दैनिक जागरण की पत्रकारिता..

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-संजय कुमार सिंह।।
शाहीनबाग में गोली चलाने वाला कपिल गुर्जर आम आदमी पार्टी का सदस्य है – यह खबर दैनिक जागरण ने अपने राष्ट्रीय संस्करण में लीड लगाई। आम तौर पर ऐसे मामलों में संबंधित पार्टी का पक्ष लिया जाता है। दैनिक जागरण ने नहीं लिया। यह खबर पुलिस की लीक पर आधारित है। दुनिया जानती है कि ऐसी खबरें किसलिए लीक की जाती है फिर भी दैनिक जागरण ने इसे लीड बनाया। हालांकि लीक करने का मकसद भी ऐसा ही होता है। पर अखबारों की अपनी नैतिकता होती है, होनी चाहिए नहीं निभाई गई। कल वह खबर लगभग गलत साबित हुई – आप मानिए न मानिए। दावे और उनका जवाब दोनों खबर है। जब लीक बिना पक्ष के लीड थी तो बाकी भी होनी चाहिए थी। नहीं है।


कल चुनाव आयोग ने कपिल को आप का सदस्य बताने के लिए दिल्ली पुलिस के अफसर के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की वह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। कायदे से होनी चाहिए थी। खबर देने वाले के खिलाफ कार्रवाई हो तो खबर क्यो नहीं? किसी शूटर की पार्टी बताने से ज्यादा बड़ी खबर है चुनाव के दौरान किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होना। आपको बता दूं कि दिल्ली पुलिस के डीसीपी राजेश देव के खिलाफ चुनाव आयोग ने कहा कि उनका बयान पूरी तरह अवांछित था और उन्हें चुनावी कार्य से रोक दिया गया है। आयोग ने कहा कि देव के व्यवहार से स्वतंत्रत एवं निष्पक्ष चुनाव कराने पर असर पड़ेगा। आम आदमी पार्टी ने पुलिस अधिकारी के खिलाफ चुनाव आयोग से शिकायत की थी। इससे पहले भी चुनाव आयोग ने दक्षिण-पूर्वी ज़िले के डीसीपी चिन्मय बिस्वाल को तत्काल प्रभाव से हटा दिया था। 2008 बैच के आईपीएस बिस्वाल को गृह मंत्रालय में रिपोर्ट करने को कहा गया है. उनकी जगह जिले के एडिशनल डीसीपी कुमार ज्ञानेश को पदभार सौंपा गया है। आयोग की इस कार्रवाई के पीछे शाहीन बाग की घटनाएं मानी जा रही है। इसके बाद भी जागरण में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है।
यही नहीं, केंद्रीय मंत्री की अपील के बाद दिल्ली में गोली चलाकर एक युवक को घायल कर देने वाला ‘बच्चा’, मतदाता सूची में दर्ज है। इस आशय का आरोप कल दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने प्रेस कांफ्रेंस कर लगाया। यह खबर आज दैनिक जागरण में पहले पन्ने पर नहीं है। कोई शूटर आम आदमी का पार्टी का सदस्य है यह अगर पहले पन्ने की लीड है तो पुलिस जिस शूटर को बच्चा बता रही है उसका नाम मतदाता सूची में कैसे हो सकता है? अगर है तो खबर है। प्रेस कांफ्रेंस करके दी जा रही है। अगर नहीं है, तो भी खबर है, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गलत खबर दे रहे हैं। यही नहीं, मतदाता सूची में नाम है कि नहीं इसकी पुष्टि करना पांच सात मिनट का काम है, करके खबर की जानी चाहिए थी। प्रेस कांफ्रेंस की यह सूचना जरा सी मेहनत करके एक्सक्लूसिव बनाई जा सकती थी पहले पन्ने पर नहीं है।
आज एक और बड़ी खबर है, गुंजा की गूंज। चूंकि गुंजा प्रधानमंत्री की समर्थक है, प्रधानमंत्री उसे ट्वीटर पर फॉलो करते हैं इसलिए उसका शाहीनबाग बुर्के में जाना, गलत नाम बताना, पकड़ी जाना – बड़ी खबर है। उसे वहां पीटा नहीं गया। पुलिस वालों ने सुरक्षित निकाल लिया। यह सब हुआ – यही खबर है। कैसे हुआ क्यों हुआ। इसपर जानकारी इकट्ठा कर अच्छी खबर बन सकती थी। वह भी आज दैनिक जागरण में पहले पन्ने पर नहीं है। जब प्रधाननंमत्री कह चुके हैं कि शाहीनबाग संयोग नहीं प्रयोग है तो उनकी समर्थक यू ट्यूबर वहां चेहरा ढंडकर क्यों पहुंची थी? यही नहीं, दिल्ली पुलिस कोमल शर्मा का पता एक महीने में भी नहीं लगा पाई है तो इसके बारे में कुछ बताएगी? जाहिर है, यह काम अखबारों का है पर दैनिक जागरण का नहीं।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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