डबल इंजन की सरकारें – इमरान प्रतापगढ़ी और कन्हैया कुमार..

Page Visited: 854
0 0
Read Time:3 Minute, 43 Second

-संजय कुमार सिंह।।

बिहार और उत्तर प्रदेश में डबल इंजन की सरकारें हैं। चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री भाजपा को विजयी बनाने की मांग करते हुए यही कहते थे। उनका कहना होता था कि केंद्र में भाजपा की सरकार के साथ राज्य में भी भाजपा की सरकार हो तो विकास की गाड़ी में डबल इंजन लग जाएंगे और विकास तेजी से होगा। 2014 में केंद्र में सत्ता बनाने के बाद कांग्रेस मुक्त भारत का सपना देखने वाले अब आम आदमी पार्टी से ज्यादा परेशान है और डबल इंजन की सरकारें कई राज्य में बदल चुकी हैं। बिहार की जनता ने डबल इंजन की सरकार नहीं चुनी थी पर मुख्यमंत्री नीतिश कुमार की अंतरात्मा की आवाज ने राज्य में भाजपा की सरकार बनवा दी। उसके बाद जो हाल है सो अपनी जगह। मैं अभी उसकी चर्चा नहीं कर रहा पर आज के अखबारों में दो खबरें दिखीं जिनकी चर्चा बनती है।

पहली खबर नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ मुरादाबाद में प्रदर्शन के लिए मशहूर शायर इमरान प्रतापगढ़ी को 1.04 करोड़ रुपये के जुर्माने का नोटिस दिए जाने की है। यह खबर सरकार की वीरता या प्रशासनिक कुशलता और दक्षता से संबंधित है इसलिए खूब छपी है। खूब दिख रही है। खबर है कि मुरादाबाद जिला प्रशासन ने धारा-144 का उल्लंघन करने के आरोप में यह कार्रवाई की है। क्विंट के अनुसार, इस नोटिस पर शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने ट्वीट कर कहा, “सरकार आंदोलनकारियों को डराने के नए नए बहाने खोज रही है. लेकिन इस बार तो डरना नामुमकिन, इस बार तो बात वजूद की है!” पर अभी वह मुद्दा नहीं है। मुद्दा है बिहार में कन्हैया की सुरक्षा का।

भाकपा नेता व जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्‍यक्ष कन्‍हैया कुमार 26 जनवरी से बिहार में जन मन यात्रा पर हैं। मुख्य रूप से यह भी सीएए के खिलाफ है। आए दिन उनपर या उनके काफिले पर हमले हुए हैं। कहीं पथराव हुआ तो कहीं काले झंड़े दिखाए गए। अब साफ है कि इसका संबंध कन्हैया कुमार की सुरक्षा से है और इसमें आवश्यक सुधार संशोधन या वृद्धि किए जाने की आवश्यकता है। शुक्रवार को आरा में अब तक का सबसे बड़ा हमला हुआ। लगातार हमले को देखते हुए भाकपा ने उन्‍हें सुरक्षा की गारंटी देने की मांग राज्य सरकार से की है। पार्टी महासचिव डी. राजा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखा है।

दोनों खबरों से आप समझ सकते हैं कि डबल इंजन सरकार की ताकत कहां लग रही है। वैसे भाजपा की हार के कारणों का विश्लेषण अलग मुद्दा है और उसमें जो लिखा और बताया जा रहा है वह आप न जानते हों तो पढ़ना चाहिए। जानते हैं तो अखबार पढ़ना बंद कर दीजिए।

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Visit Us On TwitterVisit Us On FacebookVisit Us On YoutubeVisit Us On LinkedinCheck Our FeedVisit Us On Instagram