यह आधार कार्ड का जनविरोधी उपयोग है..

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-संजय कुमार सिंह।।


आज के अखबारों में खबर है कि वोटर कार्ड को भी आधार कार्ड से लिंक कराना होगा। इससे पहले, पैन कार्ड को आधार कार्ड से लिंक करने का आदेश आ चुका है। उसकी अपनी दिक्कतें हैं और लोगों को जबरदस्ती लिंक करने के लिए कहने और बनाए गए नियम से जुड़ी अलग समस्याएं हैं। फिर भी पैनकार्ड को आधार से लिंक करने का मतलब है और जो मतलब पैनकार्ड को लिंक करने का है वह वोटर कार्ड को लिंक करने का नहीं है। अगर सबको लिंक ही करना है तो अलग-अलग क्यों? और अलग-अलग है तो लिंक करना क्यों जरूरी है। ज्यादा दिन नहीं हुए, बिना मतदाता कार्ड के चुनाव होते थे और अब जब मतदाता कार्ड से चुनाव हो रहे हैं तो आम मतदाताओं के लिए क्या बदल गया? मोटे तौर पर इससे सरकारों और ठेकेदारों को जो फायदा हुआ हो, मुमकिन है नेताओं को भी कुछ फायदा हुआ हो पर मतदाताओं को कोई फायदा हुआ – ऐसा मुझे नहीं लगता है। फिर इतनी जल्दी क्यों है?
कार्ड पर कार्ड और एनआरसी, सीएए सब क्यों जरूरी है और यह सब जिसके पैसों से हो रहा है जिसके लिए हो रहा है उसे क्या फायदा है? मुख्य काम बेरोजगारी है, जीडीपी की गिरती दर को रोकना है तो सीएए, एनआरसी के साथ आधार कार्ड लिंक करो। लोगों के पास काम नहीं है तो किसी ना किसी काम में फंसाए रखना है। वोटर आईकार्ड को आधार से जोड़ने से बेहतर नहीं होगा कि आधार कार्ड से मतदाता सूची बना दी जाए। लोगों से कहा जाए कि अपना नाम देख लें नहीं है तो दावा करें। और दो-चार दस दिन में सब ठीक हो जाए। आधार कार्ड जीवित होने तक काम आना है और मरने के बाद मृत्यु पंजीकरण होते ही आधार रद्द तो मतदाता भी रद्द उसके खाते भी बंद आयकर, आईटीआईर सब बदं। आधार को एक अकेला पूरा दस्तावेज बनाने के लिए काम क्यों नहीं किया जा रहा है कि दस कार्ड बनाने में समय, ऊर्जा और धन बर्बाद किया जा रहा है। अभी तो हालत यह है कि अलग चुनावों के लिए मतदाताओं की सूची भी अलग है। यह भ्रष्टाचार को ढोना नहीं तो और क्या है?

अगर इसका मकसद फर्जी और डुप्लीकेट वोटरों को हटाना है तो यह आधार कार्ड से नई मतदाता सूची बनाकर भी किया जा सकता है। उसमें फर्जी वोटर होने की संभावना ही नहीं रहेगी। अगर आधार कार्ड फर्जी नहीं हों तो। पर ऐसा है नहीं। आधार कार्ड फर्जी पाए जाते रहे हैं और वैसी हालत में मतदाता कार्ड भी फर्जी बनेंगे। भले थोड़ा मुश्किल हो। चुनाव आयोग मतदाता सूची में माथा खपाने से बेहतर है ईवीएम की निष्पक्षता और हैक प्रूफ होने पर जोर लगाए। अलग से राशन कार्ड बनाने की भी कोई जरूरत नहीं है। यह भी आधार से हो सकता है। एक आधार कार्ड ऐसा क्यों नहीं बनाया जाए कि उससे जिसे राशन लेना हो राशन ले, इलाज कराने वाले इलाज करा ले और सबसिडी लेने वाला सबसिडी ले ले। हरेक काम के लिए अलग कार्ड बनाने से बेहतर है कि एक ही कार्ड अलग काम के लिए उपयुक्त हो।
एक खबर के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि भारत में बाहर से आकर लोग नकली राशनकार्ड के जरिए अपना वोटर कार्ड बनाने में कामयाब हो जाते हैं। ऐसे घुसपैठियों की निशानदेही मुश्किल हो जाती है। अगर ऐसा है तो आधार सबसे पहले जरूरी कर दिया जाए। जन्म होते ही जन्म प्रमाणपत्र के रूप में आधार कार्ड दिया जाए और फिर बच्चा जिस-जिस सुविधा के योग्य होता जाए उसे उसी के योग्य कर दिया जाए। बिना आधार के मतदाता सूची मे नाम ही न लिखा जाए। उसमें उसकी शिक्षा का विवरण से लेकर माता-पिता का विवरण सब हो सकता है और 18 साल का होने पर वह अपने आप मतदाता बन सकता है और ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का टेस्ट देकर उसी को ड्राइविंग के लिए वैध किया जा सकता है। नकली कार्ड लोग उसकी जरूरत होती है इसलिए बनवाते हैं। मतदाता नहीं हों तो मोहल्ले में नाली नहीं बनेगी, राशन दुकान नहीं खुलेगी। पानी नहीं आएगा। ऐसा होता आया है। होना यह चाहिए कि इसकी जरूरत ही न पड़े लोग फर्जी कार्ड नहीं बनवाएंगे। और वैसे भी फर्जी बनता है इसलिए बनवाते हैं। सरकार उसे रोक नहीं पाती। सारी गड़बड़ी चलती रहे और आधार के जरिए जनता को मिलने वाले लाभ रोक दिए जाएं। यह आधार का जनविरोधी उपयोग है।

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About Post Author

Sanjaya Kumar Singh

छपरा के संजय कुमार सिंह जमशेदपुर होते हुए एनसीआर में रहते हैं। 1987 से 2002 तक जनसत्ता में रहे और अब भिन्न भाषाओं में अनुवाद करने वाली फर्म, अनुवाद कम्युनिकेशन (www.anuvaadcommunication.com) के संस्थापक हैं। संजय की दो किताबें हैं, ‘पत्रकारिता : जो मैंने देखा जाना समझा’ और ’जीएसटी – 100 झंझट’।
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