शाहीनबाग शूटर के परिवार ने आप से संबंध होने से इनकार किया..

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-संजय कुमार सिंह।।

दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को कहा कि पिछले सप्ताह दिल्ली के शाहीन बाग में प्रदर्शन स्थल पर गोलियां चलाने वाला कपिल गुर्जर आम आदमी पार्टी का सदस्य है। इसके बाद से भक्त लोग परेशान हैं कि विरोधियों ने इसपर कुछ नहीं लिखा। भक्तों को पता नहीं चला, उनके भगवान और प्रचार तंत्र ने नहीं बताया और वे जानना नहीं चाहते कि कपिल के पिता और भाई ने पुलिस के दावों से इनकार किया है। कपिल गुर्जर के पिता और भाई का कहना है कि उन्होंने आम आदमी पार्टी ज्वाइन नहीं की है। मीडिया में जो खबर पुलिस के हवाले से चल रही है वो गलत है।

कपिल गुर्जर के पिता गजेंद्र सिंह ने कहा, ‘कोई अगर आप के पास आएगा तो आप उसका सम्मान करेंगे। ऐसा ही हमारे साथ हुआ। आम आदमी पार्टी के नेता हमारे पास आए और हमने उनका सम्मान किया। लेकिन पार्टी ज्वाइन नहीं की। कपिल के चाचा फतेह सिंह ने कहा, ‘मुझे पता नहीं कि कहां से ये फोटो आ गए हैं। मेरे भतीजे कपिल का किसी भी राजनीतिक पार्टी से कोई संबंध नहीं है। न ही मेरे परिवार का कोई सदस्य किसी पार्टी से जुड़ा हुआ है। मेरे भाई और कपिल के पिता गजेंद्र सिंह ने 2008 में बहुजन समाज पार्टी की ओर से विधानसभा चुनाव लड़ा था और वह हार गए थे। उसके बाद से हमारे परिवार में किसी का भी किसी राजनीतिक पार्टी से कोई संबंध ही नहीं रहा।

कपिल गुर्जर 25 साल का है और गोली चलाते वक्त जय श्रीराम कहा था। पकड़ कर ले जाए जाते वक्त उसे, “हमारे देश में सिर्फ हिन्दुओं की चलेगी और किसी की नहीं”, कहते हुए सुना गया था। बाद में उसकी फोटो आप नेताओं के साथ मिली। इस पर कपिल के परिवार वालों का कहना है, आम आदमी पार्टी वाले पिछले लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान हमारे घर आए थे। उस दौरान हम सब लोगों को पार्टी की टोपी पहनाई गई और यह फोटो उसी मौके का है। गजेन्द्र सिंह ने आगे कहा, मैं बसपा में था और 2012 का चुनाव बसपा उम्मीदवार के रूप में लड़ा था। उसके बाद मैं अस्वस्थ हो गया औऱ राजनीति छोड़ दी। हमारा राजनीति से कोई संबंध नहीं है। इस बार भाजपा वाले चुनाव प्रचार के लिए आए थे। मैंने उन्हें माला पहनाकर उनका स्वागत किया। वैसे ही जैसे मैं किसी अन्य उम्मीदवार का करूंगा।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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