागरिकता संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। श्री बघेल ने राज्य के नागरिकों से भी अनेक अवसरों पर आह्वान किया है कि वे भी उनका अनुसरण करें।

उन्होंने नागरिकों को यह कहकर आश्वस्त भी किया है कि सीएम होने के नाते जनता की सुरक्षा करना उनका फर्ज है इसलिए बिना घबराए नागरिक इस कानून की अवज्ञा करें। बघेल ने केन्द्र पर धान खरीदी के बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी फतह हासिल की थी। केन्द्र ने राज्य से बढ़े हुए धान खरीदी के लक्ष्य और समर्थन मूल्य के अनुरूप 40 लाख मीट्रिक टन चावल के केन्द्रीय पूल के जरिये ऊपार्जन से इनकार कर दिया था। इससे प्रदेश के समक्ष संकट की स्थिति पैदा हो गई थी लेकिन राज्यपाल को भी अपने पक्ष में कर बघेल ने इस मुद्दे को सलटा लिया था। 

भूपेश बघेल की सरकार, प्रशासन और संगठन पर काफी मजबूत पकड़ बन गई है। इसके साथ ही पिछले दिनों कांग्रेस को शहरी और ग्रामीण निकायों में जो जबर्दस्त सफलता मिली है, उससे भी वे एक ताकतवर नेता के रूप में उभरे हैं। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठ सकता है कि क्या प्रदेश सरकार को अस्थिर व कमजोर करने के लिए ये छापे मारे गए हैं और जिस प्रकार से बघेल प्रदेश भाजपा के खिलाफ आक्रामक रूख अपनाए हुए हैं, उससे कहीं वे मोदी और शाह के निशाने पर तो नहीं आ गए हैं, जैसे गाहे-बगाहे विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री आते रहते हैं।

(देशबंधु में आज का संपादकीय)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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